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झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड के विरोध में आरडब्ल्यूए का प्रदर्शन आज, शिफ्ट न होने पर कोर्ट जाने की चेतावनी

Sat, 19 Jun 2021 02:03 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 02:03 AM IST
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RWA's protest against Jhuriwala dumping ground today, warning to go to court if shift is not done
पंचकूला। प्रदेश सरकार द्वारा सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27 व अन्य रिहायशी क्षेत्रों से 500 मीटर की कम दूरी पर झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाने के फैसले का विरोध जारी है। इस मामले को लेकर घग्गर पार सेक्टरों के निवासियों और शिवालिक विकास मंच के सदस्य शनिवार को प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एडवोकेट विजय बंसल विशेष रूप से शामिल होंगे। प्रदर्शन को लेकर आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रदर्शन को लेकर सेक्टर-25 आरडब्लयूए के सदस्यों ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मीटिंग की। इसमें प्रधान संजीव गोयल, महासचिव भगवान दास मित्तल, उपप्रधान बीआर मेहता, सदस्य केवल कृष्ण सिंगला ने हिस्सा लिया। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने के फैसले को वापस लेने के लिए प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया था, जोकि पूरा हो गया है। ऐसी स्थिति में शनिवार सुबह 11 बजे प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद हाईकोर्ट की शरण लेंगे और जनहित में आवाज बुलंद करेंगे। झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाया जाना बेहद निंदनीय है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पंचकूला को मेट्रोपोलिटन अथोरिटी बनाया है, जबकि इतने बड़े और विकसित शहर में डंपिंग ग्राउंड की कोई व्यवस्था नहीं है।
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शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने कहा कि झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाने का फैसले नियमों के गलत है। इस मामले को लेकर 2011 में भी हाईकोर्ट में पंचकूला के सेक्टर 23 स्थित डंपिंग ग्राउंड को शहर से बाहर पंजाब बॉर्डर के नजदीक गांव भानू में शिफ्ट करने के लिए उन्होंने बतौर याचिकाकर्ता जनहित याचिका नंबर 16951/2011 दायर की थी। सेक्टर 23 में बने डंपिंग ग्राउंड से सेक्टर 23-24-25-26-27-28 के निवासियों को बदबू का सामना करना पड़ रहा है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। हरियाणा के एचएसवीपी ने पंचकूला एक्सटेंशन के अंतर्गत बरवाला तक सेक्टर विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि उस समय भी कहा था कि झूरीवाला के आसपास भी आबादी है और यह वन क्षेत्र में आता है। यहां भारतीय वन अधिनियम 1927, पीएलपीए 1900, वन संरक्षण एक्ट 1980 आदि लागू है। झूरीवाला खोल ही रायतन वाइल्ड लाइफ सेंचरी के अंतर्गत है और इको सेंसिटिव जोन में है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर 12 मार्च 2013 को आदेश पारित कर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली को स्थानांतरित कर कार्यवाही करने के आदेश दिए थे।
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हाईकोर्ट के निर्देशानुसार एनजीटी की टीम ने याचिकाकर्ता विजय बंसल समेत सभी सदस्यों को सलाह देने के लिए बुलाया था। इसमें बंसल ने सुझाव दिया था कि इस अस्थायी डंपिंग ग्राउंड से स्थानीय निवासियों को कई तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसमें बदबू और पर्यावरण प्रदूषण से अनेकों बीमारियों का खतरा है। साथ ही यदि इसे झूरीवाला में शिफ्ट किया जाएगा तो आसपास भी आबादी व वन क्षेत्र है। एनजीटी की टीम ने बंसल के सुझावों पर सहमति जताई थी। 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद शहरी स्थानीय निकाय विभाग और नगर निगम के अफसरों ने डंपिंग ग्राउंड को झूरीवाला में लगाने का निर्णय लिया, जोकि जनहित में नहीं है।
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पूर्व मेयर व विधानसभा स्पीकर भी कर चुके हैं साइट का विरोध
विजय बंसल ने बताया है कि पूर्व महापौर ने 21.06.2017 को आयोजित एमसी पंचकूला की बैठक में प्रस्तावित झूरीवाला डंपिंग ग्राउंड को घग्गर पार सेक्टरों की आवासीय आबादी से दूर स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए पारित प्रस्ताव की एक प्रति सीएम के पास भेजी थी। वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष व विधायक ज्ञान चंद गुप्ता ने दिनांक 02.06.2018 को पत्र भेजकर प्रस्तावित झूरीवाला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को घग्गर पार सेक्टरों की आवासीय आबादी से तत्काल स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी।

आबादी से 500 मीटर दूरी पर है झूरीवाला डंपिंग साइट
झूरीवाला साइट और सेक्टर-25 की आवासीय आबादी के बीच की दूरी मात्र 500 मीटर से भी कम है। मोरनी वन्य जीव अभ्यारण्य झूरीवाला स्थल से मात्र 140 मीटर की दूरी पर है। वन्य जीव विभाग के निर्देशानुसार पास के वन्य जीव अभ्यारण्य में प्रजातियों की रक्षा के लिए आठ फीट ऊंचाई की सुरक्षा चारदीवारी का निर्माण किया जाना है, लेकिन इस पर ऐसी कोई दीवार नहीं बनाई गई। साइट भूजल के संरक्षण के लिए वन्य जीव विभाग द्वारा आगे निर्देश दिया गया था कि पहले पूरे भूमि स्थान पर पॉलीथिन की एक परत लगाई जाए और इसके बाद दो फीट भूमि को भर दिया जाए। इसके बाद भूमि स्थान पर फिर से पॉलीथिन की एक नई परत लगाई जाए। लेकिन निगम द्वारा ऐसा कोई अनुपालन नहीं किया गया है। झूरीवाला साइट एनएच-73 के निकट स्थित है। राष्ट्रीय राजमार्ग 73 पर कचरा वाहन यातायात के सुचारु प्रवाह में बाधा डालेंगे और इस व्यस्त राजमार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा साबित होंगे।
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