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पंजाबः ड्यूटी पर तैनात जवानों को अब सताती है अपनों की चिंता, जिलों में बनेंगे 'होम अवे फ्रॉम होम'

Tue, 21 Apr 2020 12:21 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 21 Apr 2020 12:21 PM IST
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'Home away from home' will be made for police in every district of punjab, coronavirus, lockdown, curfew
अफसरों संग मीटिंग करते डीजीपी दिनकर गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
कोरोना से मुकाबला कर रहे पंजाब पुलिस के जवानों को अपने परिजनों की चिंता भी खाए जा रही है। दो-दो शिफ्ट में ड्यूटी करने के बाद पुलिस के जवान और अधिकारी इस चिंता से अपने घरों को लौटने से झिझक रहे हैं कि उनकी वर्दी से चिपककर कोरोना वायरस उनके घर तक न पहुंच जाए, जहां उनके अपने पूरी तरह महफूज हैं।
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राज्य में पैरा मेडिकल स्टाफ के परिवारों के कोरोना से पीड़ित होने के कई मामले सामने आने के बाद पुलिस के जवानों की चिंता और बढ़ गई है। सोमवार को राज्य के कुछ पुलिस नाकों पर तैनात पुलिस जवानों से बातचीत में उनकी यह चिंता उभर कर सामने आई। कुछ जवानों ने बताया कि उनकी कोशिश होती है कि दिन भर ड्यूटी के दौरान पहनी वर्दी थानों में छोड़कर सादे कपड़ों में घर जाएं ताकि कोई खतरा न हो।
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वहीं, कुछ जवानों ने कहा कि वे खुद को जितना संभव होता है, सैनिटाइज करके ही घर में कदम रखते हैं। पुलिस जवानों में बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने कोविड-19 के खिलाफ अग्रिम पंक्ति में डटे जवानों के लिए उन्हीं जिलों में जहां वे तैनात हैं, ‘होम अवे फ्रॉम होम’ सुविधा स्थापित करने का फैसला किया है। इसके तहत अगर किसी जवान में कोरोना के संदिग्ध लक्षण भी पाए जाते हैं तो उसे उसके घर में क्वारंटीन करने की बजाय स्थापित किए जा रहे क्वारंटीन होम में रखने की व्यवस्था होगी।
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उच्च जोख़िम वाले स्थानों पर ड्यूटी कर रहे सभी पुलिस कर्मचारियों को किसी भी संक्त्रस्मण से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए सभी सुरक्षा उपकरण (फुल बॉडी प्रोटैक्टिक वेयर) जैसे पीपीई किटें, एन-95 मास्क और ट्रिपल लेयर मास्क और दस्ताने मुहैया कराने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।

पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी को हिदायतें दी गई

डीजीपी गुप्ता ने सोमवार को सभी जिला पुलिस प्रमुखों और रेंजों के आईजी-डीआईजी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हालात का जायजा लेने के बाद, सभी पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी को हिदायतें दी गई हैं कि वह अपने जिले में तैनात पुलिस कर्मचारियों में किसी भी फ्लू या कोविड जैसे लक्षणों की जल्द पहचान के लिए प्रभावशाली उपाय करें, ताकि उनकी जल्द देखरेख, इलाज और आराम को यकीनी बनाया जा सके।

वीडियो कांफ्रेंस में स्टेट हैडक्वार्टर के अधिकारियों, 7 एडीजीपी जिन्हें जिला पुलिस के कामकाज और कोविड संकट के मद्देनजऱ लागू कर्फ्यू के अमल की निगरानी करने के लिए पुलिस रेंजों का इंचार्ज बनाया गया है, भी उपस्थित थे। वीडियो कांफ्रेंस में यह फ़ैसला लिया गया कि पुलिस कर्मचारियों, जिनके संक्रमण से प्रभावित होने का शक हो, को एकांतवास के लिए घर भेजकर उनके परिवारों को किसी भी जोख़िम में डालने की बजाय, ऐसे पुलिस कर्मचारियों के लिए जिला होम क्वारंटीन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

इन केंद्रों की स्थापना के लिए प्रत्येक जिले में ज़रूरी स्थानों अथवा इमारतों की पहचान की जाएगी। किसी पुलिस अधिकारी की पहचान एक कोविड पॉज़िटिव मरीज़ के प्राइमरी या सेकेंडरी संपर्क के तौर पर होने पर उसे इन सेंटरों में क्वारेंटीन के अधीन रखा जाएगा। इन सेंटरों का उपयोग उन जवानों के लिए भी किया जाएगा, जिनकी टेस्टिंग हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार है।

सभी सुविधाओं से लैस होंगे ‘होम अवे फ्रॉम होम’

डीजीपी ने कहा कि इन केंद्रों का प्रयोग उच्च जोख़िम वाले संपर्कों के लिए भी किया जाएगा, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद भी 14 दिनों (संपर्क में आने की तारीख़ से) के लिए क्वारेंटीन में रखना ज़रूरी हो। यह सुविधा क्वारंटीन किए गए व्यक्तियों की प्राइमरी ज़रूरतों जैसे रहने, पौष्टिक भोजन का प्रबंध, साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था, नियमित स्वास्थ्य जांच, एमरजेंसी यातायात, एमरजेंसी डॉक्टरी सहायता, मनोरंजन आदि से पूरी तरह लैस होगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला पुलिस के साथ लगाए गए मेडिकल डॉक्टरों को इन सुविधाओं का इंचार्ज बनाया जाएगा और बटालियन में तैनात डॉक्टरों को भी इस उद्देश्य के लिए नामांकित किया जाएगा, ताकि ज़रूरत पडऩे पर उनकी सेवाएं ली जा सकें। इन केंद्रोें में उपयुक्त पैरा-मेडिकल स्टाफ भी होगा। गुप्ता ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो निजी सेक्टर से सहायता ली जा सकती है।

जवानों के सेहत सुरक्षा के लिए कोआर्डिनेटर नामजद
डीजीपी के अनुसार, एडीजीपी वेलफेयर वी. नीरजा को कोविड के विरुद्ध जंग में अगली कतार में डटे पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नियमित निगरानी रखने के लिए राज्य स्तरीय समन्वयक के तौर पर नामज़द किया गया है। वह ‘जिला होम क्वारंटीन सेंटरों’ की स्थापना और कामकाज का भी निरीक्षण करेंगे, जिसकी निगरानी रेंजों और कमिश्नरेट के एडीजीपी और रेंजों के आईजीपी / डीआईजी करेंगे।

प्रत्येक जिला पुलिस प्रमुख राज्य के पुलिस कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के सही तालमेल को यकीनी बनाने के लिए अपने जिले में एक डीएसपी / एसीपी रैंक के अधिकारी को डीएसपी वेलफेयर के तौर पर नियुक्त करेंगे।
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