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Panchkula News: सिविल अस्पताल में नहीं रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन के इंजेक्शन, मरीज भेजे जा रहे चंडीगढ़

Fri, 03 Jan 2025 01:12 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2025 01:12 AM IST
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Rabies immunoglobulin injections not available in Civil Hospital, patients are being sent to Chandigarh
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में रोजाना लावारिस कुत्तों के काटने के करीब 20 मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल में अधिक घायल लोगों के लिए रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण उनको चंडीगढ़ रेफर करना पड़ रहा है। इस कारण रोजाना दो से तीन मरीजों को चंडीगढ़ के सेक्टर-19 और 22 की डिस्पेंसरी में भेजा जा रहा है। प्राइवेट मेडिकल स्टोर में यह इंजेक्शन छह हजार रुपये में मिलता है, जबकि सरकारी में सौ रुपये में यह इंजेक्शन लग जाता है।
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पंचकूला सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन के चारों डोज लोगों को चार सौ रुपये में लगाए जाते हैं। कुत्ते काटने से घायल सेक्टर-9 निवासी जगदीश कौर का कहना है कि लावारिस कुत्ते नहीं पकड़े जा रहे हैं। घर से बाहर सुबह दूध लेने गईं थीं, कुत्ते ने काट लिया। काटने के बाद अस्पताल पहुंचीं हैं। इसमें एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया है। सुधीर कुमार निवासी सेक्टर-16 ने बताया कि उनको भी कुत्ते ने काट लिया। एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें सेक्टर-19 चंडीगढ़ रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन लगवाने को कहा गया है। अस्पताल के बाहर इंजेक्शन लेने गए तो उनको छह हजार रुपये का रेट बताया गया। इसके बाद वे चंडीगढ़ सेक्टर-19 की डिस्पेंसरी गए तो उनको सौ रुपये में इंजेक्शन लगा।
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रोजाना 20 मामले आ रहे सामने
सिविल अस्पताल सेक्टर-6 में कुत्तों के काटने के करीब बीस मामले रोज सामने आ रहे हैं। अस्पताल में इलाज कराने आए ढकोली निवासी पिंटू राजभर और सेक्टर-9 निवासी जगदीश कौर ने बताया कि काम से गए थे। उनको कुत्ते ने काट लिया। जानकारी देने के बाद भी नगर निगम की ओर से इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। पिछले साल वर्ष 2024 में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंचकूला में 4500 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए हैं।
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रेट में दो गुने का फर्क
डॉग बाइट में अधिक घायल होने वाले मरीजों के लिए रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन उपलब्ध नहीं है। इस कारण मरीजों को चंडीगढ़ रेफर किया जाता है। यह इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में जहां सौ रुपये में लगती है। वहीं इसे बाहर से खरीदने पर लोगों को छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। एंटी रेबीज इंजेक्शन की डोज के लिए 380 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पताल में सौ रुपये लग रहे हैं।



पंचकूला में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अगर इसके बाद रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की जरूरत पड़ती है तो मरीजों को चंडीगढ़ रेफर किया जाता है। बैठक में तय हुआ है कि जल्द ही रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन रखा जाएगा। - रीटा कालरा, पीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर -6
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