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पिंजौर यूनिट में 20 माह से अटके हैं 11 करोड़ के मेडिकल बिल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Apr 2016 01:34 AM IST
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हंसराज खेड़ा
- फोटो : अमर उजाला
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एशिया की सबसे बड़ी फाउंडरी वाले सरकारी उपक्रम एमएमटी पिंजौर से अब ट्रैक्टर नहीं, बल्कि ट्रेजेडी निकल रही है। करीब छह दशक पहले जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पिंजौर यूनिट का शुभारंभ किया था तब वर्कशाप समेत ये पूरी यूनिट फुली एयर कंडीशनर थी।
लेकिन 21वीं सदी में जब मेक इन इंडिया का नारा दुनिया में गुंजायमान है तो पिंजौर यूनिट पर काले बादल छाए हुए हैं। जब अमर उजाला ने एचएमटी की पिंजौर यूनिट के अकाउंट ब्रांच से मेडिकल क्लेम बिलों की जानकारी हासिल की तो आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए। पिछले 20 माह से स्टाफ का मेडिकल बिल 11 करोड़ रुपये से अधिक अटका हुआ है।
इनमें लगभग छह करोड़ रुपये के बिल जानलेवा रोग कैंसर, किडनी और हार्ट जैसे रोगों से ग्रस्त स्टाफ और परिजनों के हैं। वहीं लगभग चार करोड़ से अधिक के बिल उन मरीजों के हैं, जो सामान्य रोग ग्रस्त हैं। बता दें कि एचमटी के पूरे स्टाफ का मासिक वेतन करीब 7 करोड़ रुपये बनता है। जिसका पिछले 20 माह का टोटल जोड़ करीब 150 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है।
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सामान्य केसों का मेडिकल क्लेम है पांच करोड़ बकाया
एमएमटी से प्राप्त अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल ट्रैक्टर ब्रांच के स्टाफ का प्रति माह का मेडिकल बिल 18 से 20 लाख रुपये बनता हैं। यानी पिछले 20 महीनों मेें इन मेडिकल बिलों का कुल योग करीब करीब 4 करोड़ रुपये बनता है। वहीं मशीन टूल ब्रांच में कार्यरत स्टाफ के मेडिकल क्लेम बिल 3 से चार लाख रुपये है। कुल क्लेम 80 लाख रुपये बनता है।
घातक रोग ग्रस्त का छह करोड़ मेडिकल क्लेम
एमएमटी के एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले मंगलवार को एचएमटी के एक कर्मचारी धर्मपाल की मौत किडनी का इलाज कराते समय हुई थी। लेकिन इलाज के लिए एचएमटी की ओर से उसे कोई सहयोग नहीं मिला था। उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। धर्मपाल जैसे अनेक केस हैं, जिनके मेडिकल क्लेम 25 से 30 लाख रुपये के बिल हर माह एचएमटी अकाउंट ब्रांच में अप्रूवल के लिए जमा होते हैं।
वह दौर भी था जब फिल्म स्टार करते थे ब्रांडिंग: हंसराज
पिंजौर यूनिट के कर्मचारी हंसराज खेड़ा ने बताया कि एक दौर वह भी था जब फिल्म स्टार इसके प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करते थे। लेकिन ब्रांड ऐसा पिटा कि आज इस ब्रांडिंग पर पैसा खर्च करना तो दूर स्टाफ को देने के लिए पगार तक नहीं है।
HMT सुसाइड केस: मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
एचएमटी के स्टाफ के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार,प्रताड़ना की शिकायत स्थानीय अधिवक्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को की है। एडवोकेट पंकज चांदगोटिया के मुताबिक पिंजौर स्थित एचएमटी यूनिट में पिछले दिनों ज्वाइंट जनरल मैनेजर कंवलजीत सिंह नागी को जिन हालात में सुसाइड करने के लिए मजबूर होना पड़ा,उन सबके के लिए एचएमटी जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय भारी मंत्रालय की अनदेखी के चलते इस यूनिट के कर्मचारियों को 20 माह से वेतन नहीं मिला। रोगों की चपेट में आए कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्यों के पास इलाज तक के लिए पैसे नहीं। इसकी वजह से एमएमटी के कुछ कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत तक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस यूनिट के रिवाइवल के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा करनी चाहिए,क्योंकि इस यूनिट के दम पर आसपास क्षेत्र में स्थित छोटे उद्योगों की इकाइयां का भविष्य भी टिका है।
उन्होंने शिकायत में यह भी शंका जताई है कि जान बूझकर इस यूनिट को बीमारू घोषित करने का प्रयास हो रहा है,क्योंकि यूनिट के पास अपनी करीब एक हजार एकड़ भूमि है,जिसमें से 50 प्रतिशत से अधिक भूमि पर अभी तक कोई निर्माण नहीं हुआ है।
