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Punjab: पराली की ढुलाई के बदले किसानों को 30 करोड़ रुपये देगी पंजाब सरकार, प्रदूषण पर रोक लगाने की कवायद

Sat, 17 Sep 2022 01:36 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 17 Sep 2022 01:36 AM IST
सार

साल 2014 से लेकर पिछले सीजन तक किसानों को धान की पराली के रूप में 40 करोड़ रुपये की अदायगी की है और किसानों की तरफ से करारनामे के अधीन उद्योग को धान की पराली बेची जा रही है, जिससे अमलोह और खन्ना सब-डिवीजनों में पराली जलाने के मामले बहुत कम हो गए हैं।

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Punjab government will give 30 crores to farmers in exchange for transportation of stubble: Meet Hair
पराली जलाते किसान - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब सरकार ने बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने के मकसद से धान की पराली खेतों में जलाने के बजाय इससे बिजली पैदा करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। राज्य के शाहपुर में स्थापित इस प्रोजेक्ट तक पराली पहुंचाने वाले किसानों को 30 करोड़ रुपये की रकम सरकार की ओर से दी जाएगी।

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वैज्ञानिक तरीकों की खोज से पराली से बिजली पैदा करके किसानों की आय में विस्तार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह बात पंजाब के पर्यावरण और विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने शुक्रवार को शाहपुर में श्री गणेश एडिबल्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से पराली से बिजली पैदा करने वाले प्रोजेक्ट के दौरे के मौके पर कही। इस मौके पर मीत हेयर ने पराली जलाने के बजाय उक्त प्रोजेक्ट को पराली बेचने वाले किसानों को तीन करोड़ रुपये के चेक भी बांटे। इस योजना के तहत कुल 30 करोड़ की राशि किसानों को वितरित की जानी है। इस प्रोजेक्ट से एक एकड़ क्षेत्रफल में पराली के जरिये किसान 3,000 रुपये कमा सकते हैं।
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मीत हेयर ने कहा कि ईंट-भट्ठा संचालकों को कुछ प्रतिशत पराली को ईंधन के तौर पर बरतने के लिए लाजिमी करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे पराली की समस्या का हल भी होगा और किसानों की आय में भी विस्तार होगा। गांव शाहपुर में स्थापित फैक्टरी में 40 हजार टन पराली का उपयोग होता है और अब यह प्लांट 15 मेगावाट तक और बिजली तक बढ़ाएगा, जो 15 अक्तूबर तक कार्यशील हो जाएगा। यह पराली से बिजली पैदा करने वाला एशिया का पहला प्लांट होगा। इस सीजन में तीन जिलों से करीब एक लाख एकड़ क्षेत्रफल में से 2 लाख टन धान की खरीद का अनुमान है। इससे 25 किलोमीटर के दायरे में धान की पराली का उपभोग हो सकेगा।
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साल 2014 से लेकर पिछले सीजन तक किसानों को धान की पराली के रूप में 40 करोड़ रुपये की अदायगी की है और किसानों की तरफ से करारनामे के अधीन उद्योग को धान की पराली बेची जा रही है, जिससे अमलोह और खन्ना सब-डिवीजनों में पराली जलाने के मामले बहुत कम हो गए हैं। इस मौके पर अमलोह से विधायक गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन प्रो. आदर्श पाल विग, सदस्य सचिव इंजीनियर करुणेश गर्ग, मुख्य वातावरण इंजीनियर प्रदीप गुप्ता, वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर अशोक कुमार आदि उपस्थित थे।

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