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एचपीएससी फर्जीवाड़े में अब नागर के आकाओं की तलाश
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चंडीगढ़। हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्तियों में हुए फर्जीवाड़े की जांच विजिलेंस ने तेज कर दी है। स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को अब उप सचिव अनिल नागर के आकाओं की तलाश है। ब्यूरो के रडार पर अब इस मामले से जुड़ी बड़ी मछलियां हैं। ये खंगाला जा रहा है कि उप सचिव किसकी शह पर आयोग की भर्तियों में नंबर बढ़ाने के लिए पैसे लेता आ रहा था। पैसा किस किस को जाता था, इसकी भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच अधिकारी नागर से यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि उनके सिर पर किसका हाथ है।
जांच अधिकारियों ने नागर के करीबियों, जानकारों व मोबाइल पर अधिक बात करने वालों को सूचीबद्ध कर पूछताछ के लिए बुलाना शुरू कर दिया है। नागर के जब्त मोबाइल फोन, काल डिटेल समेत बरामद किए गए दस्तावेजों के आधार पर विजिलेंस की जांच आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को मामले की जांच कर रहे एसपी हिमांशु गर्ग, डीएसपी सरीफ सिंह व उनकी टीम ने नागर के दोस्तों और सगे संबंधियों से गहन पूछताछ की। कुछ अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाना है। इनमें एचपीएससी के कुछ कर्मचारी व अधिकारी भी शामिल हैं। विजिलेंस का मानना है कि अकेला अधिकारी इतनी बड़ी रकम और इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं कर सकता है।
सुरक्षा कड़ी, बरती जा रही गोपनीयता
विजिलेंस कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। डीजी विजिेंलस के निर्देशानुसार मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाने के लिए अनुमति किसी को नहीं है। उच्च अधिकारियों के निर्देश आने के बाद ही बाहरी लोगों को अंदर जाने दे रहे हैं। नागर के वकीलों तक को वकालत नामे पर हस्ताक्षर कराने के लिए कार्यालय के बाहर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। एसपी विजिलेंस से बात के बाद ही उनको अंदर जाने दिया गया। वकीलों तक को ये नहीं बताया गया कि आखिरकार नागर को अदालत में किस समय पेश किया जाएगा।
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घर पर छाया सन्नाटा
अनिल नागर पंचकूला के सेक्टर 17 स्थित 396 नंबर मकान में द्वितीय तल पर किराए पर रहता है। मामले के खुलासे के बाद से घर के बाहर सन्नाटा छाया हुआ है। परिवार के सदस्य भी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं। उधर, आयोग के कार्यालय में भी हड़कंप की स्थिति है और कोई भी बोलने से बच रहा है। नागर के एक दोस्त ने बताया कि उन्होंने नागर के एक साथ एमएमएल की है। दोस्तों में नागर की छवि ईमानदारी की है। नागर का चयन वर्ष 2003 में एचसीएस ज्यूडिशियल के लिए हुआ था, लेकिन मामला अदालत में जाने के कारण 2014 में ज्वाइन किया। बाद में 2016 में एचसीएस एग्जीक्यूटिव का पेपर पास किया था।
नागर की निलंबन या बर्खास्तगी
हरियाणा सरकार अब एचसीएस के निलंबन या बर्खास्तगी को लेकर सेवा नियमों के तहत विचार कर रही है। वहीं, अभी इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। कानूनविदों की ये भी सलाह ली जा रही है कि कहीं ये मामला हाल में बनाए नए नकल रोधी कानून के तहत आता है या नहीं। नए कानून के तहत परीक्षा में नकल या षडयंत्र करने वालों को दस साल सजा और दस लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
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जांच अधिकारियों ने नागर के करीबियों, जानकारों व मोबाइल पर अधिक बात करने वालों को सूचीबद्ध कर पूछताछ के लिए बुलाना शुरू कर दिया है। नागर के जब्त मोबाइल फोन, काल डिटेल समेत बरामद किए गए दस्तावेजों के आधार पर विजिलेंस की जांच आगे बढ़ रही है। शुक्रवार को मामले की जांच कर रहे एसपी हिमांशु गर्ग, डीएसपी सरीफ सिंह व उनकी टीम ने नागर के दोस्तों और सगे संबंधियों से गहन पूछताछ की। कुछ अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाना है। इनमें एचपीएससी के कुछ कर्मचारी व अधिकारी भी शामिल हैं। विजिलेंस का मानना है कि अकेला अधिकारी इतनी बड़ी रकम और इतना बड़ा फर्जीवाड़ा नहीं कर सकता है।
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सुरक्षा कड़ी, बरती जा रही गोपनीयता
विजिलेंस कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। डीजी विजिेंलस के निर्देशानुसार मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाने के लिए अनुमति किसी को नहीं है। उच्च अधिकारियों के निर्देश आने के बाद ही बाहरी लोगों को अंदर जाने दे रहे हैं। नागर के वकीलों तक को वकालत नामे पर हस्ताक्षर कराने के लिए कार्यालय के बाहर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। एसपी विजिलेंस से बात के बाद ही उनको अंदर जाने दिया गया। वकीलों तक को ये नहीं बताया गया कि आखिरकार नागर को अदालत में किस समय पेश किया जाएगा।
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घर पर छाया सन्नाटा
अनिल नागर पंचकूला के सेक्टर 17 स्थित 396 नंबर मकान में द्वितीय तल पर किराए पर रहता है। मामले के खुलासे के बाद से घर के बाहर सन्नाटा छाया हुआ है। परिवार के सदस्य भी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं। उधर, आयोग के कार्यालय में भी हड़कंप की स्थिति है और कोई भी बोलने से बच रहा है। नागर के एक दोस्त ने बताया कि उन्होंने नागर के एक साथ एमएमएल की है। दोस्तों में नागर की छवि ईमानदारी की है। नागर का चयन वर्ष 2003 में एचसीएस ज्यूडिशियल के लिए हुआ था, लेकिन मामला अदालत में जाने के कारण 2014 में ज्वाइन किया। बाद में 2016 में एचसीएस एग्जीक्यूटिव का पेपर पास किया था।
नागर की निलंबन या बर्खास्तगी
हरियाणा सरकार अब एचसीएस के निलंबन या बर्खास्तगी को लेकर सेवा नियमों के तहत विचार कर रही है। वहीं, अभी इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। कानूनविदों की ये भी सलाह ली जा रही है कि कहीं ये मामला हाल में बनाए नए नकल रोधी कानून के तहत आता है या नहीं। नए कानून के तहत परीक्षा में नकल या षडयंत्र करने वालों को दस साल सजा और दस लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।