उन्होंने शंका जताई कि यूनिट को बंद करके इस भूमि को किसी अन्य काम के लिए इस्तेमाल करने का भी यह प्रयास हो सकता है,जबकि ऐसा करना मेक इन इंडिया अभियान के लिए घातक होगा। उन्होंने इस शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री,अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एचएमटी लिमिटेड बैग्लोर,सचिव भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय उद्योग भवन नई दिल्ली को भी भेजी है।
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लेकिन 21वीं सदी में जब मेक इन इंडिया का नारा दुनिया में गुंजायमान है तो पिंजौर यूनिट पर काले बादल छाए हुए हैं। जब अमर उजाला ने एचएमटी की पिंजौर यूनिट के अकाउंट ब्रांच से मेडिकल क्लेम बिलों की जानकारी हासिल की तो आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए। पिछले 20 माह से स्टाफ का मेडिकल बिल 11 करोड़ रुपये से अधिक अटका हुआ है।
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इनमें लगभग छह करोड़ रुपये के बिल जानलेवा रोग कैंसर, किडनी और हार्ट जैसे रोगों से ग्रस्त स्टाफ और परिजनों के हैं। वहीं लगभग चार करोड़ से अधिक के बिल उन मरीजों के हैं, जो सामान्य रोग ग्रस्त हैं। बता दें कि एचमटी के पूरे स्टाफ का मासिक वेतन करीब 7 करोड़ रुपये बनता है। जिसका पिछले 20 माह का टोटल जोड़ करीब 150 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है।
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सामान्य केसों का मेडिकल क्लेम है पांच करोड़ बकाया
एमएमटी से प्राप्त अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल ट्रैक्टर ब्रांच के स्टाफ का प्रति माह का मेडिकल बिल 18 से 20 लाख रुपये बनता हैं। यानी पिछले 20 महीनों मेें इन मेडिकल बिलों का कुल योग करीब करीब 4 करोड़ रुपये बनता है। वहीं मशीन टूल ब्रांच में कार्यरत स्टाफ के मेडिकल क्लेम बिल 3 से चार लाख रुपये है। कुल क्लेम 80 लाख रुपये बनता है।
घातक रोग ग्रस्त का छह करोड़ मेडिकल क्लेम
एमएमटी के एक उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले मंगलवार को एचएमटी के एक कर्मचारी धर्मपाल की मौत किडनी का इलाज कराते समय हुई थी। लेकिन इलाज के लिए एचएमटी की ओर से उसे कोई सहयोग नहीं मिला था। उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। धर्मपाल जैसे अनेक केस हैं, जिनके मेडिकल क्लेम 25 से 30 लाख रुपये के बिल हर माह एचएमटी अकाउंट ब्रांच में अप्रूवल के लिए जमा होते हैं।
वह दौर भी था जब फिल्म स्टार करते थे ब्रांडिंग: हंसराज
पिंजौर यूनिट के कर्मचारी हंसराज खेड़ा ने बताया कि एक दौर वह भी था जब फिल्म स्टार इसके प्रोडक्ट की ब्रांडिंग करते थे। लेकिन ब्रांड ऐसा पिटा कि आज इस ब्रांडिंग पर पैसा खर्च करना तो दूर स्टाफ को देने के लिए पगार तक नहीं है।
HMT सुसाइड केस: मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
एचएमटी के स्टाफ के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार,प्रताड़ना की शिकायत स्थानीय अधिवक्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को की है। एडवोकेट पंकज चांदगोटिया के मुताबिक पिंजौर स्थित एचएमटी यूनिट में पिछले दिनों ज्वाइंट जनरल मैनेजर कंवलजीत सिंह नागी को जिन हालात में सुसाइड करने के लिए मजबूर होना पड़ा,उन सबके के लिए एचएमटी जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय भारी मंत्रालय की अनदेखी के चलते इस यूनिट के कर्मचारियों को 20 माह से वेतन नहीं मिला। रोगों की चपेट में आए कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्यों के पास इलाज तक के लिए पैसे नहीं। इसकी वजह से एमएमटी के कुछ कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत तक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस यूनिट के रिवाइवल के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा करनी चाहिए,क्योंकि इस यूनिट के दम पर आसपास क्षेत्र में स्थित छोटे उद्योगों की इकाइयां का भविष्य भी टिका है।
उन्होंने शिकायत में यह भी शंका जताई है कि जान बूझकर इस यूनिट को बीमारू घोषित करने का प्रयास हो रहा है,क्योंकि यूनिट के पास अपनी करीब एक हजार एकड़ भूमि है,जिसमें से 50 प्रतिशत से अधिक भूमि पर अभी तक कोई निर्माण नहीं हुआ है।
उन्होंने शंका जताई कि यूनिट को बंद करके इस भूमि को किसी अन्य काम के लिए इस्तेमाल करने का भी यह प्रयास हो सकता है,जबकि ऐसा करना मेक इन इंडिया अभियान के लिए घातक होगा। उन्होंने इस शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री,अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एचएमटी लिमिटेड बैग्लोर,सचिव भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय उद्योग भवन नई दिल्ली को भी भेजी है।