{"_id":"6570d26063d517fe830571b3","slug":"order-to-cancel-fir-lodged-during-corona-period-against-former-cm-channi-and-other-leaders-pkl-office-news-c-16-1-pkl1041-300035-2023-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: पूर्व सीएम चन्नी समेत अन्य नेताओं के खिलाफ कोरोना काल में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: पूर्व सीएम चन्नी समेत अन्य नेताओं के खिलाफ कोरोना काल में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत अन्य नेताओं को बड़ी राहत देते हुए कोरोना काल में दर्ज धारा 144 के उल्लंघन की एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है। चंडीगढ़ जिला अदालत में इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई लंबित थी।
पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, आप प्रवक्ता मलविंदर कंग, अरुण नारंग और भाजपा के विजय सांपला सहित अश्वनी शर्मा, तरुण चुग, मनोरंजन कालिया, जीवन गुप्ता, बलदेव चावला, सुभाष शर्मा, तीक्ष्ण सूद, मास्टर मोहन लाल, सुरजीत कुमार ज्याणी और केडी भंडारी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील की थी। इन सभी के खिलाफ कोरोना काल में आईपीसी की धारा-188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी और इन पर धारा 144 के उल्लंघन का आरोप है।
याचिका में बताया गया कि धारा-188 से जुड़े अपराध के तहत कोई एफआईआर बिना शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती। सीआरपीसी की धारा 195 के अनुसार कोई अदालत धारा 172 से 188 तक किसी अपराध पर संज्ञान नहीं ले सकती और न किसी पब्लिक सर्वेंट की शिकायत हो सकती है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल पर रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट ने इन सभी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, आप प्रवक्ता मलविंदर कंग, अरुण नारंग और भाजपा के विजय सांपला सहित अश्वनी शर्मा, तरुण चुग, मनोरंजन कालिया, जीवन गुप्ता, बलदेव चावला, सुभाष शर्मा, तीक्ष्ण सूद, मास्टर मोहन लाल, सुरजीत कुमार ज्याणी और केडी भंडारी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अपील की थी। इन सभी के खिलाफ कोरोना काल में आईपीसी की धारा-188 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी और इन पर धारा 144 के उल्लंघन का आरोप है।
विज्ञापन
याचिका में बताया गया कि धारा-188 से जुड़े अपराध के तहत कोई एफआईआर बिना शिकायत दर्ज नहीं की जा सकती। सीआरपीसी की धारा 195 के अनुसार कोई अदालत धारा 172 से 188 तक किसी अपराध पर संज्ञान नहीं ले सकती और न किसी पब्लिक सर्वेंट की शिकायत हो सकती है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल पर रोक लगा दी थी। अब हाईकोर्ट ने इन सभी पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन