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Panchkula News: स्कूलों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम बस कागजों में
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मानसून सक्रिय होने के बाद शिक्षा विभाग हुआ अलर्ट, जर्जर स्कूलों का मांगा गया एस्टिमेट
मोरनी के जर्जर प्राइमरी स्कूल का प्रस्ताव निदेशालय भेजा, बजट का इंतजार
आदित्य शर्मा
पंचकूला। जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम अभी कागजों तक ही सीमित है। पहली बारिश के बाद जिले के 300 से अधिक प्राइमरी और मिडल स्कूलों में छत टपकने, दीवारों में सीलन और शौचालयों में गंदगी की शिकायतें बढ़ गई हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों को स्वयं कक्षाओं और छतों की सफाई करनी पड़ रही है। ऐसे में जिला शिक्षा विभाग ने सभी प्राइमरी, मिडल और सेकेंडरी स्कूलों से मरम्मत कार्यों का विस्तृत एस्टिमेट मांगा है।
समग्र शिक्षा परियोजना के तहत स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट शिक्षा निदेशालय के वित्त विभाग से जारी किया जाएगा, जिसमें अभी समय लग सकता है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार स्कूल प्रबंधकों को पत्र भेजे जा चुके हैं। इसमें छत, फर्श, शौचालय, पेयजल और बिजली संबंधी समस्याओं का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और आवश्यकताओं के आधार पर बजट का आवंटन किया जाएगा।
मोरनी के शिल्यो स्कूल की हालत सबसे खराब
मोरनी के गांव शिल्यो स्थित प्राइमरी स्कूल की स्थिति सबसे अधिक खराब बताई जा रही है। समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं। छत को सहारा देने के लिए बल्लियां लगाई गई हैं और सुरक्षा के मद्देनजर भवन के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया गया है। मानसून के दौरान भवन की जर्जर हालत को देखते हुए अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने से हिचक रहे हैं। शिक्षा विभाग ने खतरे को देखते हुए जर्जर हिस्से को ध्वस्त कर उसके जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है। स्कूल का एस्टिमेट बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी और मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजा जा चुका है। अब समग्र शिक्षा परियोजना कार्यालय इसकी समीक्षा कर अंतिम स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय को भेजेगा।
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कुछ स्कूलों में एमपी लैड फंड से हुए मरम्मत कार्य
जिले में कुल 418 सरकारी स्कूल हैं। पीएम श्री, सीएम श्री और संस्कृति मॉडल स्कूलों को अपेक्षाकृत पर्याप्त बजट उपलब्ध है, जबकि अधिकांश प्राइमरी और मिडल स्कूलों को एस्टिमेट के आधार पर ही फंड जारी किया जाता है। रायपुररानी का प्यारेवाला मिडल स्कूल, चंडीकोटला स्कूल, गोरखनाथ जीपीएस पिंजौर, समनवा गांव जीपीएस रायपुररानी, फिरोजपुर स्कूल, खोईबवोनी जीपीएस पिंजौर, जीएमएसएस पिंजौर, जीएसएसएस रामगढ़ और जीपीएस चिकन पिंजौर में एमपी लैड फंड से मरम्मत कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। हालांकि जिले के अधिकांश स्कूल अभी भी बजट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि समग्र शिक्षा परियोजना के तहत बजट मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
कोट
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खतरनाक भवनों और स्थानों को तुरंत चिह्नित किया जा रहा है। स्कूलों के एस्टिमेट जिला शिक्षा अधिकारी और मौलिक शिक्षा अधिकारी से अनुमोदित होने के बाद बजट स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय भेजे जाएंगे। मोरनी के शिल्यो स्थित प्राइमरी स्कूल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भी निदेशालय को भेजा जा चुका है।
-जोगिंदर लाठर, जिला समग्र शिक्षा परियोजना अधिकारी
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मोरनी के जर्जर प्राइमरी स्कूल का प्रस्ताव निदेशालय भेजा, बजट का इंतजार
आदित्य शर्मा
पंचकूला। जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, लेकिन सरकारी स्कूलों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम अभी कागजों तक ही सीमित है। पहली बारिश के बाद जिले के 300 से अधिक प्राइमरी और मिडल स्कूलों में छत टपकने, दीवारों में सीलन और शौचालयों में गंदगी की शिकायतें बढ़ गई हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों को स्वयं कक्षाओं और छतों की सफाई करनी पड़ रही है। ऐसे में जिला शिक्षा विभाग ने सभी प्राइमरी, मिडल और सेकेंडरी स्कूलों से मरम्मत कार्यों का विस्तृत एस्टिमेट मांगा है।
समग्र शिक्षा परियोजना के तहत स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट शिक्षा निदेशालय के वित्त विभाग से जारी किया जाएगा, जिसमें अभी समय लग सकता है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार स्कूल प्रबंधकों को पत्र भेजे जा चुके हैं। इसमें छत, फर्श, शौचालय, पेयजल और बिजली संबंधी समस्याओं का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और आवश्यकताओं के आधार पर बजट का आवंटन किया जाएगा।
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मोरनी के शिल्यो स्कूल की हालत सबसे खराब
मोरनी के गांव शिल्यो स्थित प्राइमरी स्कूल की स्थिति सबसे अधिक खराब बताई जा रही है। समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं। छत को सहारा देने के लिए बल्लियां लगाई गई हैं और सुरक्षा के मद्देनजर भवन के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया गया है। मानसून के दौरान भवन की जर्जर हालत को देखते हुए अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने से हिचक रहे हैं। शिक्षा विभाग ने खतरे को देखते हुए जर्जर हिस्से को ध्वस्त कर उसके जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है। स्कूल का एस्टिमेट बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी और मौलिक शिक्षा अधिकारी को भेजा जा चुका है। अब समग्र शिक्षा परियोजना कार्यालय इसकी समीक्षा कर अंतिम स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय को भेजेगा।
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कुछ स्कूलों में एमपी लैड फंड से हुए मरम्मत कार्य
जिले में कुल 418 सरकारी स्कूल हैं। पीएम श्री, सीएम श्री और संस्कृति मॉडल स्कूलों को अपेक्षाकृत पर्याप्त बजट उपलब्ध है, जबकि अधिकांश प्राइमरी और मिडल स्कूलों को एस्टिमेट के आधार पर ही फंड जारी किया जाता है। रायपुररानी का प्यारेवाला मिडल स्कूल, चंडीकोटला स्कूल, गोरखनाथ जीपीएस पिंजौर, समनवा गांव जीपीएस रायपुररानी, फिरोजपुर स्कूल, खोईबवोनी जीपीएस पिंजौर, जीएमएसएस पिंजौर, जीएसएसएस रामगढ़ और जीपीएस चिकन पिंजौर में एमपी लैड फंड से मरम्मत कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। हालांकि जिले के अधिकांश स्कूल अभी भी बजट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि समग्र शिक्षा परियोजना के तहत बजट मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
कोट
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खतरनाक भवनों और स्थानों को तुरंत चिह्नित किया जा रहा है। स्कूलों के एस्टिमेट जिला शिक्षा अधिकारी और मौलिक शिक्षा अधिकारी से अनुमोदित होने के बाद बजट स्वीकृति के लिए शिक्षा निदेशालय भेजे जाएंगे। मोरनी के शिल्यो स्थित प्राइमरी स्कूल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव भी निदेशालय को भेजा जा चुका है।
-जोगिंदर लाठर, जिला समग्र शिक्षा परियोजना अधिकारी