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आर्थिक तंगी से जूझ रही पंजाब यूनिवर्सिटी का पैसा बचाने का 'नया फंडा', कई काम होंगे प्रभावित
Thu, 07 Nov 2019 11:47 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 11:47 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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आर्थिक तंगी से गुजर रहा पंजाब यूनिवर्सिटी खर्चों में कटौती कर रहा है। इस बार सीनेट चुनाव में अधिक खर्च नहीं होगा। बजट में 10 लाख तक की कटौती होगी। इसके लिए पीयू की कमेटी ने खाका खींच लिया है। इस महीने के आखिर तक इसे मंजूरी दे दी जाएगी। इसी तरह सिंडिकेट के चुनाव में भी बजट कम होगा। इसके लिए भी खाका तैयार हो रहा है।
सीनेट का चुनाव हर पांच साल में एक बार होता है। यह चुनाव पीयू के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। पीयू के संचालन के लिए सर्वोच्च बॉडी का चयन होता है। इसमें 94 मेंबर चुनकर आते हैं। आधे सदस्यों का चयन चांसलर ऑफिस की ओर से किया जाता है और बाकी का चुनाव होता है। इस चुनावी प्रक्रिया में लगभग 1.40 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
सर्वाधिक रकम 10 लाख रुपये वीडियोग्राफी पर खर्च होती है। पीयू आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। कहीं से बजट मिल नहीं रहा है, पीयू अपने ही तरीके से खर्च को घटा रहा है ताकि पैसे की कमी महसूस न हो। इसी को ध्यान में रखकर अगले साल होने वाले सीनेट के चुनाव में खर्च कम होगा। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर पीयू में बैठक हुई।
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उसमें वीडियोग्राफी का बजट कम करने के लिए कहा गया है। यह देखा जा रहा है कि इस वीडियोग्राफी के बिना काम चलेगा या नहीं। खाना, चाय-नाश्ता, किराया आदि भी खर्च होता है। इसके अलावा कागजों पर भी मोटी रकम खर्च होती है। माना जा रहा है कि हार्ड कॉपी न प्रकाशित करवाकर शॉफ्ट कॉपियां संबंधित लोगों को भेजी जाएं।
यदि पीयू की ओर से ऐसा किया गया तो इस पर भी चार से पांच लाख रुपये की बचत होगी। पैसे बचाने के कई अन्य तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। इस माह के आखिरी सप्ताह तक इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। मालूम हो कि इस चुनाव के देशभर में बूथ बनाए जाते हैं, जिसमें स्नातक लोग वोटिंग करते हैं।
सिंडिकेट के चुनाव अगले माह, इसके भी कटौती का प्लान
सिंडिकेट के चुनाव अगले माह में होने जा रहे हैं। इस चुनाव में भी 50 लाख की रकम खर्च होती है। इसमें कटौती करने के लिए भी प्लान बनाया जा रहा है। पीयू का सोचना है कि जहां भी पीयू अपने पैसे बचा सकता है, वहां से बचाएगा। उसी कड़ी में यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे पहले सभी विभागों ने भी यह संकल्प लिया था कि वह अपने बजट में कटौती करेंगे। कई विभागों ने इस पर काम भी किया है।
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सीनेट का चुनाव हर पांच साल में एक बार होता है। यह चुनाव पीयू के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। पीयू के संचालन के लिए सर्वोच्च बॉडी का चयन होता है। इसमें 94 मेंबर चुनकर आते हैं। आधे सदस्यों का चयन चांसलर ऑफिस की ओर से किया जाता है और बाकी का चुनाव होता है। इस चुनावी प्रक्रिया में लगभग 1.40 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
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सर्वाधिक रकम 10 लाख रुपये वीडियोग्राफी पर खर्च होती है। पीयू आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। कहीं से बजट मिल नहीं रहा है, पीयू अपने ही तरीके से खर्च को घटा रहा है ताकि पैसे की कमी महसूस न हो। इसी को ध्यान में रखकर अगले साल होने वाले सीनेट के चुनाव में खर्च कम होगा। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर पीयू में बैठक हुई।
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उसमें वीडियोग्राफी का बजट कम करने के लिए कहा गया है। यह देखा जा रहा है कि इस वीडियोग्राफी के बिना काम चलेगा या नहीं। खाना, चाय-नाश्ता, किराया आदि भी खर्च होता है। इसके अलावा कागजों पर भी मोटी रकम खर्च होती है। माना जा रहा है कि हार्ड कॉपी न प्रकाशित करवाकर शॉफ्ट कॉपियां संबंधित लोगों को भेजी जाएं।
यदि पीयू की ओर से ऐसा किया गया तो इस पर भी चार से पांच लाख रुपये की बचत होगी। पैसे बचाने के कई अन्य तरीके भी अपनाए जा रहे हैं। इस माह के आखिरी सप्ताह तक इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। मालूम हो कि इस चुनाव के देशभर में बूथ बनाए जाते हैं, जिसमें स्नातक लोग वोटिंग करते हैं।
सिंडिकेट के चुनाव अगले माह, इसके भी कटौती का प्लान
सिंडिकेट के चुनाव अगले माह में होने जा रहे हैं। इस चुनाव में भी 50 लाख की रकम खर्च होती है। इसमें कटौती करने के लिए भी प्लान बनाया जा रहा है। पीयू का सोचना है कि जहां भी पीयू अपने पैसे बचा सकता है, वहां से बचाएगा। उसी कड़ी में यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे पहले सभी विभागों ने भी यह संकल्प लिया था कि वह अपने बजट में कटौती करेंगे। कई विभागों ने इस पर काम भी किया है।