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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक के परिसर की शुरुआत

Sat, 28 Aug 2021 10:08 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 10:08 PM IST
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Prime Minister Narendra Modi inaugurates the complex of Jallianwala Bagh National Memorial
अमृतसर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जलियांवाला बाग का नया स्वरूप हमारे देश की युवा पीढ़ी को 13 अप्रैल 1919 के दस मिनट की सत्यगाथा-वीरगाथा से परिचत करवाएगा। यह वही जगह हैं जिसके अंदर दीवार पर लगी गोलियां और मौत का कुआं हमें देश की आजादी के लिए अपनी जिंदगी देश के नाम कुर्बान करने वालों के सपनों की याद दिलाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार की रात यह बात वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से वर्चुअल कार्यक्रम में जलियांवाला बाग का उद्घाटन करने के बाद कही। इस कार्यक्रम की शुरुआत गुरबाणी से हुई और इस अवसर पर दो मिनट का मौन रख कर शहीदों को याद किया गया।
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इस अवसर पर राज्यपाल वीपीएस बदनौर, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, राज्यसभा के सदस्य अर्जुन मेघवाल, सोम प्रकाश और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलियांवाला बाग की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि देश के 75वें आजादी दिवस पर जलियांवाला बाग स्मारक का आधुनिक रूप देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का मौका है।
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इस बाग में 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेजों ने दस मिनट के लिए 1650 चलाकर हजार से ज्यादा लोगों, जिनमें छह साल से लेकर बड़ी आयु के बच्चे थे, को शहीद कर दिया। जलियांवाला बाग की दीवार पर लगी गोलियां और शहीदी कुआं हमारी युवा पीढ़ी को उन बच्चों के सपनों की याद ताजा करवाएगा, जिन्होंने अपनी जिंदगी के कई सपने देखे थे।
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मोदी ने कहा कि जलियांवाला बाग का नया स्वरूप बलिदान की गाथाओं को जीवंत बना दिया है। बाग की दीवार और स्मारक देश की युवा पीढ़ी को याद करवाएगा कि देश की आजादी के लिए हमारे बुजुर्गों ने क्या क्या किया और आजादी के लिए कैसे संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने हर काम में देश को सर्वोपरि रखना चाहिए। इतिहास की घटनाएं हमें सिखाती हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल को बैसाखी वाले दिन ही खालसा पंथ की स्थापना कर पीढ़ियों को कुर्बानी का पाठ पढ़ाया। गुरुओं की कुर्बानी हमें सिखाती है कि सुख दूसरों की सेवा करने से आता है। हालात बहुत मुश्किल हैं और चुनौतियां बहुत हैं। कोरोना काल और अफगानिस्तान में हुई घटनाओं के बाद आपरेशन देवी शक्ति के तहत हजारों लोगों को ही सुरक्षित भारत लाया गया। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे में पंजाब के लोग भुक्तभोगी हैं। उनकी पीड़ा देश का हर व्यक्ति महसूस करता है। इसलिए हमने 14 अगस्त को हर साल विभाजन विभीषिका के तौर पर मनाने का फैसला किया है।

शहीद ऊधम सिंह की पिस्तौल लाएंगे वापस-कैप्टन अमरिंदर सिंह
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जलियांवाला बाग में 1650 गोलियां चली और हजार से ज्यादा लोग शहीद हुए। जबकि सरकारी रिकार्ड में सिर्फ 488 लोगों के शहीद होने के प्रमाण हैं। जलियांवाला बाग में तब शहीद होने वाले गांवों के लोगों की पहचान के लिए उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी की टीम लगाई है। जिससे उनके गांवों में यादगार बनाई जा सके और उन गांवों के विकास के लिए अतिरिक्त फंड मुहैया करवाए जा सके। कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा कि शहीद ऊधम सिंह की पिस्तौल और डायरी को यूके की सरकार से वापस लाया जाए। जिससे उन चीजों को आजादी की प्रदर्शनी में रखा जा सके। इसके लिए वे विदेश मंत्री को लिख भी चुके हैं।
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