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जरूरत हुई तो दिल्ली जाकर धरना देगी पंजाब सरकार : लाल सिंह
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चंडीगढ़। पंजाब में 10 अप्रैल से रबी खरीद सीजन की शुरुआत को लेकर किसान और खेत मजदूर ही नहीं बल्कि राज्य सरकार भी चिंतित है। केंद्र की भाजपा सरकार जिस तरह की नई-नई शर्तें लगा रही है, उससे साफ हो चुका है कि वह किसानों को तबाह कर देना चाहती है। यह आरोप मंगलवार को पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह ने लगाया।
उन्होंने कहा कि 2002 में वाजपेयी सरकार के समय भी तत्कालीन केंद्र सरकार ने पंजाब को मिलने वाला सीसीएल रोक दिया था। इसके विरोध में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पूरा पंजाब मंत्रिमंडल दिल्ली में वाजपेयी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गया था। लाल सिंह ने कहा कि किसानों और फसल खरीद के मामले में केंद्र की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी और अगर जरूरी हुआ तो मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंजाब सरकार दिल्ली जाकर धरना देने से नहीं चूकेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा हर स्तर पर किसानों को नुकसान पहुंचाने की नीतियां थोपी जा रही हैं।
सूबे में रबी खरीद सीजन की तैयारियों को लेकर पत्रकारों से बातचीत करते हुए लाल सिंह ने कहा कि पिछले साल 128 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी और इस बार 130 लाख टन गेहूं खरीद का अनुमान है। हालांकि इस साल राज्य में गेहूं का उत्पादन 177 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को फसल की सीधी अदायगी (डीबीटी) की शर्त का विरोध करते हुए लाल सिंह ने कहा कि किसान यह सुविधा लेने को तैयार नहीं हैं और आढ़ती इस देने के तैयार नहीं हैं, फिर भी केंद्र सरकार किसानों और आढ़तियों पर यह शर्त थोप रही है। किसानों को फसल बेचने के लिए फर्द दिखाने की शर्त पर लाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से कहा है कि फर्द संबंधी शर्त को फिलहाल एक साल के लिए टाल दिया जाए। इस बारे में गंभीरता से विचार करने के बाद ही इसे लागू करने का फैसला किया जाए। हरियाणा सरकार ने भी इस साल फर्द संबंधी शर्त लागू नहीं की है, क्योंकि यह शर्त तुरंत लागू कर पाना आसान नहीं है।
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यह पूछे जाने पर कि किसान नेता दर्शनपाल ने किसानों को सीधी अदायगी का समर्थन किया है, लाल सिंह ने कहा कि किसान सीधी अदायगी के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 2013 में यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां पंजाब सरकार ने हलफिया बयान देकर इस संबंधी फैसला किसानों पर छोड़ने की बात कही थी। हम आज भी इस बात पर कायम हैं कि किसान ही इस संबंध में फैसला लें। उन पर केंद्र अपने अहंकार को न थोपे।
लाल सिंह ने आरोप लगाया कि फर्द और डीबीटी जैसी शर्तें किसानों का एमएसपी पर खरीद से ध्यान हटाने के लिए लाई गई हैं। केंद्र ने तीनों विवादित कृषि कानूनों में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं किया है और केवल झूठी बयानबाजी की जा रही है। कैप्टन सरकार एमएसपी के लिए लड़ रही है और इस लड़ाई को जारी रखा जाएगा।
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उन्होंने कहा कि 2002 में वाजपेयी सरकार के समय भी तत्कालीन केंद्र सरकार ने पंजाब को मिलने वाला सीसीएल रोक दिया था। इसके विरोध में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पूरा पंजाब मंत्रिमंडल दिल्ली में वाजपेयी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गया था। लाल सिंह ने कहा कि किसानों और फसल खरीद के मामले में केंद्र की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी और अगर जरूरी हुआ तो मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पंजाब सरकार दिल्ली जाकर धरना देने से नहीं चूकेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा हर स्तर पर किसानों को नुकसान पहुंचाने की नीतियां थोपी जा रही हैं।
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सूबे में रबी खरीद सीजन की तैयारियों को लेकर पत्रकारों से बातचीत करते हुए लाल सिंह ने कहा कि पिछले साल 128 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी और इस बार 130 लाख टन गेहूं खरीद का अनुमान है। हालांकि इस साल राज्य में गेहूं का उत्पादन 177 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को फसल की सीधी अदायगी (डीबीटी) की शर्त का विरोध करते हुए लाल सिंह ने कहा कि किसान यह सुविधा लेने को तैयार नहीं हैं और आढ़ती इस देने के तैयार नहीं हैं, फिर भी केंद्र सरकार किसानों और आढ़तियों पर यह शर्त थोप रही है। किसानों को फसल बेचने के लिए फर्द दिखाने की शर्त पर लाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार से कहा है कि फर्द संबंधी शर्त को फिलहाल एक साल के लिए टाल दिया जाए। इस बारे में गंभीरता से विचार करने के बाद ही इसे लागू करने का फैसला किया जाए। हरियाणा सरकार ने भी इस साल फर्द संबंधी शर्त लागू नहीं की है, क्योंकि यह शर्त तुरंत लागू कर पाना आसान नहीं है।
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यह पूछे जाने पर कि किसान नेता दर्शनपाल ने किसानों को सीधी अदायगी का समर्थन किया है, लाल सिंह ने कहा कि किसान सीधी अदायगी के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 2013 में यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा था, जहां पंजाब सरकार ने हलफिया बयान देकर इस संबंधी फैसला किसानों पर छोड़ने की बात कही थी। हम आज भी इस बात पर कायम हैं कि किसान ही इस संबंध में फैसला लें। उन पर केंद्र अपने अहंकार को न थोपे।
लाल सिंह ने आरोप लगाया कि फर्द और डीबीटी जैसी शर्तें किसानों का एमएसपी पर खरीद से ध्यान हटाने के लिए लाई गई हैं। केंद्र ने तीनों विवादित कृषि कानूनों में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं किया है और केवल झूठी बयानबाजी की जा रही है। कैप्टन सरकार एमएसपी के लिए लड़ रही है और इस लड़ाई को जारी रखा जाएगा।