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13 अक्तूबर को गज्जण ने आना था छुट्टी पर
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रोपड़। बुधवार को जिस सैनिक को छुट्टी आना था आज तिरंगे में लिपटा उसका शव घर पहुंचेगा। दो दिन पहले ही नूरपुर बेदी के सैनिक गज्जण सिंह ने अपनी पत्नी से फोन पर बात कर उसे घर आने की जानकारी दी थी। जिससे घर में खुशी का माहौल था। लेकिन, गज्जण सिंह पुंछ में शहीद हो गए। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा घर पहुंचेगा।
शहीद सैनिक गज्जण सिंह के पिता चरण सिंह सामान्य किसान हैं। गज्जण सिंह के तीन भाई हैं। परिजन बताते हैं कि गज्जण सिंह 23 सिख रेजिमेंट में सात साल पहले भर्ती हुए थे। इस समय गज्जण सिंह 16 आरआर रेजिमेंट पुंछ में तैनात थे।
परिजनों के मुताबिक गज्जण सिंह की अपनी पत्नी हरमीत कौर के साथ दो दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया था कि वो 13 अक्तूबर को छुट्टी आ रहा है। फिलहाल गज्जण सिंह की माता मलकीत कौर और पिता चरण सिंह को गज्जण सिंह की शहादत की जानकारी परिवार ने नहीं दी है।
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परिजन बताते हैं कि मां बीमार है। शहीद गज्जण सिंह का पार्थिव शरीर 12 अक्टूबर को उनके पुश्तैनी गांव पचरंडा (नूरपुरबेदी) में तिरंगे में लिपटा हुआ पहुंचेगा।
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शहीद सैनिक गज्जण सिंह के पिता चरण सिंह सामान्य किसान हैं। गज्जण सिंह के तीन भाई हैं। परिजन बताते हैं कि गज्जण सिंह 23 सिख रेजिमेंट में सात साल पहले भर्ती हुए थे। इस समय गज्जण सिंह 16 आरआर रेजिमेंट पुंछ में तैनात थे।
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परिजनों के मुताबिक गज्जण सिंह की अपनी पत्नी हरमीत कौर के साथ दो दिन पहले ही फोन पर बात हुई थी। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया था कि वो 13 अक्तूबर को छुट्टी आ रहा है। फिलहाल गज्जण सिंह की माता मलकीत कौर और पिता चरण सिंह को गज्जण सिंह की शहादत की जानकारी परिवार ने नहीं दी है।
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परिजन बताते हैं कि मां बीमार है। शहीद गज्जण सिंह का पार्थिव शरीर 12 अक्टूबर को उनके पुश्तैनी गांव पचरंडा (नूरपुरबेदी) में तिरंगे में लिपटा हुआ पहुंचेगा।