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कोविड पॉजिटिव भाई को राखी बांधकर की लंबी उम्र की कामना
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पंचकूला। मेरा भाई कोविड पॉजिटिव है। हर साल भाई मेरी रक्षा का प्रण लेता है, तो मैंने सोचा क्यों न अबकी बार मैं भाई के लिए रक्षा का प्रण लूं। अब राखी तो बांधनी ही थी। ऐसे में मैं भाई के घर गई और उनको कोविड के सारे नियमों का पालन कर राखी बांधी। यह हैं डा. रूमी भाटिया जो कि अपने भाई के कोविड पॉजिटिव होने से थोड़ा चिंतित जरूर थीं पर उन्होंने भाई की रक्षा के लिए उनको राखी बांधी।
पंचकूला की रहने वाली डॉ. रूमी भाटिया ने कहा कि उनका भाई कोविड पॉजिटिव है। वह अपने घर पर ही अलग कमरे में आइसोलेटेड है। उन्होंने राखी बांधते समय इस बात का ध्यान रखा कि कोविड के सारे नियमों का पालन किया जाए। पहले उन्होंने मास्क पहना और फिर ग्लब्ज और फिर राखी को सैनिटाइज करके भाई की कलाई पर बांधा।
इसी तरह पंचकूला की रहने वाली नीलम गर्ग ने बताया कि उनके भाई नई दिल्ली में रहते हैं। अबकी बार कोविड 19 के चलते वह पंचकूला नहीं आ सके। इससे पहले हमेशा राखी के मौके पर वह पंचकूला आते थे और पूरा परिवार एंज्वाय करता था। इसी वजह से उन्होंने अपने भाई को राखी कोरियर के माध्यम से नई दिल्ली भेज दी।
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वहीं पंचकूला की रहने वाली रेनू अरोड़ा ने बताया कि वह अपने भाई के घर राखी बांधने के लिए गईं तो पर वहां भी सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा। रेनू अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने घर पर ही दूध के पेड़े बनाए और भाई के लिए लेकर गईं थीं।
मौली और घर की बनी मिठाइयां की इस्तेमाल
पंचकूला में रक्षाबंधन का उत्सव अबकी बार फीका रहा। अधिकांश लोगों ने अबकी बार राखियों की जगह मौली इस्तेमाल की। मिठाइयों की जगह घर में बने लड्डू और पेड़ों का इस्तेमाल किया। यही कारण रहा कि मार्केट और सड़कों पर लोगों की ज्यादा भीड़ नहीं दिखाई दी। रक्षाबंधन के मौकों पर अपनी बहनों को गिफ्ट देने वाले भाइयों ने अबकी बार बहन को सिर्फ प्यार ही दिया।
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पंचकूला की रहने वाली डॉ. रूमी भाटिया ने कहा कि उनका भाई कोविड पॉजिटिव है। वह अपने घर पर ही अलग कमरे में आइसोलेटेड है। उन्होंने राखी बांधते समय इस बात का ध्यान रखा कि कोविड के सारे नियमों का पालन किया जाए। पहले उन्होंने मास्क पहना और फिर ग्लब्ज और फिर राखी को सैनिटाइज करके भाई की कलाई पर बांधा।
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इसी तरह पंचकूला की रहने वाली नीलम गर्ग ने बताया कि उनके भाई नई दिल्ली में रहते हैं। अबकी बार कोविड 19 के चलते वह पंचकूला नहीं आ सके। इससे पहले हमेशा राखी के मौके पर वह पंचकूला आते थे और पूरा परिवार एंज्वाय करता था। इसी वजह से उन्होंने अपने भाई को राखी कोरियर के माध्यम से नई दिल्ली भेज दी।
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वहीं पंचकूला की रहने वाली रेनू अरोड़ा ने बताया कि वह अपने भाई के घर राखी बांधने के लिए गईं तो पर वहां भी सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा। रेनू अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने घर पर ही दूध के पेड़े बनाए और भाई के लिए लेकर गईं थीं।
मौली और घर की बनी मिठाइयां की इस्तेमाल
पंचकूला में रक्षाबंधन का उत्सव अबकी बार फीका रहा। अधिकांश लोगों ने अबकी बार राखियों की जगह मौली इस्तेमाल की। मिठाइयों की जगह घर में बने लड्डू और पेड़ों का इस्तेमाल किया। यही कारण रहा कि मार्केट और सड़कों पर लोगों की ज्यादा भीड़ नहीं दिखाई दी। रक्षाबंधन के मौकों पर अपनी बहनों को गिफ्ट देने वाले भाइयों ने अबकी बार बहन को सिर्फ प्यार ही दिया।