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एचपीएससी-एचएसएससी लेंगे विवि की भर्ती परीक्षा, विपक्ष ने किया विरोध, सदन में हंगामा
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हरियाणा के 22 सरकारी विश्वविद्यालयों की भर्तियों में अब सरकार का पूरा दखल होगा। ग्रुप-बी, नॉन टीचिंग, ग्रुप-सी, डी व असिस्टेंट प्रोफेसर आयोग के जरिये ही लगेंगे। सरकार ने इन पदों की परीक्षा का जिम्मा डेंटल सर्जन भर्ती फर्जीवाड़े में घिरे हरियाणा लोक सेवा आयोग व पेपर लीक को लेकर बदनाम हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को सौंपने का निर्णय लिया है। भर्ती प्रक्रिया के नए प्रावधान शुक्रवार को सरकार ने सदन पटल पर रखे, जिस पर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस, इनेलो ने नई नियुक्ति प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया।
11 कांग्रेस विधायक और एक इनेलो विधायक दोनों आयोग के जरिये भर्ती परीक्षा के विरोध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए थे। पूर्व शिक्षा मंत्री व विधायक गीता भुक्कल सरकार के फैसले के विरोध में और बोलने का अधिक मौका न देने पर वेल में पहुंच गईं। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता के सत्र से निलंबित करने की चेतावनी देने पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा व सदन में कांग्रेस के उपनेता आफताब अहमद उन्हें सीट पर लेकर गए।
कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा, गीता भुक्कल, बीबी बत्रा, रघुबीर कादियान, जगबीर मलिक इत्यादि विधायकों ने कहा कि एचपीएससी-एचएसएससी भर्ती घोटाले को लेकर पूरे देश में बदनाम हो चुके हैं। इनके जरिये विवि की नौकरियों की परीक्षा कराना और घोटालों का मौका देना है।
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यह विवि की स्वायतता पर हमला है। सरकार इस फैसले को वापस ले। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति और यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। नियुक्तियों का अधिकार विवि से नहीं छीनना चाहिए। इसके विरोध में सड़कों पर उतरा जाएगा। अभय चौटाला ने कहा कि दोनों आयोग का दिवाला निकल चुका है। इनके जरिये परीक्षा हो न ही चयन समिति में आयोग के सदस्य होने चाहिए। पूरे हिंदुस्तान को पता है कि नौकरियां सूटकेस में भरी हुई हैं। इस दौरान बीबी बत्रा और स्पीकर के बीच भी झड़प हुई।
विवि को चयन प्रक्रिया की पेचीदगियों से मिलेगी राहत : कंवर पाल
शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की भर्ती में ही प्रमुख रूप से कार्यरत रहा। शैक्षणिक सुधार और अनुसंधान पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। किसी संस्था के निर्माण में संकाय का अत्यधिक महत्व होता है। महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का मूल इसके संकाय अर्थात शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ है। नए प्रावधानों से विश्वविद्यालयों की स्वायतता प्रभावित नहीं होगी। इससे विश्वविद्यालयों को चयन प्रक्रिया की पेचीदगियों से राहत मिलेगी। नियुक्तियों में विश्वविद्यालय की पूरी भूमिका है। चयन की सभी प्रक्रियाओं में कुलपति शामिल हैं। वह चयन समिति की अध्यक्षता करेंगे। निर्णय लेते समय सभी कुलपतियों से विचार-विमर्श किया है।
इन नियुक्तियों के लिए ये प्रावधान
-कुल सचिव, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सर्च कम सिलेक्शन कमेटी में भी कुलपति की अध्यक्षता का सुझाव।
-हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग जरूरी होने पर लिखित परीक्षा लेंगे, चयन समिति की अध्यक्षता कुलपति करेंगे।
-संबंधित क्षेत्र के दो शैक्षणिक विशेषज्ञ हरियाणा लोक सेवा आयोग नामित करेगा। एक शैक्षणिक विशेषज्ञ हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद की ओर से नामित किया जाएगा और एक विशेषज्ञ कुलाधिपति मनोनीत करेंगे।
-सरकार स्वयं चयन नहीं करेगी, हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर रहेगा जिम्मा।
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11 कांग्रेस विधायक और एक इनेलो विधायक दोनों आयोग के जरिये भर्ती परीक्षा के विरोध में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए थे। पूर्व शिक्षा मंत्री व विधायक गीता भुक्कल सरकार के फैसले के विरोध में और बोलने का अधिक मौका न देने पर वेल में पहुंच गईं। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता के सत्र से निलंबित करने की चेतावनी देने पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा व सदन में कांग्रेस के उपनेता आफताब अहमद उन्हें सीट पर लेकर गए।
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कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा, गीता भुक्कल, बीबी बत्रा, रघुबीर कादियान, जगबीर मलिक इत्यादि विधायकों ने कहा कि एचपीएससी-एचएसएससी भर्ती घोटाले को लेकर पूरे देश में बदनाम हो चुके हैं। इनके जरिये विवि की नौकरियों की परीक्षा कराना और घोटालों का मौका देना है।
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यह विवि की स्वायतता पर हमला है। सरकार इस फैसले को वापस ले। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति और यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। नियुक्तियों का अधिकार विवि से नहीं छीनना चाहिए। इसके विरोध में सड़कों पर उतरा जाएगा। अभय चौटाला ने कहा कि दोनों आयोग का दिवाला निकल चुका है। इनके जरिये परीक्षा हो न ही चयन समिति में आयोग के सदस्य होने चाहिए। पूरे हिंदुस्तान को पता है कि नौकरियां सूटकेस में भरी हुई हैं। इस दौरान बीबी बत्रा और स्पीकर के बीच भी झड़प हुई।
विवि को चयन प्रक्रिया की पेचीदगियों से मिलेगी राहत : कंवर पाल
शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने कहा कि अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की भर्ती में ही प्रमुख रूप से कार्यरत रहा। शैक्षणिक सुधार और अनुसंधान पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। किसी संस्था के निर्माण में संकाय का अत्यधिक महत्व होता है। महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का मूल इसके संकाय अर्थात शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ है। नए प्रावधानों से विश्वविद्यालयों की स्वायतता प्रभावित नहीं होगी। इससे विश्वविद्यालयों को चयन प्रक्रिया की पेचीदगियों से राहत मिलेगी। नियुक्तियों में विश्वविद्यालय की पूरी भूमिका है। चयन की सभी प्रक्रियाओं में कुलपति शामिल हैं। वह चयन समिति की अध्यक्षता करेंगे। निर्णय लेते समय सभी कुलपतियों से विचार-विमर्श किया है।
इन नियुक्तियों के लिए ये प्रावधान
-कुल सचिव, वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और पुस्तकालयाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सर्च कम सिलेक्शन कमेटी में भी कुलपति की अध्यक्षता का सुझाव।
-हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग जरूरी होने पर लिखित परीक्षा लेंगे, चयन समिति की अध्यक्षता कुलपति करेंगे।
-संबंधित क्षेत्र के दो शैक्षणिक विशेषज्ञ हरियाणा लोक सेवा आयोग नामित करेगा। एक शैक्षणिक विशेषज्ञ हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद की ओर से नामित किया जाएगा और एक विशेषज्ञ कुलाधिपति मनोनीत करेंगे।
-सरकार स्वयं चयन नहीं करेगी, हरियाणा लोक सेवा आयोग और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर रहेगा जिम्मा।