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पंजाब को झटका: ग्रामीण विकास फंड के बकाया 2880 करोड़ मिलना मुश्किल, केंद्र ने पैसा देने की जगह दी सलाह
Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2022 08:00 AM IST
सार
केंद्र की तरफ से भेले गए पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार गरीब और कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में अपने वैधानिक शुल्क कम करे, जिससे राज्य के खजाने पर सब्सिडी का बोझ भी कम होगा।
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पंजाब
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
केंद्र सरकार ने आखिरकार पंजाब को ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) का बकाया अदा नहीं करने के संकेत दे दिए हैं। वर्ष 2021 के खरीद सीजन की 1100 करोड़ की आरडीएफ राशि जोकि मौजूदा धान खरीद सीजन में बढ़कर 2880 करोड़ रुपये हो गई है, के लिए पंजाब सरकार बार-बार केंद्र सरकार से तकाजा करती रही है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से पंजाब सरकार को भेजे पत्र में बकाया देने के बजाय सलाह दी है कि राज्य सरकार गरीब और कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में अपने वैधानिक शुल्क कम करे, जिससे राज्य के खजाने पर सब्सिडी का बोझ भी कम होगा। केंद्र ने यह सलाह भी दी है कि राज्य सरकार निजी एजेंसियों को उच्च कीमतों पर अनाज खरीदने के लिए प्रोत्साहित करे, इससे किसानों को लाभ होगा।
इस फंड को लेकर पंजाब सरकार की चिंता उस समय बढ़ी थी, जब 2022 के रबी खरीद सीजन में आरडीएफ की बकाया राशि बढ़कर 1760 करोड़ रुपये हो गई। उस समय केंद्र सरकार की अस्थायी लागत शीट में इस फंड का कोई उल्लेख नहीं किया बल्कि धान खरीद में अर्जित होने वाले अन्य सभी आकस्मिक शुल्कों का उल्लेख किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। 2022 के मौजूदा खरीफ खरीद सीजन के आरडीएफ के 1120 करोड़ रुपये की राशि भी बकाया में जुड़ गई है और कुल बकाया 2880 करोड़ रुपये हो गया है।
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राज्य सरकार के भेजे पत्र में यह लिखा
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से राज्य सरकार को भेजे पत्र में लिखा गया है- ‘आपसे अनुरोध है कि विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में, वैधानिक शुल्कों को सीमित करने पर विचार करें। वैधानिक शुल्कों को युक्तिसंगत बनाकर, राज्य के खजाने पर सब्सिडी का बोझ कम किया जाए। निजी एजेंसियों को ऊंचे दाम पर फसल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, इससे किसानों को लाभ होगा।
कांग्रेस ने पंजाब सरकार पर लगाया आरोप
पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरडीएफ की बकाया राशि को लेकर केंद्र सरकार द्वारा पंजाब को भेजे पत्र को लेकर राज्य सरकार पर अक्षमता का आरोप लगाया है। बुधवार को राजा वड़िंग ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा- ‘जब अनुभवहीनता अक्षमता से मिलती है और अहंकार द्वारा निर्देशित होती है। पंजाब में यही हो रहा है। ग्रामीण विकास फंड जारी करने को लेकर केंद्र के इनकार से साफ है कि आप सरकार दबाव नहीं बना सकी। जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हरपाल चीमा साहब...’
चीमा ने जताया एतराज
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि केंद्र ने हमें एक्ट में संशोधन करने को कहा और हमने किया। इस आशा के साथ कि हमारी बकाया राशि का भुगतान हो जाएगा। आरडीएफ की बकाया राशि का भुगतान नहीं होने से, हमारे ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर असर पड़ेगा क्योंकि हमारे पास ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए कोई संसाधन नहीं होगा। इससे केंद्र की भाजपा सरकार का पंजाब विरोधी और किसान विरोधी चेहरा उजागर हुआ है।
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केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से पंजाब सरकार को भेजे पत्र में बकाया देने के बजाय सलाह दी है कि राज्य सरकार गरीब और कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में अपने वैधानिक शुल्क कम करे, जिससे राज्य के खजाने पर सब्सिडी का बोझ भी कम होगा। केंद्र ने यह सलाह भी दी है कि राज्य सरकार निजी एजेंसियों को उच्च कीमतों पर अनाज खरीदने के लिए प्रोत्साहित करे, इससे किसानों को लाभ होगा।
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इस फंड को लेकर पंजाब सरकार की चिंता उस समय बढ़ी थी, जब 2022 के रबी खरीद सीजन में आरडीएफ की बकाया राशि बढ़कर 1760 करोड़ रुपये हो गई। उस समय केंद्र सरकार की अस्थायी लागत शीट में इस फंड का कोई उल्लेख नहीं किया बल्कि धान खरीद में अर्जित होने वाले अन्य सभी आकस्मिक शुल्कों का उल्लेख किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। 2022 के मौजूदा खरीफ खरीद सीजन के आरडीएफ के 1120 करोड़ रुपये की राशि भी बकाया में जुड़ गई है और कुल बकाया 2880 करोड़ रुपये हो गया है।
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राज्य सरकार के भेजे पत्र में यह लिखा
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से राज्य सरकार को भेजे पत्र में लिखा गया है- ‘आपसे अनुरोध है कि विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों के बीच वितरण के लिए खरीदे गए खाद्यान्न के मामले में, वैधानिक शुल्कों को सीमित करने पर विचार करें। वैधानिक शुल्कों को युक्तिसंगत बनाकर, राज्य के खजाने पर सब्सिडी का बोझ कम किया जाए। निजी एजेंसियों को ऊंचे दाम पर फसल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, इससे किसानों को लाभ होगा।
कांग्रेस ने पंजाब सरकार पर लगाया आरोप
पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आरडीएफ की बकाया राशि को लेकर केंद्र सरकार द्वारा पंजाब को भेजे पत्र को लेकर राज्य सरकार पर अक्षमता का आरोप लगाया है। बुधवार को राजा वड़िंग ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा- ‘जब अनुभवहीनता अक्षमता से मिलती है और अहंकार द्वारा निर्देशित होती है। पंजाब में यही हो रहा है। ग्रामीण विकास फंड जारी करने को लेकर केंद्र के इनकार से साफ है कि आप सरकार दबाव नहीं बना सकी। जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हरपाल चीमा साहब...’
चीमा ने जताया एतराज
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि केंद्र ने हमें एक्ट में संशोधन करने को कहा और हमने किया। इस आशा के साथ कि हमारी बकाया राशि का भुगतान हो जाएगा। आरडीएफ की बकाया राशि का भुगतान नहीं होने से, हमारे ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर असर पड़ेगा क्योंकि हमारे पास ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए कोई संसाधन नहीं होगा। इससे केंद्र की भाजपा सरकार का पंजाब विरोधी और किसान विरोधी चेहरा उजागर हुआ है।