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पंचकूला में मशरूम की खेती की अपार संभावनाएं
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पंचकूला। कृषि विज्ञान केंद्र पंचकूला की संयोजिका डॉ. श्रीदेवी तलाप्रागडा के मार्गदर्शन में स्वरोजगार के लिए मशरूम की खेती पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया। इस दौरान अनुसूचित व अनुसूचित जनजाति परिवार के 60 युवक व युवतियों को प्रशिक्षित किया गया। पंचकूला जिले में मशरूम की खेती की अपार संभावनाएं हैं। खासतौर पर मोरनी एरिया में मशरूम की खेती उपयुक्त है।
केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने कृषि विविधीकरण के तहत मत्स्य पालन अपनाने पर भी जोर दिया और किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने की सलाह दी। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को मशरूम उगाने के लिए कंपोस्ट के बैग मुफ्त बांटे गए। कार्यक्रम के निदेशक डॉ. रविंद्र चौहान व डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने युवक व युवतियों को इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवक व युवतियां मशरूम की खेती का व्यवसाय अपनाकर आजीविका कमा सकते हैं। मशरूम एक पौष्टिक आहार है। इसमें एसिड, खनिज- लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। मशरूम में फोलिक एसिड और लावनिक तत्व पाए जाते हैं जो खून में रेडसैल बनाते हैं। डॉक्टर और डाइटिशियन मोटापा, हार्ट डिजीज और डायबिटीज के रोगियों को इसका सेवन करने की सलाह देते हैं।
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खेती पर लागत आती है कम
मशरूम की खेती को छोटी जगह और कम लागत में शुरू किया जा सकता है और लागत की तुलना में मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है। बेरोजगार युवकों के लिए स्वरोजगार के नजरिए से भी यह सेक्टर फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉ. रविंद्र चौहान पौध रोग विशेषज ने कहा कि खुंबी की खेती कृषि का वह नया क्षेत्र है जिसे खेती प्रणाली में आने से समेकित किया जा सकता है। भूमि की खेती के लिए भूमि की बहुत कम भूमि की आवश्यकता होती है। कृषि अपशिष्ट इसका प्रमुख निवेश है।
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केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने कृषि विविधीकरण के तहत मत्स्य पालन अपनाने पर भी जोर दिया और किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने की सलाह दी। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को मशरूम उगाने के लिए कंपोस्ट के बैग मुफ्त बांटे गए। कार्यक्रम के निदेशक डॉ. रविंद्र चौहान व डॉक्टर गजेंद्र सिंह ने युवक व युवतियों को इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।
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प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवक व युवतियां मशरूम की खेती का व्यवसाय अपनाकर आजीविका कमा सकते हैं। मशरूम एक पौष्टिक आहार है। इसमें एसिड, खनिज- लवण, विटामिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। मशरूम में फोलिक एसिड और लावनिक तत्व पाए जाते हैं जो खून में रेडसैल बनाते हैं। डॉक्टर और डाइटिशियन मोटापा, हार्ट डिजीज और डायबिटीज के रोगियों को इसका सेवन करने की सलाह देते हैं।
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खेती पर लागत आती है कम
मशरूम की खेती को छोटी जगह और कम लागत में शुरू किया जा सकता है और लागत की तुलना में मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है। बेरोजगार युवकों के लिए स्वरोजगार के नजरिए से भी यह सेक्टर फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉ. रविंद्र चौहान पौध रोग विशेषज ने कहा कि खुंबी की खेती कृषि का वह नया क्षेत्र है जिसे खेती प्रणाली में आने से समेकित किया जा सकता है। भूमि की खेती के लिए भूमि की बहुत कम भूमि की आवश्यकता होती है। कृषि अपशिष्ट इसका प्रमुख निवेश है।