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Punjab: भाजपा उम्मीदवार आईएएस परमपाल कौर को पंजाब सरकार का नोटिस, तुरंत ड्यूटी करें ज्वाइन वरना होगी कार्रवाई
Wed, 08 May 2024 03:47 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2024 03:47 AM IST
सार
आईएएस परमपाल कौर मलूका नौकरी से वीआरएस लेकर अपने पति के साथ भाजपा में शामिल हुई थी। पार्टी ने उन्हें बठिंडा से उम्मीदवार घोषित किया हुआ है।
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परमपाल कौर
- फोटो : फाइल
विस्तार
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका की बहू भाजपा प्रत्याशी एवं आईएएस परमपाल कौर मलूका के इस्तीफे का मामला शांत नहीं हुआ है। अब पंजाब सरकार ने उनको नोटिस जारी कर कहा है कि वे तुरंत अपनी ड्यूटी जॉइन करें, क्योंकि उनको तीन महीने के नोटिस पीरियड से छूट नहीं दी गई है। वे ड्यूटी से रिलीव या रिटायर नहीं मानी जा सकती हैं। ड्यूटी जॉइन न करने की सूरत में उनको उचित कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है।
परमपाल कौर मलूका ने स्वैच्छिक सेवामुक्ति के लिए वॉलंटियर रिटायरमेंट प्रक्रिया को अपनाया था। सूत्रों ने बताया कि परमपाल ने वीआरएस की प्रक्रिया इसलिए अपनाई थी ताकि उनको नौकरी छोड़ने के बाद वे सभी लाभ मिल सकें, जो किसी भी आईएएस अधिकारी को उसका कार्यकाल समय पूरा होने के बाद रिटायरमेंट पर मिलते हैं।
इसके बाद परमपाल कौर दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गई थीं, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें बठिंडा से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद सीएम भगवंत मान ने पोस्ट किया था कि अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। मान ने कहा था कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार और कुछ कानूनी कर्तव्य भी हैं कि कब और कैसे इस्तीफा स्वीकार करना है। इसके लिए कुछ नियम-कायदे हैं, जिसका हर हाल में अनुपालन करना पड़ता है।
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परमपाल कौर मलूका ने स्वैच्छिक सेवामुक्ति के लिए वॉलंटियर रिटायरमेंट प्रक्रिया को अपनाया था। सूत्रों ने बताया कि परमपाल ने वीआरएस की प्रक्रिया इसलिए अपनाई थी ताकि उनको नौकरी छोड़ने के बाद वे सभी लाभ मिल सकें, जो किसी भी आईएएस अधिकारी को उसका कार्यकाल समय पूरा होने के बाद रिटायरमेंट पर मिलते हैं।
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इसके बाद परमपाल कौर दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गई थीं, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें बठिंडा से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद सीएम भगवंत मान ने पोस्ट किया था कि अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। मान ने कहा था कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार और कुछ कानूनी कर्तव्य भी हैं कि कब और कैसे इस्तीफा स्वीकार करना है। इसके लिए कुछ नियम-कायदे हैं, जिसका हर हाल में अनुपालन करना पड़ता है।
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