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रोस्टर लागू करवाने में पीयू प्रशासन फेल
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में अब तक रोस्टर लागू नहीं हो पाया है। इससे शिक्षक व कर्मचारियों में आक्रोश पनप रहा है। यह कभी भी आंदोलन का रुख ले सकता है। हैरत की बात है कि जो कमेटियां रोस्टर के लिए बनाई गई थी, उन्होंने अब तक बैठकें ही नहीं कीं। बताया जाता है कि पीयू प्रशासन इन कमेटियों से अब तक की प्रगति रिपोर्ट लेगा और जरूरत पड़ने पर इन्हें बदल देगा।
एससी, एसटी व बीसी वर्ग के शिक्षकों व कर्मचारियों की सीटों का निर्धारण रोस्टर के जरिये होना है। वर्षों से इसके प्रयास चल रहे हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई पेंच लगा दिया जाता है। कुछ रोस्टर बने जो रद्दी की टोकरी में डाल दिए गए। कुछ बने हैं तो उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण इन वर्गों को अपनी सीटों का ही पता नहीं लग पा रहा है। प्रमोशन से लेकर कई चीजों का पता नहीं चल पा रहा है। साथ ही नई नियुक्तियों में भी इस वर्ग को नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जिन लोगों की कमेटियां रोस्टर के लिए बनाई गई हैं वह खुद ही नहीं चाह रहे कि यह लागू हो। सीनेटर डॉ. अजय रंगा व कर्मचारी नेता हरप्रीत कहते हैं कि रोस्टर के लिए जिन लोगों को कमेटी में जिम्मेदारी दी गई वह बैठक ही नहीं करना चाह रहे हैं जबकि कई वर्ष बीत गए हैं। अब कुछ दूसरा रास्ता निकाला जाएगा।
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एससी, एसटी व बीसी वर्ग के शिक्षकों व कर्मचारियों की सीटों का निर्धारण रोस्टर के जरिये होना है। वर्षों से इसके प्रयास चल रहे हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई पेंच लगा दिया जाता है। कुछ रोस्टर बने जो रद्दी की टोकरी में डाल दिए गए। कुछ बने हैं तो उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण इन वर्गों को अपनी सीटों का ही पता नहीं लग पा रहा है। प्रमोशन से लेकर कई चीजों का पता नहीं चल पा रहा है। साथ ही नई नियुक्तियों में भी इस वर्ग को नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जिन लोगों की कमेटियां रोस्टर के लिए बनाई गई हैं वह खुद ही नहीं चाह रहे कि यह लागू हो। सीनेटर डॉ. अजय रंगा व कर्मचारी नेता हरप्रीत कहते हैं कि रोस्टर के लिए जिन लोगों को कमेटी में जिम्मेदारी दी गई वह बैठक ही नहीं करना चाह रहे हैं जबकि कई वर्ष बीत गए हैं। अब कुछ दूसरा रास्ता निकाला जाएगा।
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