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हरियाणा: समय पर काम नहीं किया तो जा सकती है नौकरी, आज सॉफ्टवेयर की शुरुआत करेंगे मुख्यमंत्री
Tue, 31 Aug 2021 10:14 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 10:14 PM IST
सार
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक सितंबर से ऑटो अपील सॉफ्टवेयर की शुरुआत करेंगे। इसके तहत अब कर्मचारियों और अधिकारियों को लोगों का काम समय पर करना होगा। लापरवाही और ढुलमुल रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों की नौकरी भी जा सकती है। हरियाणा सेवा का अधिकार के तहत ऐसी व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के अंतर्गत आने वाली सेवाओं को अब समय पर करना होगा। ऐसा न करने पर क्लर्क से लेकर विभागाध्यक्ष पर भी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही जिस अधिकारी व कर्मचारी पर तीन बार जुर्माना होगा तो उसकी नौकरी भी जा सकती है।
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सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने ये व्यवस्था की है। इसके लिए हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग का ‘आस’ यानी ऑटो अपील सॉफ्टवेयर लगातार फाइलों पर नजर रखेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक सितंबर से ऑटो अपील सॉफ्टवेयर की शुरुआत करेंगे।
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हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने बताया कि हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है जो इस तरह का सिस्टम शुरू करने जा रहा है। सॉफ्टवेयर से लोगों के काम निर्धारित समय-सीमा के अंदर होने लगेंगे। और अधिकारी या कर्मचारी ढुलमुल रवैया नहीं अपना पाएंगे।
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समय पर काम नहीं तो उच्च अधिकारी के पास पहुंचेगा आवेदन
साफ्टवेयर के तहत अगर किसी व्यक्ति का काम समय पर नहीं होता और वह काम सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में आता है तो ऑटो अपील सॉफ्टवेयर के तहत आवेदन अपीलेट अथॉरिटी में चला जाएगा। यदि वहां भी काम नहीं होता तो आवेदन उससे बड़े अधिकारी के पास चला जाएगा। अगर इन दोनों स्तरों पर भी काम नहीं होता तो फिर आवेदन कमीशन के पास आ जाएगा।
8 से नीचे स्कोर तो भेजा जाएगा नोटिस
गुप्ता ने बताया कि अन्त्योदय सरल पोर्टल पर राइट टू सर्विस का स्कोर 10 में से आता है। प्रदेश में दो-तीन जिलों को छोड़कर लगभग सभी जिलों का आरटीएस स्कोर ठीक है लेकिन इसमें और सुधार की जरूरत है। कई विभागों का आरटीएस स्कोर कम है और उन्हें इसमें सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी जिले का स्कोर 8 से नीचे होगा तो उसे अप्रशंसा नोट भेजा जाएगा, जबकि 9.5 से ऊपर होने पर हर महीने प्रशंसा-पत्र दिया जाएगा। उपायुक्तों से इसकी मासिक रिपोर्ट भी ली जाएगी।