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सदन में बहस के दौरान हंगामा
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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को पहली बार हिस्सा ले रहे निर्दलीय विधायक इंद्र प्रताप सिंह को स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने सदन के नेता के भाषण के दौरान लगातार व्यवधान पैदा करने के चलते नेम कर दिया। इसके बाद भी जब इंद्र प्रताप ने बोलना जारी रखा तो संधवा ने मार्शल को आदेश दिया कि वह सदस्य को सदन से बाहर कर दें। जैसे ही मार्शल इंद्र प्रताप की टेबल तक पहुंचे, वह खुद ही उनके साथ सदन से बाहर चले गए।
चंडीगढ़ संबंधी प्रस्ताव पर विधायकों की प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए जब सदन के नेता व मुख्यमंत्री भगवंत मान बोल रहे थे तो निर्दलीय विधायक इंद्र प्रताप सिंह जोकि कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के बेटे भी हैं, ने अपने हलके के मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया। इस पर आप के सदस्यों ने आपत्ति की और मुख्यमंत्री ने भी उन्हें बात कहने का मौका दिए जाने का भरोसा जताया। इसके बावजूद इंद्र प्रताप नहीं रुके और लगातार बोलते रहे। इसे लेकर सदन में कांग्रेस और आप विधायकों के बीच कहासुनी भी हो गई। हरपाल चीमा ने राणा गुरजीत से कहा कि वह अपने बेटे को समझाएं। इस बीच स्पीकर ने इंद्र प्रताप को बैठने का कई बार निर्देश दिय, लेकिन वह नहीं माने। तब राणा गुरजीत भी बीचबचाव के लिए उठे और बाकी सदस्यों को यह कहकर शांत करने का प्रयास करने लगे कि इंद्र प्रताप को अनुभव नहीं है। इस पर भगवंत मान ने राणा गुरजीत से कहा कि बेटे को सिखा-पढ़ाकर लाना चाहिए था।
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चंडीगढ़ संबंधी प्रस्ताव पर विधायकों की प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए जब सदन के नेता व मुख्यमंत्री भगवंत मान बोल रहे थे तो निर्दलीय विधायक इंद्र प्रताप सिंह जोकि कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के बेटे भी हैं, ने अपने हलके के मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया। इस पर आप के सदस्यों ने आपत्ति की और मुख्यमंत्री ने भी उन्हें बात कहने का मौका दिए जाने का भरोसा जताया। इसके बावजूद इंद्र प्रताप नहीं रुके और लगातार बोलते रहे। इसे लेकर सदन में कांग्रेस और आप विधायकों के बीच कहासुनी भी हो गई। हरपाल चीमा ने राणा गुरजीत से कहा कि वह अपने बेटे को समझाएं। इस बीच स्पीकर ने इंद्र प्रताप को बैठने का कई बार निर्देश दिय, लेकिन वह नहीं माने। तब राणा गुरजीत भी बीचबचाव के लिए उठे और बाकी सदस्यों को यह कहकर शांत करने का प्रयास करने लगे कि इंद्र प्रताप को अनुभव नहीं है। इस पर भगवंत मान ने राणा गुरजीत से कहा कि बेटे को सिखा-पढ़ाकर लाना चाहिए था।
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