सीएम मनोहर लाल को हुड्डा की चुनौती, बोले- बरोदा से मेरे मुकाबले लड़कर दिखाएं चुनाव
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बरोदा उप चुनाव के मद्देनजर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चुनौती दी है कि वे बरोदा सीट से नामांकन दाखिल कर दें और मैं भी चुनावी मैदान में उतर जाता हूं। जनता किसे चाहती है, इसका फैसला हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि सीएम कहते हैं कि बरोदा में बहुत विकास चल रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार को अपने छह साल के कार्यकाल के बाद पिछले कुछ समय पहले ही बरोदा हलका याद आया। इस हलके विकास को लेकर अब तक सरकार कहां थी।
खैर, कोई बात नहीं उपचुनाव परिणाम आने से सब कुछ पता चल जाएगा। उनके अनुसार बरौदा चुनाव में कांग्रेस का मुददा मौजूदा सरकार की विफलताओं और पूर्व 10 साल की कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों को तक जनता तक पहुंचाना होगा।
पूर्व सीएम ने कहा कि सभी को मालूम है हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर क्या आरोप लगे हैं और नौकरियों में क्या धांधली हुई है। लगे हुए हजारों कर्मचारी निकाल दिए। बर्खास्त पीटीआई आज तक नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह पूरी तरह दिशाहीन सरकार है और सरकार में आपसी समावेश भी नहीं हैं। जिसका उदाहरण पिपली में किसानों में लाठीचार्ज की घटना है।
गठबंधन सरकार का एक दल का नेता कहता है कि यह लाठियां किसानों पर नहीं बल्कि देवीलाल परिवार पर पड़ी है। दूसरे दल का नेता कहता है कि ये दुखद घटना है। मगर सरकार का मंत्री कहता है कि लाठीचार्ज हुआ ही नहीं। बताओ अब यही नहीं मालूम कि सच क्या है? इसलिए मैंने तो पहले ही कहा था कि इस मामले की जांच सीटिंग जज से करवा ली जाए।
हुड्डा ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओपी धनखड़ की किसान ट्रैक्टर रैली पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समझ ही नहीं आया कि ये रैली क्यों निकाली गई और प्रदेशाध्यक्ष ट्रैक्टर पर खड़े होकर क्यों नाच रहे थे? हुड्डा ने कहा इसमें कोई नई बात नहीं है, जब भी किसानों का अहित होता है तो धनखड़ साहब यूं ही नाचते हैं।
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार मंडियों में अनाज की खरीद उचित ढंग से कर रही है। यदि किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिल रहा है। मंडियों में खरीद और उठान प्रक्रिया भी ठीक है तो प्रदेश सरकार यह बता दे कि प्रदेश का किसान अपना कामकाज छोड़कर सड़कों पर धरना-प्रदर्शन क्यों कर रहा है।
कपास, बाजरा और मक्का की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने में नाकाम रही है। मक्के का भाव तो आधा भी नहीं चल रहा। औने-पौने दाम पर किसान अपनी फसल बेचने को मजबूर है। किसान की पिटाई सड़कों पर और फसल की पिटाई मंडियों में हो रही है।
हुड्डा ने कहा कि नए कृषि कानून तो किसान का बर्बादी की ओर ले जाएगा। इसलिए हम यही मांग कर रहे हैं यदि सरकार इन कानूनों पर अडिग है तो चौथा कानून भी लेकर आए। जिसमें ये स्पष्ट हो कि यदि किसान प्राइवेट डीलर को अपनी फसल बेचता है तो प्राइवेट डीलर भी एमएसपी से कम उसकी फसल नहीं खरीदेगा। वरना किसान की लूट शुरू हो जाएगी और धनाढ्य वर्ग इससे और पनपेगा। उन्होंने कहा कि किसान ही नहीं प्रदेश का हर वर्ग सरकार से परेशान है।