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पराली जलाने वाले 10 जिलों में टास्क फोर्स तैनात करने के आदेश
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चंडीगढ़। पंजाब में धान की कटाई शुरू होने से पहले ही पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को राज्य की मुख्य सचिव विनी महाजन ने लाल श्रेणी वाले दस जिलों, जिनमें धान के पिछले सीजन के दौरान पराली जलाने के 4000 से अधिक मामले सामने आए थे, में विशेष टास्क फोर्स तैनात करने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा उन्होंने वायु प्रदूषण रोकने के लिए गांव, कलस्टर, तहसील और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को भी कहा है। इस मौके पर मुख्य सचिव को बताया गया कि धान के मौजूदा सीजन के लिए गांव स्तर पर 8000 नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
पराली जलाने की रोकथाम के मुद्दे पर बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने पशुपालन विभाग को गोशालाओं में रखे पशुओं के लिए धान की पराली को चारे के तौर पर इस्तेमाल करने के तरीके तलाशने को कहा। उन्होंने सभी डिप्टी कमिश्नरों को धान की पराली के भंडारण के लिए विस्तृत प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।
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मुख्य सचिव ने लाल श्रेणी वाले जिलों- संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, मानसा, तरनतारन, बरनाला और लुधियाना के डिप्टी कमिश्नरों को रोकथाम के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेष टास्क फोर्स तैनात करने को कहा है।
पीपीसीबी ने तैयार कराया एप, 15 से शुरू होगा
मुख्य सचिव ने बताया कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (पीआरएससी) से एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफार्मों के लिए मोबाइल एप तैयार करवाया गया है, जिसे 15 सितंबर तक चालू कर दिया जाएगा। पराली जलाने के मामलों संबंधी शिकायतें/जानकारी प्राप्त करने के लिए पीपीसीबी द्वारा 15 सितंबर तक व्हाट्सएप कॉल सेंटर भी चालू कर दिया जाएगा।
बायोमास पावर प्रोजेक्टों में पराली का उपयोग
बैठक के दौरान महाजन को बताया गया कि 97.5 मेगावाट क्षमता वाले 11 बायोमास पावर प्रोजेक्ट पहले ही चालू किए जा चुके हैं, जिनमें सालाना 8.8 लाख टन धान की पराली का उपयोग होगा। इनके अलावा जालंधर और फतेहगढ़ साहिब जिलों में 14 मेगावाट के दो बायोमास पावर प्रोजेक्ट प्रगति अधीन हैं, जो सालाना 1.2 लाख टन धान की पराली का प्रयोग करेंगे। इसके साथ ही राज्य में 262.58 टीपीडी सीबीजी के 23 सीबीजी प्रोजेक्ट भी प्रगति अधीन हैं, जो सालाना 8.774 लाख टन पराली का निपटारा करेंगे।
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इसके अलावा उन्होंने वायु प्रदूषण रोकने के लिए गांव, कलस्टर, तहसील और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने को भी कहा है। इस मौके पर मुख्य सचिव को बताया गया कि धान के मौजूदा सीजन के लिए गांव स्तर पर 8000 नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
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पराली जलाने की रोकथाम के मुद्दे पर बुलाई गई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने पशुपालन विभाग को गोशालाओं में रखे पशुओं के लिए धान की पराली को चारे के तौर पर इस्तेमाल करने के तरीके तलाशने को कहा। उन्होंने सभी डिप्टी कमिश्नरों को धान की पराली के भंडारण के लिए विस्तृत प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।
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मुख्य सचिव ने लाल श्रेणी वाले जिलों- संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, मानसा, तरनतारन, बरनाला और लुधियाना के डिप्टी कमिश्नरों को रोकथाम के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विशेष टास्क फोर्स तैनात करने को कहा है।
पीपीसीबी ने तैयार कराया एप, 15 से शुरू होगा
मुख्य सचिव ने बताया कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) द्वारा पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर (पीआरएससी) से एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफार्मों के लिए मोबाइल एप तैयार करवाया गया है, जिसे 15 सितंबर तक चालू कर दिया जाएगा। पराली जलाने के मामलों संबंधी शिकायतें/जानकारी प्राप्त करने के लिए पीपीसीबी द्वारा 15 सितंबर तक व्हाट्सएप कॉल सेंटर भी चालू कर दिया जाएगा।
बायोमास पावर प्रोजेक्टों में पराली का उपयोग
बैठक के दौरान महाजन को बताया गया कि 97.5 मेगावाट क्षमता वाले 11 बायोमास पावर प्रोजेक्ट पहले ही चालू किए जा चुके हैं, जिनमें सालाना 8.8 लाख टन धान की पराली का उपयोग होगा। इनके अलावा जालंधर और फतेहगढ़ साहिब जिलों में 14 मेगावाट के दो बायोमास पावर प्रोजेक्ट प्रगति अधीन हैं, जो सालाना 1.2 लाख टन धान की पराली का प्रयोग करेंगे। इसके साथ ही राज्य में 262.58 टीपीडी सीबीजी के 23 सीबीजी प्रोजेक्ट भी प्रगति अधीन हैं, जो सालाना 8.774 लाख टन पराली का निपटारा करेंगे।