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बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने का विरोध
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इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार कोविड-19 के बीच बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की जल्दबाजी में है। कोविड-19 के खिलाफ अत्यंत कठिन जंग के समय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार ने 17 अप्रैल को बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने के लिए बिजली संशोधन बिल- 2020 का ड्राफ्ट जारी कर दिया।
ऊर्जा मंत्रालय ने सभी राज्यों व अन्य स्टेक होल्डर्स से 5 जून तक अपने सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की है। जबकि सरकार को मालूम है कि ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव देना लॉकडाउन में यह कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि बिहार व तेलंगाना सहित कई राज्यों ने इस बिल का विरोध भी कर दिया है। उन्होंने बताया कि अगर यह बिल पास हो गया तो बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म हो जाएगी और गरीब उपभोक्ता व किसानों की पहुंच से बिजली दूर हो जाएगी। आल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश राठी व महासचिव नरेश कुमार ने इस बिल को गरीब उपभोक्ता व किसान तथा कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसका राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर उपभोक्ताओं व किसानों के साथ मिलकर विरोध करने का ऐलान किया है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लांबा ने कहा कि देश के 30 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं की सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म होने से भारी भरकम बिलों की मार आम जनता को झेलनी पड़ेगी। सरकार ने इस गरीब उपभोक्ता, किसान, कर्मचारी व इंजीनियर विरोधी बिल को पास करने का प्रयास किया तो देश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसानों के साथ मिलकर राट्रीय स्तर पर विरोध करेंगे।
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ऊर्जा मंत्रालय ने सभी राज्यों व अन्य स्टेक होल्डर्स से 5 जून तक अपने सुझाव एवं टिप्पणियां आमंत्रित की है। जबकि सरकार को मालूम है कि ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव देना लॉकडाउन में यह कैसे संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि बिहार व तेलंगाना सहित कई राज्यों ने इस बिल का विरोध भी कर दिया है। उन्होंने बताया कि अगर यह बिल पास हो गया तो बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण का रास्ता साफ हो जाएगा। सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म हो जाएगी और गरीब उपभोक्ता व किसानों की पहुंच से बिजली दूर हो जाएगी। आल हरियाणा पावर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश राठी व महासचिव नरेश कुमार ने इस बिल को गरीब उपभोक्ता व किसान तथा कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसका राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर उपभोक्ताओं व किसानों के साथ मिलकर विरोध करने का ऐलान किया है।
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फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लांबा ने कहा कि देश के 30 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं की सब्सिडी व क्रॉस सब्सिडी खत्म होने से भारी भरकम बिलों की मार आम जनता को झेलनी पड़ेगी। सरकार ने इस गरीब उपभोक्ता, किसान, कर्मचारी व इंजीनियर विरोधी बिल को पास करने का प्रयास किया तो देश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसानों के साथ मिलकर राट्रीय स्तर पर विरोध करेंगे।
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