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जिस दिन कारण बताओ नोटिस दिया उसी दिन पासपोर्ट किया जब्त, न्याय के सिद्धांत के खिलाफ: हाईकोर्ट

Thu, 29 Jun 2023 12:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jun 2023 12:54 AM IST
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Impounded passport on the same day show cause notice was given, against the principle of justice: High Court
चंडीगढ़। पासपोर्ट जब्त करने का नोटिस जारी करने के दिन ही इस पर जवाब की प्रतीक्षा करे बिना कार्रवाई करने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने न्याय के सिद्धांत के खिलाफ करार देते हुए पासपोर्ट अथॉरिटी को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि माना की अथॉरिटी के पास पासपोर्ट जब्त करने की शक्ति है लेकिन इसका प्रयोग निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए। याचिका दाखिल करते हुए भारत सरकार ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया कि जालंधर निवासी लखविंदर सिंह ने अपने पासपोर्ट को रिन्यू करवाने के दौरान आपराधिक मामले से जुड़ी जानकारी छुपाई थी। इस बारे में जब पुलिस रिपोर्ट में जानकारी मिली तो पासपोर्ट अथॉरिटी ने 27 फरवरी 2017 को लखविंदर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
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इसके बाद जब लखविंदर सिंह दिल्ली से जर्मनी के लिए फ्लाइट पकड़ने गया तो इस दौरान उसका पासपोर्ट जब्त कर इसे जालंधर भेज दिया गया। इसके बाद लखविंदर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए विदेश जाने की अनुमति मांगी और उसे अनुमति मिल गई। लखविंदर का आरोप है कि अनुमति मिलने के बाद भी पासपोर्ट अथॉरिटी उसे पासपोर्ट जारी नहीं कर रही है। सरकार ने कहा कि इस प्रकार से आपराधिक मामले की जानकारी छुपाना अपराध है।
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इसके बाद लखविंदर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने की अपील की थी। सिंगल बेंच ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया था और साथ ही 20 हजार रुपये मुआवजे के रूप में देने का भी आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने भारत सरकार की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में सरकार को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए केवल औपचारिकता ही पूरी की थी क्योंकि यह नोटिस जिस दिन जारी किया गया उसी दिन लखविंदर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका पासपोर्ट जब्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। यह न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और आंखों में धूल झोंकना है। कोर्ट ने कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में कोई खामी नहीं थी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने भारत सरकार की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।
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