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मोरनी में पौधरोपण घोटाला : अतिरिक्त मुख्य सचिव को नहीं मिल रहा प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से जवाब
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मोरनी में साल 2021-22 में पौधरोपण के नाम पर हुए करीब चार करोड़ घोटाला वन विभाग के फाइलों में दबकर रह गया है। मामले में काफी हो-हल्ला होने के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरे मामले में जवाब मांगा गया था। 30 अगस्त 2022 से एक जनवरी 2024 तक इस मामले में तीन बार जवाब मांगा गया है, लेकिन प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पंकज गोयल इस मामले से बचते नजर आ रहे हैं, जबकि पिंजौर वन विभाग के डीएफओ विशाल कौशिक का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यह मामला उनके ज्वाइनिंग से पहले का हो सकता है। तब जांच में पाया गया कि सवा सौ हेक्टेयर क्षेत्र की जांच में 90 हजार पौधों में से 47 फीसदी ही जीवित मिले। इससे जांच टीमों को संदेह हुआ कि पूरे निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण हुआ ही नहीं है। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने संभावना जताई कि सत्यापन कार्य रुकवाकर घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
हरियाणा के मोरनी वन मंडल में आरडीएफ यानि रिहेबलिटेशन ऑफ डीग्रेडेड फॉरेस्ट योजना के तहत पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। 750 हेक्टेयर में साढ़े आठ लाख पौधे न लगाने का संदेह है। यह गड़बड़ी वन विभाग के जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल करनाल की टीमों ने अपने शुरुआती निरीक्षण में पकड़ी थी। तब वन विभाग द्वारा पौधरोपण से संबंधित प्रोफार्मा प्लांटेशन जनरल वर्क रजिस्टर मूल्यांकन परिमंडल को उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण वहां पर विभाग द्वारा करवाए कार्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया जा गया। जांच के दौरान पौधों की वृद्धि और असफलता को देखते हुए प्रतीत होता है कि यहां पर रखरखाव के कार्य में अभाव रहा है।
मामला मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंचा
यहां मामला मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण तक पहुंचने के बाद जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल के मुख्य वन संरक्षक ने इन सभी को पत्र लिखकर पूरे घोटाले की विजिलेंस जांच की मांग की थी। वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरे मामले में जवाब मांगा गया था।
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पंचकूला। मोरनी में साल 2021-22 में पौधरोपण के नाम पर हुए करीब चार करोड़ घोटाला वन विभाग के फाइलों में दबकर रह गया है। मामले में काफी हो-हल्ला होने के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरे मामले में जवाब मांगा गया था। 30 अगस्त 2022 से एक जनवरी 2024 तक इस मामले में तीन बार जवाब मांगा गया है, लेकिन प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पंकज गोयल इस मामले से बचते नजर आ रहे हैं, जबकि पिंजौर वन विभाग के डीएफओ विशाल कौशिक का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यह मामला उनके ज्वाइनिंग से पहले का हो सकता है। तब जांच में पाया गया कि सवा सौ हेक्टेयर क्षेत्र की जांच में 90 हजार पौधों में से 47 फीसदी ही जीवित मिले। इससे जांच टीमों को संदेह हुआ कि पूरे निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण हुआ ही नहीं है। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने संभावना जताई कि सत्यापन कार्य रुकवाकर घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
हरियाणा के मोरनी वन मंडल में आरडीएफ यानि रिहेबलिटेशन ऑफ डीग्रेडेड फॉरेस्ट योजना के तहत पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। 750 हेक्टेयर में साढ़े आठ लाख पौधे न लगाने का संदेह है। यह गड़बड़ी वन विभाग के जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल करनाल की टीमों ने अपने शुरुआती निरीक्षण में पकड़ी थी। तब वन विभाग द्वारा पौधरोपण से संबंधित प्रोफार्मा प्लांटेशन जनरल वर्क रजिस्टर मूल्यांकन परिमंडल को उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण वहां पर विभाग द्वारा करवाए कार्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया जा गया। जांच के दौरान पौधों की वृद्धि और असफलता को देखते हुए प्रतीत होता है कि यहां पर रखरखाव के कार्य में अभाव रहा है।
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मामला मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंचा
यहां मामला मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण तक पहुंचने के बाद जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल के मुख्य वन संरक्षक ने इन सभी को पत्र लिखकर पूरे घोटाले की विजिलेंस जांच की मांग की थी। वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरे मामले में जवाब मांगा गया था।
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