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बीज घोटालाः पीएयू की किसान सोसाइटी के सदस्यों की संपत्ति पर टिकी है एसआईटी की नजर

Tue, 09 Jun 2020 11:57 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 09 Jun 2020 11:57 AM IST
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SIT tracking property details of Members of PAU's Farmer Society
फाइल फोटो
पंजाब में धान बीज घोटाले की जांच में जुटी राज्यस्तरीय एसआईटी की नजरें किसानों की उस सोसाइटी पर टिक गई हैं, जिन्हें पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की तरफ शोध किए बीजों को परख के उद्देश्य से उगाने के लिए मुहैया कराए जाते रहे हैं। दूसरी ओर, चंडीगढ़ में कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन खबरों का खंडन किया कि घोटाले के तार कृषि विभाग से जुड़े हैं और एसआईटी विभाग की भूमिका खंगाल रही है।
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जानकारी के अनुसार एसआईटी ने पीएयू द्वारा गठित किसान सोसाइटी में किसान के तौर पर शामिल लोगों की पृष्ठभूमि की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि किसान सोसाइटी का सदस्य बनने के समय और अब उनकी वित्तीय स्थिति कैसी है।
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उल्लेखनीय है कि घोटाले में गिरफ्तार बलजिंदर सिंह जगराओं में 34 एकड़ जमीन का मालिक है और पीएयू द्वारा गठित किसान एसोसिएशन का सदस्य है। सोसाइटी की तरफ से उसे किसानों को नए बीजों व तकनीकों संबंधी जानकारी देने का कार्य सौंपा गया था।
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नए बीज की पैदावार के नतीजों का मूल्यांकन करने के लिए पीएयू ने उसे ही प्रयोग के तौर पर बीजाई के लिए पिछले साल धान का नया विकसित बीज पीआर-128 और पीआर-129 दिया गया था। लेकिन उसने परख के तौर पर तैयार की अतिरिक्त फसल के बीज का उत्पादन किया और उसे बिना अधिकार से बराड़ बीज स्टोर को बेच दिया।

करनाल में हरियाणा पुलिस ने दर्ज किया केस

बीज घोटाले के आरोपी लक्की ढिल्लों के खिलाफ हरियाणा पुलिस ने भी केस दर्ज कर लिया है। पंजाब में एसआईटी की जांच में दौरान यह सामने आया है कि लक्की ढिल्लों ने करनाल में फर्जी पते के आधार पर अपनी करनाल सीड कंपनी का पंजीकरण कराया था और फर्जी कार्यालय भी दर्शाया था।

जांच में सामने आया कि करनाल में जिस पते पर कंपनी पंजीकृत कराई गई, वह कोई व्यापारिक स्थल न होकर किसी अन्य व्यक्ति का आवास है और उस व्यक्ति का लक्की ढिल्लो से कोई सरोकार भी नहीं है। हरियाणा पुलिस ने इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद जांच की तथा पता चला कि लक्की के निकटतम सहयोगियों ने उन नकली पते का इस्तेमाल किया, जिसका मालिक 20 साल पहले दुबई चला गया था।

पीएयू की रिसर्च से कृषि विभाग का नहीं कोई लेना-देना
कृषि विभाग के एक आला अधिकारी से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि घोटाले के बारे में एफआईआर कृषि विभाग के अफसर द्वारा ही कराई गई है। पीएयू के अनुसंधानों का कृषि विभाग का कोई सरोकार नहीं है। पीएयू द्वारा अपनी किसान सोसाइटी को परख के लिए जो भी बीज दिए जाते हैं, उसमें भी कृषि विभाग की कोई भूमिका नहीं है।

उन्होंने कहा कि पीएयू के किसी बीज का कोड तभी कृषि विभाग के अधीन आता है जब संबंधी बीज को केंद्रीय बीज नोटिफाई कमेटी मंजूरी दे देती है। बीज की परख के दौरान कृषि विभाग की कोई भूमिका नहीं है और न ही विभाग परखने के लिए बीज उगाता है।
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