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अलर्टः फिर प्रदूषण से 'जहरीली' होने लगी चंडीगढ़ की हवा, सभी को बरतनी होगी एहतियात
Wed, 13 Nov 2019 11:53 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 13 Nov 2019 11:53 AM IST
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चंडीगढ़ की हवा में प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदूषण से सात दिन तक राहत मिलने के बाद मंगलवार को फिर से एयरक्वालिटी इंडेक्स बढ़ गया है। शाम सात बजे सेक्टर 25 का एयरक्वालिटी इंडेक्स 268 रिकार्ड किया गया, जो मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में आता है। पांच नवंबर से पहले चंडीगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब और बहुत खराब की श्रेणी में दर्ज किया जा रहा था।
उसके बाद बारिश हुई तो उससे राहत मिल गई थी, लेकिन अब फिर से हवा जहरीली होने लगी है। विशेषज्ञों ने बताया है कि यदि मौसम में बदलाव नहीं आया तो प्रदूषण की स्थिति आगे और खराब हो सकती है। हालांकि, हिमाचल और पंजाब के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बन रही है। यदि बारिश या हवा की दिशा में बदलाव आता है तो इससे प्रदूषण से राहत मिलेगी।
पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्ल्कि हेल्थ के एनवायरनमेंट हेल्थ के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रविंद्रा खैवाल ने बताया कि बारिश के बाद अब दोबारा से स्थानीय प्रदूषण के कण बढ़ने लगे हैं। आसपास पराली जलाए जाने की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ, तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। इससे वायुमंडलीय सतह नीचे आई। इस वजह से प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाय नीचे रह रहे हैं। अब भी चंडीगढ़ की कई सड़कें टूटी हैं। इनसे जब भी वाहन गुजरते हैं तो उसे धूल उड़ती है।
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सड़क पर टायरों के घिसने से जो कण निकलते हैं, उससे पाल्यूशन बढ़ता है। जब तक इन पर रोक नहीं लगेगी तब तक प्रदूषण पर रोक नहीं लगेगी। एक्यूआई 0 से 50 के बीच होने पर ‘अच्छा’ होता है, जबकि 51 से 100 के बीच होने पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच होने पर उसे ‘गंभीर’ समझा जाता है। दिवाली के दिन कई जगह एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया था, जो गंभीर की श्रेणी में आता है।
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उसके बाद बारिश हुई तो उससे राहत मिल गई थी, लेकिन अब फिर से हवा जहरीली होने लगी है। विशेषज्ञों ने बताया है कि यदि मौसम में बदलाव नहीं आया तो प्रदूषण की स्थिति आगे और खराब हो सकती है। हालांकि, हिमाचल और पंजाब के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बन रही है। यदि बारिश या हवा की दिशा में बदलाव आता है तो इससे प्रदूषण से राहत मिलेगी।
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पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्ल्कि हेल्थ के एनवायरनमेंट हेल्थ के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रविंद्रा खैवाल ने बताया कि बारिश के बाद अब दोबारा से स्थानीय प्रदूषण के कण बढ़ने लगे हैं। आसपास पराली जलाए जाने की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। दूसरी तरफ, तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। इससे वायुमंडलीय सतह नीचे आई। इस वजह से प्रदूषण के कण ऊपर जाने के बजाय नीचे रह रहे हैं। अब भी चंडीगढ़ की कई सड़कें टूटी हैं। इनसे जब भी वाहन गुजरते हैं तो उसे धूल उड़ती है।
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सड़क पर टायरों के घिसने से जो कण निकलते हैं, उससे पाल्यूशन बढ़ता है। जब तक इन पर रोक नहीं लगेगी तब तक प्रदूषण पर रोक नहीं लगेगी। एक्यूआई 0 से 50 के बीच होने पर ‘अच्छा’ होता है, जबकि 51 से 100 के बीच होने पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच होने पर उसे ‘गंभीर’ समझा जाता है। दिवाली के दिन कई जगह एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया था, जो गंभीर की श्रेणी में आता है।
पीएम 2.5 की मात्रा चार गुना
चंडीगढ़ में पीएम 2.5 की मात्रा चार गुना दर्ज की जा रही है। तय मानक के मुताबिक, 24 घंटे में हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए। इससे ज्यादा होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है। मंगलवार को पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 320 और न्यूनतम मात्रा 178 रिकार्ड किया गया।
ऐसे में समझा जा सकता है कि इस समय हवा लेना कितना खतरनाक है। पीएम 2.5 प्रदूषण में शामिल वो सूक्ष्म कण है, जो व्यक्ति के लंग्स तक जा सकते हैं। शरीर के बाल का साइज पीएम 50 होता है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांस की दिक्कत हो सकती है।
बरतनी होगी एहतियात
- जो लोग सांस व एलर्जी के रोगी हैं, वे अपने डाक्टर से जरूर परामर्श लें। इस दौरान दवा की डोज बढ़ाने की आवश्यकता होती है।
- खुले में भारी एक्सरसाइज न करें। इससे सांस के माध्यम से शरीर में प्रदूषण के कण ज्यादा जाएंगे।
- कोशिश करें कि गाड़ियों का इस्तेमाल कम से कम करें। इससे वायु प्रदूषण में और बढ़ोतरी होती है।
- जब भी बाहर निकलें तो आंख और चेहरे को साफ पानी से धोएं। दिन में कम से कम दो बार गर्म पानी से कुल्ला करें।
-जहां मिट्टी उड़ती हो, वहां पर पानी का छिड़काव करें।
ऐसे में समझा जा सकता है कि इस समय हवा लेना कितना खतरनाक है। पीएम 2.5 प्रदूषण में शामिल वो सूक्ष्म कण है, जो व्यक्ति के लंग्स तक जा सकते हैं। शरीर के बाल का साइज पीएम 50 होता है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांस की दिक्कत हो सकती है।
बरतनी होगी एहतियात
- जो लोग सांस व एलर्जी के रोगी हैं, वे अपने डाक्टर से जरूर परामर्श लें। इस दौरान दवा की डोज बढ़ाने की आवश्यकता होती है।
- खुले में भारी एक्सरसाइज न करें। इससे सांस के माध्यम से शरीर में प्रदूषण के कण ज्यादा जाएंगे।
- कोशिश करें कि गाड़ियों का इस्तेमाल कम से कम करें। इससे वायु प्रदूषण में और बढ़ोतरी होती है।
- जब भी बाहर निकलें तो आंख और चेहरे को साफ पानी से धोएं। दिन में कम से कम दो बार गर्म पानी से कुल्ला करें।
-जहां मिट्टी उड़ती हो, वहां पर पानी का छिड़काव करें।