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Panchkula News: मुद्दों की फेहरिस्त के साथ एनजेडसी की बैठक में पहुंचेगा पंजाब
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चंडीगढ़। अमृतसर में 26 सितंबर को उत्तर जोनल काउंसिल (एनजेडसी) की बैठक की शानदार मेजबानी के लिए भले ही पंजाब सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के लिए पंजाब सरकार ने राज्य से जुड़े उन मुद्दों की फेहरिस्त भी तैयार कर ली है, जो लंबे समय से केंद्र सरकार की सहमति का इंतजार कर रहे हैं।बैठक में पंजाब सरकार की तरफ से जहां, पड़ोसी राज्यों के साथ पानी के बंटवारे का मुद्दा गूंजेगा वहीं पंजाब सरकार केंद्र सरकार की तरफ आरडीएफ समेत विभिन्न मदों में बकाया राशि के लिए तकाजा करेगी। बैठक में उत्तर भारत के बाकी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक को लेकर रणनीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री मान ने 20 सितंबर से अब तक अपने सीनियर अधिकारियों के साथ चार अहम बैठकें की हैं।
जानकारी के अनुसार, काउंसिल की बैठक में रावी-ब्यास से राजस्थान को पानी देने के अलावा पंजाब में विभिन्न नदियों पर बने बांधों में जल भंडारण की व्यवस्था पर चर्चा होगी। इस दौरान, पंजाब में हाल के दिनों में आई बाढ़ के दौरान राजस्थान और हरियाणा द्वारा अपने हिस्से का पानी भी नहीं लेने से बिगड़े हालात का मुद्दा भी उठना तय माना जा रहा है, जिसमें पंजाब सरकार पड़ोसी राज्यों पर आपात स्थितियों में सहयोग का पक्का भरोसा हासिल करने का प्रयास करेगी। इसके अलावा पंजाब सरकार यमुना नदी से अपने हिस्से के पानी की मांग भी उठाने के मूड में है। हरियाणा द्वारा सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।
गौरतलब है कि उत्तर जोनल काउंसिल की पिछली बैठक नवंबर 2022 को जयपुर में हुई थी, जिसमें केंद्र सरकार ने पंजाब को पानी की खपत घटाने और सिंचाई के तौर-तरीकों में बदलाव लाने की सलाह दी थी। हालांकि केंद्र ने भूजल के गिरते स्तर के बावजूद नहरी पानी के वितरण पर कोई सुझाव नहीं दिया था। काउंसिल की इस बैठक में पंजाब की तरफ से बीबीएमबी से सूबे का स्थायी प्रतिनिधित्व समाप्त किए जाने का विरोध भी दर्ज कराया जा सकता है, जिसे लेकर जयपुर की बैठक में भी पंजाब ने ऐतराज जताते हुए बीबीएमबी में मुख्य राज्य के प्रतिनिधित्व की बहाली की मांग की थी।
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दूसरी ओर, पंजाब आरडीएफ और जीएसटी समेत विभिन्न मदों में केंद्र की तरफ से बकाया करीब 6000 करोड़ रुपये की मांग भी केंद्रीय मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने की तैयारी में है। यह मुद्दा जयपुर में हुई बैठक के दौरान भी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उठाया था, लेकिन उस समय भी अमित शाह ने पंजाब को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था।
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जानकारी के अनुसार, काउंसिल की बैठक में रावी-ब्यास से राजस्थान को पानी देने के अलावा पंजाब में विभिन्न नदियों पर बने बांधों में जल भंडारण की व्यवस्था पर चर्चा होगी। इस दौरान, पंजाब में हाल के दिनों में आई बाढ़ के दौरान राजस्थान और हरियाणा द्वारा अपने हिस्से का पानी भी नहीं लेने से बिगड़े हालात का मुद्दा भी उठना तय माना जा रहा है, जिसमें पंजाब सरकार पड़ोसी राज्यों पर आपात स्थितियों में सहयोग का पक्का भरोसा हासिल करने का प्रयास करेगी। इसके अलावा पंजाब सरकार यमुना नदी से अपने हिस्से के पानी की मांग भी उठाने के मूड में है। हरियाणा द्वारा सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।
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गौरतलब है कि उत्तर जोनल काउंसिल की पिछली बैठक नवंबर 2022 को जयपुर में हुई थी, जिसमें केंद्र सरकार ने पंजाब को पानी की खपत घटाने और सिंचाई के तौर-तरीकों में बदलाव लाने की सलाह दी थी। हालांकि केंद्र ने भूजल के गिरते स्तर के बावजूद नहरी पानी के वितरण पर कोई सुझाव नहीं दिया था। काउंसिल की इस बैठक में पंजाब की तरफ से बीबीएमबी से सूबे का स्थायी प्रतिनिधित्व समाप्त किए जाने का विरोध भी दर्ज कराया जा सकता है, जिसे लेकर जयपुर की बैठक में भी पंजाब ने ऐतराज जताते हुए बीबीएमबी में मुख्य राज्य के प्रतिनिधित्व की बहाली की मांग की थी।
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दूसरी ओर, पंजाब आरडीएफ और जीएसटी समेत विभिन्न मदों में केंद्र की तरफ से बकाया करीब 6000 करोड़ रुपये की मांग भी केंद्रीय मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने की तैयारी में है। यह मुद्दा जयपुर में हुई बैठक के दौरान भी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उठाया था, लेकिन उस समय भी अमित शाह ने पंजाब को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था।