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SYL: हरियाणा सीएम बोले- पानी की उपलब्धता पर भ्रमित न करे पंजाब, हमें विवाद सुलझने की उम्मीद है
Wed, 19 Aug 2020 09:49 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2020 09:49 AM IST
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण को पूरा करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने नहर निर्माण की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री के पानी की उपलब्धता कम होने के दावे पर उन्होंने कहा कि एसवाईएल का निर्माण और पानी की उपलब्धता दो अलग-अलग मुद्दे हैं। ये एक दूसरे से जुड़े हुए नहीं हैं, इस मामले में भ्रमित नहीं करना चाहिए।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में मंगलवार को हुई बैठक में सीएम मनोहर लाल ने यह बात रखी। उन्होंने कहा कि 1981 के समझौते के अनुसार पानी की वर्तमान उपलब्धता के आधार पर राज्यों को पानी का आवंटन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी 2002 के अपने फैसले में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख कहा है कि एसवाईएल नहर का निर्माण पूरा किया जाए। 10 वर्षों में रावी, सतलुज और ब्यास का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में गया है, जो राष्ट्रीय संसाधन की भारी बर्बादी है।
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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने रावी नदी से इस प्रवाह की मात्रा 0.58 एमएएफ निर्धारित कर धर्मकोट में एक अन्य रावी-ब्यास लिंक के निर्माण की वकालत की थी। मानसून के दौरान पानी विशेष रूप से फिरोजपुर से पाकिस्तान में नीचे की तरफ बह जाता है। इसके अलावा 21 मई से 20 सितंबर तक व्यावहारिक रूप से भाखड़ा जलाशय से पानी निकालने पर बीबीएमबी का कोई प्रतिबंध नहीं है। दक्षिण हरियाणा के पानी की कमी वाले क्षेत्रों और भू-जल के पुनर्भरण के लिए इस तरह के अतिरिक्त पानी का दोहन किया जा सकता है, बजाए कि यह पाकिस्तान में जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चैनलों की मरम्मत और रखरखाव की अनुमति देने के लिए प्रत्येक नहर नेटवर्क में अतिरिक्त नहर की आवश्यकता होती है। वर्तमान में हरियाणा में रावी, ब्यास और सतलुज जल के मुख्य वाहक भाखड़ा मेन लाइन (बीएमएल) और नरवाना ब्रांच हैं, जो 50 साल से अधिक पुरानी हैं और 365 दिन 24 घंटे चलती हैं। इनकी हालत काफी खराब हो चुकी है, इनके रखरखाव की अति आवश्यकता है। अगर इनमें से किसी में भी कोई बड़ी दरार आ जाए तो बड़ी मानवीय आपदा हो सकती है, क्योंकि इनमें पीने और सिंचाई के उद्देश्य के लिए पानी होता है।
इसलिए एक वैकल्पिक कैरियर समय की जरूरत है। एसवाईएल नहर इन सभी उद्देश्यों को पूरा कर सकती है। इसके अलावा हरियाणा के पानी की वैध हिस्सेदारी और इंडेंट फ्री सरप्लस पानी भी ले सकती है, जो पाकिस्तान में बह रहा है। हरियाणा इस विषय पर बातचीत और चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन स्पष्ट शर्त और स्थितियों के साथ कि एसवाईएल का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार पूरा होना चाहिए।
यह हरियाणा के पानी से वंचित क्षेत्रों के लोगों के साथ अन्याय है, जो अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्णय के बावजूद पानी का उचित हिस्सा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट को असंवैधानिक करार दिया है और स्पष्ट रूप से कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू किया जाना चाहिए। हरियाणा सरकार अगले दौर की वार्ता से पहले सभी पक्षों से बातचीत करेगी।
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में मंगलवार को हुई बैठक में सीएम मनोहर लाल ने यह बात रखी। उन्होंने कहा कि 1981 के समझौते के अनुसार पानी की वर्तमान उपलब्धता के आधार पर राज्यों को पानी का आवंटन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी 2002 के अपने फैसले में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख कहा है कि एसवाईएल नहर का निर्माण पूरा किया जाए। 10 वर्षों में रावी, सतलुज और ब्यास का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान में गया है, जो राष्ट्रीय संसाधन की भारी बर्बादी है।
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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने रावी नदी से इस प्रवाह की मात्रा 0.58 एमएएफ निर्धारित कर धर्मकोट में एक अन्य रावी-ब्यास लिंक के निर्माण की वकालत की थी। मानसून के दौरान पानी विशेष रूप से फिरोजपुर से पाकिस्तान में नीचे की तरफ बह जाता है। इसके अलावा 21 मई से 20 सितंबर तक व्यावहारिक रूप से भाखड़ा जलाशय से पानी निकालने पर बीबीएमबी का कोई प्रतिबंध नहीं है। दक्षिण हरियाणा के पानी की कमी वाले क्षेत्रों और भू-जल के पुनर्भरण के लिए इस तरह के अतिरिक्त पानी का दोहन किया जा सकता है, बजाए कि यह पाकिस्तान में जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चैनलों की मरम्मत और रखरखाव की अनुमति देने के लिए प्रत्येक नहर नेटवर्क में अतिरिक्त नहर की आवश्यकता होती है। वर्तमान में हरियाणा में रावी, ब्यास और सतलुज जल के मुख्य वाहक भाखड़ा मेन लाइन (बीएमएल) और नरवाना ब्रांच हैं, जो 50 साल से अधिक पुरानी हैं और 365 दिन 24 घंटे चलती हैं। इनकी हालत काफी खराब हो चुकी है, इनके रखरखाव की अति आवश्यकता है। अगर इनमें से किसी में भी कोई बड़ी दरार आ जाए तो बड़ी मानवीय आपदा हो सकती है, क्योंकि इनमें पीने और सिंचाई के उद्देश्य के लिए पानी होता है।
