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कैदियों को नहीं लाया जा रहा अदालतों में, जेल अधिकारियों से सांठगांठ तो नहीं: हाईकोर्ट

Fri, 31 Jan 2025 12:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2025 12:57 AM IST
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Prisoners are not being brought to the courts, is there any collusion with the jail officials: High Court
चंडीगढ़। अदालतों में ट्रायल के दौरान विचाराधीन कैदियों को पेश न करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा है कि कहीं जेल अधिकारियों व आरोपियों के बीच सांठगांठ तो नहीं है। ऐसा करके कहीं ट्रायल को धीमा करने और डिफाल्ट जमानत दिलाने की यह योजना तो नहीं है। हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति गृह सचिव को भेजने का आदेश दिया है।
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जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने जेल अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाहियां न्यायिक प्रक्रिया में देरी का कारण बनती हैं और जेल प्रशासन में संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ जेल अधिकारियों और आरोपियों के बीच अवैध गठजोड़ हो सकता है, जिसके चलते ट्रायल कोर्ट में पेशी में जानबूझकर देरी की जाती है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह की हरकतें न्यायिक आदेशों का खुला उल्लंघन हैं और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बार-बार आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में पेश न करना केवल एक गलती नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का संकेत है। अदालत ने पाया कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा, बल्कि यह प्रवृत्ति लगातार देखने को मिल रही है। जस्टिस कौल ने कहा कि यह रवैया न्याय के मार्ग में बाधा डालने के साथ ही आरोपियों के मौलिक अधिकारों का भी हनन करता है, जिससे अदालतों को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
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जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने जेल अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाहियां न्यायिक प्रक्रिया में देरी का कारण बनती हैं और जेल प्रशासन में संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ जेल अधिकारियों और आरोपियों के बीच अवैध गठजोड़ हो सकता है, जिसके चलते ट्रायल कोर्ट में पेशी में जानबूझकर देरी की जाती है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह की हरकतें न्यायिक आदेशों का खुला उल्लंघन हैं और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बार-बार आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में पेश न करना केवल एक गलती नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का संकेत है। अदालत ने पाया कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा, बल्कि यह प्रवृत्ति लगातार देखने को मिल रही है। जस्टिस कौल ने कहा कि यह रवैया न्याय के मार्ग में बाधा डालने के साथ ही आरोपियों के मौलिक अधिकारों का भी हनन करता है, जिससे अदालतों को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है। हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सख्त निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
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