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हरियाणा में फर्जी ग्रेडेशन सर्टिफिकेट मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी
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चंडीगढ़। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी तरीके से ग्रेडेशन सर्टिफिकेट हासिल करने के मामले में सरकार ने विजिलेंस को जांच के लिए आदेश दे दिए हैं। अब विजिलेंस जांच में पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलेंगे। जांच के दायरे में सर्टिफिकेट हासिल करने वाले युवाओं समेत जारी करने वाली खेल फेडरेशन और संबंधित जिला खेल अधिकारी रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि जांच में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 29 अगस्त 2018 को ग्रुप डी के 18218 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें 1518 खेल कोटे के थे। लिखित परीक्षा पास करने के बाद आयोग व विभागों ने इनके सर्टिफिकेट के सत्यापन के बाद ड्यूटी ज्वाइन करवाई थी। इसके बाद सरकार ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों से 25 मई 2018 को जारी नई खेल ग्रेडेशन पॉलिसी के अनुसार स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट मांगे। इस दौरान काफी संख्या में युवाओं ने गलत तरीके से ग्रेडेशन सर्टिफिकेट हासिल करके जमा करा दिए। बाद में जब इनकी जांच की गई तो ये फर्जी पाए गए। शिकायत मिलने पर खेल विभाग ने इस मामले की पूरे प्रदेश में जांच कराई तो पाया कि 2018 से लेकर 2021 तक कुल 5627 सर्टिफिकेट जारी किए गए, इनमें से 2403 संदिग्ध पाए गए। डिप्टी डायरेक्टर स्तर की जांच में ये भी पाया गया कि कई जिलों में 100 से अधिक सर्टिफिकेट जारी कर दिए। कई जगह बिना खेल हुए भी प्रमाण पत्र दे दिए गए। सबसे अधिक फर्जीवाड़ा नौ जिलों भिवानी, फतेहाबाद, हिसार, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, रोहतक और सोनीपत जिलों में हुआ। खेल मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र मामले की जांच सीएम की अनुमति के बाद विजिलेंस को सौंप दी है। जांच के बाद जो भी सामने आयेगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 29 अगस्त 2018 को ग्रुप डी के 18218 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें 1518 खेल कोटे के थे। लिखित परीक्षा पास करने के बाद आयोग व विभागों ने इनके सर्टिफिकेट के सत्यापन के बाद ड्यूटी ज्वाइन करवाई थी। इसके बाद सरकार ने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों से 25 मई 2018 को जारी नई खेल ग्रेडेशन पॉलिसी के अनुसार स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट मांगे। इस दौरान काफी संख्या में युवाओं ने गलत तरीके से ग्रेडेशन सर्टिफिकेट हासिल करके जमा करा दिए। बाद में जब इनकी जांच की गई तो ये फर्जी पाए गए। शिकायत मिलने पर खेल विभाग ने इस मामले की पूरे प्रदेश में जांच कराई तो पाया कि 2018 से लेकर 2021 तक कुल 5627 सर्टिफिकेट जारी किए गए, इनमें से 2403 संदिग्ध पाए गए। डिप्टी डायरेक्टर स्तर की जांच में ये भी पाया गया कि कई जिलों में 100 से अधिक सर्टिफिकेट जारी कर दिए। कई जगह बिना खेल हुए भी प्रमाण पत्र दे दिए गए। सबसे अधिक फर्जीवाड़ा नौ जिलों भिवानी, फतेहाबाद, हिसार, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, रोहतक और सोनीपत जिलों में हुआ। खेल मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र मामले की जांच सीएम की अनुमति के बाद विजिलेंस को सौंप दी है। जांच के बाद जो भी सामने आयेगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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