इसलिए एक वैकल्पिक कैरियर समय की जरूरत है। एसवाईएल नहर इन सभी उद्देश्यों को पूरा कर सकती है। इसके अलावा हरियाणा के पानी की वैध हिस्सेदारी और इंडेंट फ्री सरप्लस पानी भी ले सकती है, जो पाकिस्तान में बह रहा है। हरियाणा इस विषय पर बातचीत और चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन स्पष्ट शर्त और स्थितियों के साथ कि एसवाईएल का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार पूरा होना चाहिए।
यह हरियाणा के पानी से वंचित क्षेत्रों के लोगों के साथ अन्याय है, जो अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्णय के बावजूद पानी का उचित हिस्सा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट एक्ट को असंवैधानिक करार दिया है और स्पष्ट रूप से कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू किया जाना चाहिए। हरियाणा सरकार अगले दौर की वार्ता से पहले सभी पक्षों से बातचीत करेगी।
हरियाणा को विवाद सुलझने की उम्मीद
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने विवाद के सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा हम एसवाईएल नहर को बनाने के अपने रुख पर कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा है।
हरियाणा और पंजाब के बीच मंगलवार को सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) के मुद्दे पर बैठक हुई, लेकिन दोनों में सहमति नहीं बनी। पंजाब सरकार अपने रुख पर कायम है। ऐसे में अब 15 दिन बाद दोबारा बैठक होगी। पंजाब सरकार अगली बैठक में कानूनी विशेषज्ञ को साथ लाएगी।
वहीं बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पहली बार खुले मन से मुद्दे पर बात हुई है। दोनों तरफ से कई बातों पर संवादहीनता खत्म हुई। अब एसवाईएल सहमति से बनेगी या नहीं, सुप्रीम कोर्ट में बताएंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि अगली बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पानी को लेकर चर्चा की। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक की अध्यक्षता की।
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल बैठक के लिए दिल्ली के श्रम शक्ति भवन स्थित जल संसाधन मंत्रालय पहुंचे, जबकि अमरिंदर सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बातचीत कर सुलझाने को कहा था। हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को बैठक करने व केंद्र सरकार को मध्यस्थता के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के लिए 3 सप्ताह का समय दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से हरियाणा को ज़्यादा उलझन नहीं है
मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से हरियाणा को ज़्यादा उलझन नहीं है। हरियाणा को पानी मिल चुका है, नहर के निर्माण को लेकर फैसला होना है। अगर सहमति बैठक में बन जाती है तो अच्छी बात है नहीं तो सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना रुख साफ करेगा। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला लागू होना चाहिए। हरियाणा के हक में फैसला आ चुका है। अब निर्णय पर अमल हो व प्रदेश को उसके हक का पानी मिले।
हरियाणा और पंजाब के बीच मंगलवार को सतलुज यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) के मुद्दे पर बैठक हुई, लेकिन दोनों में सहमति नहीं बनी। पंजाब सरकार अपने रुख पर कायम है। ऐसे में अब 15 दिन बाद दोबारा बैठक होगी। पंजाब सरकार अगली बैठक में कानूनी विशेषज्ञ को साथ लाएगी।
वहीं बैठक के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पहली बार खुले मन से मुद्दे पर बात हुई है। दोनों तरफ से कई बातों पर संवादहीनता खत्म हुई। अब एसवाईएल सहमति से बनेगी या नहीं, सुप्रीम कोर्ट में बताएंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि अगली बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पानी को लेकर चर्चा की। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक की अध्यक्षता की।
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल बैठक के लिए दिल्ली के श्रम शक्ति भवन स्थित जल संसाधन मंत्रालय पहुंचे, जबकि अमरिंदर सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को बातचीत कर सुलझाने को कहा था। हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को बैठक करने व केंद्र सरकार को मध्यस्थता के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के लिए 3 सप्ताह का समय दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से हरियाणा को ज़्यादा उलझन नहीं है
मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हिसाब से हरियाणा को ज़्यादा उलझन नहीं है। हरियाणा को पानी मिल चुका है, नहर के निर्माण को लेकर फैसला होना है। अगर सहमति बैठक में बन जाती है तो अच्छी बात है नहीं तो सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना रुख साफ करेगा। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला लागू होना चाहिए। हरियाणा के हक में फैसला आ चुका है। अब निर्णय पर अमल हो व प्रदेश को उसके हक का पानी मिले।