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जाते जाते तीन परिवारों को नई जिंदगी दे गई रतनी
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चंडीगढ़। जालंधर के दयालपुर गांव निवासी 65 वर्षीय रत्नी जाते-जाते तीन परिवारों को नई जिंदगी दे गई। रत्नी की कॉर्निया और किडनी को पीजीआई में भर्ती दो मरीजों को ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं, हृदय जयपुर सिटी के हास्पिटल में भर्ती एक मरीज को नया जीवन दे गया।
पंखे में फंसकर गंभीर रूप से घायल हुई रत्नी को पीजीआई में डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी बचाया नहीं जा सका। रत्नी को 3 सितंबर की शाम को मृत घोषित कर दिया गया। इस दौरान ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर ने मृतका के बेटे देसराज से संपर्क कर अंगदान पर विचार करने को कहा। मृतका के बेटे देसराज ने अपनी पत्नी गुरप्रीत कौर और बहन कुलविंदर कौर के साथ विचार विमर्श के बाद अंगदान करने का साहसिक निर्णय लिया। इस संदर्भ में पीजीआई ट्रांसप्लांट के नोडल अधिकारी प्रो. डॉ. विपिन कौशल का कहना है कि रत्नी के परिवार की सहमति के बाद हमने उसके हृदय, किडनी और कॉर्निया को सुरक्षित किया। उनका कहना है कि क्रास मिलान के बाद रत्नी के कार्निया और किडनी को पीजीआई में भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिया गया, जबकि हृदय को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जयपुर को भेजा गया।
ऐसे हुआ रतनी के साथ हादसा
रत्नी के लिए 24 अगस्त का ऐसा दिन था, जब पड़ोस में एक खुशी का मौका अचानक रत्नी के लिए मातम में बदल गया, क्योंकि उसका दुपट्टा अचानक एक चलते हुए पंखे में फंस गया। फंखे में फंसकर जैसे ही रत्नी नीचे गिरी, वह बेहोश हो गई। परिजनों ने उसे डीएमसी लुधियाना पहुंचाया। उसकी हालत में कोई सुधार नहीं होता देख 25 अगस्त को रत्नी को बेहद गंभीर हालत में पीजीआई लाया गया। इलाज के दौरान पीजीआई में रत्नी की मौत हो गई।
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पंखे में फंसकर गंभीर रूप से घायल हुई रत्नी को पीजीआई में डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी बचाया नहीं जा सका। रत्नी को 3 सितंबर की शाम को मृत घोषित कर दिया गया। इस दौरान ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर ने मृतका के बेटे देसराज से संपर्क कर अंगदान पर विचार करने को कहा। मृतका के बेटे देसराज ने अपनी पत्नी गुरप्रीत कौर और बहन कुलविंदर कौर के साथ विचार विमर्श के बाद अंगदान करने का साहसिक निर्णय लिया। इस संदर्भ में पीजीआई ट्रांसप्लांट के नोडल अधिकारी प्रो. डॉ. विपिन कौशल का कहना है कि रत्नी के परिवार की सहमति के बाद हमने उसके हृदय, किडनी और कॉर्निया को सुरक्षित किया। उनका कहना है कि क्रास मिलान के बाद रत्नी के कार्निया और किडनी को पीजीआई में भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित कर दिया गया, जबकि हृदय को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जयपुर को भेजा गया।
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ऐसे हुआ रतनी के साथ हादसा
रत्नी के लिए 24 अगस्त का ऐसा दिन था, जब पड़ोस में एक खुशी का मौका अचानक रत्नी के लिए मातम में बदल गया, क्योंकि उसका दुपट्टा अचानक एक चलते हुए पंखे में फंस गया। फंखे में फंसकर जैसे ही रत्नी नीचे गिरी, वह बेहोश हो गई। परिजनों ने उसे डीएमसी लुधियाना पहुंचाया। उसकी हालत में कोई सुधार नहीं होता देख 25 अगस्त को रत्नी को बेहद गंभीर हालत में पीजीआई लाया गया। इलाज के दौरान पीजीआई में रत्नी की मौत हो गई।
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