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चुनाव से कीर्ति किसान यूनियन ने किया किनारा, नहीं उतारेगी प्रत्याशी
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चंडीगढ़। 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से कीर्ति किसान यूनियन ने किनारा कर लिया है। यूनियन ने चुनाव मैदान में प्रत्याशियों के नहीं उतारने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा की एकता को बनाए रखने के लिए चुनाव में न उतरने की अपील की है।
अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दल कमर कस रहे हैं। किसान संघ भी संयुक्त समाज मोर्चा के तहत चुनाव लड़ने का एलान कर चुका है। किसानों के चुनाव लड़ने पर कई किसान यूनियनों की एक राय नहीं है। किरती किसान यूनियन के प्रधान निर्भय सिंह ढूढीके ने चंडीगढ़ में वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कृषि कानूनों को खत्म करवाने के लिए किसान आंदोलन शुरू हुआ था। हालांकि आंदोलन अभी समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी भी किसानों के कई मसले हल होने बाकी हैं। जिसके लिए किसानों को अभी लंबी लड़ाई लड़नी बाकी है। ऐसे में यदि चुनावी लड़ाई शुरू कर दी गई तो किसानों की मांगें कमजोर पड़ जाएंगी। कीर्ति किसान यूनियन के अध्यक्ष नेे कहा कि अगर हमारे साथी वापस नहीं आएंगे तो उनके साथ भी वैसा ही होगा जैसा अन्य राजनीतिक दलों के साथ हो रहा है।
भाजपा का नहीं करेंगे विरोध
किसान यूनियन के नेता राजेंद्र पाल सिंह ने कहा है कि अब किसान संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों का विरोध नहीं करेंगे। 3 खेती कानूनों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला लिया था कि वे भाजपा के कार्यक्रम नहीं होने देंगे, लेकिन अब जब तीनों खेती कानून वापस लिए जा चुके हैं तो अब इस फैसले पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
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आप की जीत किसानों की वजह से: राजेवाल
किसानों के सम्मान समारोह में किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि चंडीगढ़ में निगम चुनाव में जो जीत आप को मिली है उसके पीछे की वजह किसान ही हैं। पंजाब में काफी सियासी गंदगी हो गई है, जिसको साफ करने के लिए अब किसानों को सामने आना पड़ा है। जल्द ही किसान पंजाब चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे।
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अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दल कमर कस रहे हैं। किसान संघ भी संयुक्त समाज मोर्चा के तहत चुनाव लड़ने का एलान कर चुका है। किसानों के चुनाव लड़ने पर कई किसान यूनियनों की एक राय नहीं है। किरती किसान यूनियन के प्रधान निर्भय सिंह ढूढीके ने चंडीगढ़ में वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कृषि कानूनों को खत्म करवाने के लिए किसान आंदोलन शुरू हुआ था। हालांकि आंदोलन अभी समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी भी किसानों के कई मसले हल होने बाकी हैं। जिसके लिए किसानों को अभी लंबी लड़ाई लड़नी बाकी है। ऐसे में यदि चुनावी लड़ाई शुरू कर दी गई तो किसानों की मांगें कमजोर पड़ जाएंगी। कीर्ति किसान यूनियन के अध्यक्ष नेे कहा कि अगर हमारे साथी वापस नहीं आएंगे तो उनके साथ भी वैसा ही होगा जैसा अन्य राजनीतिक दलों के साथ हो रहा है।
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भाजपा का नहीं करेंगे विरोध
किसान यूनियन के नेता राजेंद्र पाल सिंह ने कहा है कि अब किसान संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों का विरोध नहीं करेंगे। 3 खेती कानूनों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने फैसला लिया था कि वे भाजपा के कार्यक्रम नहीं होने देंगे, लेकिन अब जब तीनों खेती कानून वापस लिए जा चुके हैं तो अब इस फैसले पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
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आप की जीत किसानों की वजह से: राजेवाल
किसानों के सम्मान समारोह में किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि चंडीगढ़ में निगम चुनाव में जो जीत आप को मिली है उसके पीछे की वजह किसान ही हैं। पंजाब में काफी सियासी गंदगी हो गई है, जिसको साफ करने के लिए अब किसानों को सामने आना पड़ा है। जल्द ही किसान पंजाब चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का खुलासा करेंगे।