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Panchkula News: मेडिकल विद्यार्थियों के लिए संपत्ति संबंधी वित्तीय स्थिरता दस्तावेजों की अनिवार्यता पर हाईकोर्ट की रोक

Thu, 25 Sep 2025 04:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Sep 2025 04:26 AM IST
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High Court stays mandatory financial stability documents for medical students
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एमबीबीएस और बीडीएस विद्यार्थियों पर अनिवार्य सेवा बांड लागू करने के पंजाब सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले मेडिकल उम्मीदवारों को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने संपत्ति संबंधी वित्तीय स्थिरता प्रमाण पत्र की अतिरिक्त आवश्यकता पर रोक लगाते हुए इसे अनुचित बताया है।
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हाईकोर्ट में अब याचिका पर 3 नवंबर को सुनवाई होगी। प्रिशा तनेजा और अन्य सहित याचिकाकर्ताओं ने पंजाब के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा 13 जून, 2025 को जारी एक शुद्धिपत्र के खिलाफ अदालत का रुख किया था। शुद्धिपत्र में अखिल भारतीय कोटे के विद्यार्थियों के लिए एक वर्ष और राज्य कोटे के विद्यार्थियों के लिए दो वर्ष सरकारी सेवा में सेवा करना अनिवार्य किया गया था, अन्यथा विद्यार्थियों को 20 लाख रुपये का भुगतान करने की शर्त रखी गई थी।
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2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए 15 जुलाई के प्रोस्पेक्टस में यह शर्त शामिल की गई थी जिसका विद्यार्थियों ने विरोध किया और इसे मनमाना, बोझिल और भेदभावपूर्ण बताया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित झांजी ने तर्क दिया कि विद्यार्थी आवश्यक बांड और अंडरटेकिंग जमा करने को तैयार थे लेकिन संपत्ति संबंधी वित्तीय स्थिरता प्रमाण पत्र की मांग करने वाला अतिरिक्त खंड विश्वविद्यालय के पक्ष में पारिवारिक संपत्ति को बंधक बनाने का प्रावधान करता है। पीठ ने प्रथम दृष्टया तर्क में दम पाया और राज्य को स्टांप पेपर पर संपत्ति संबंधी वित्तीय वित्तीय स्थिरता प्रमाण पत्र पर जोर न देने का निर्देश दिया।
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याचिका में अनिवार्य बांड लगाने को भी चुनौती दी गई है। इसमें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की सिफारिशों का हवाला दिया गया है, जो ऐसी सेवा शर्तों को अनिवार्य नहीं बनाती हैं। इसमें तर्क दिया गया है कि यह बांड विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और उनके कॅरिअर की दहलीज पर उन पर अनुचित वित्तीय बोझ डालता है।
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