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High Court: सैन्य अधिकारी की विधवा की नहीं मिलेगी उदार पेंशन, हाईकोर्ट ने मांग को किया खारिज, ये है वजह

Sun, 13 Oct 2024 02:36 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 13 Oct 2024 02:36 PM IST
सार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सैन्य अधिकारी की विधवा को उदार पेंशन देने की याचिका को खारिज कर दिया है। सेना के नियमों के अनुसार तीन तरह की पेंशन होती है।

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High Court rejects demand for pension of army officer widow after 10 years
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सैन्य अधिकारी की विधवा की याचिका खारिज कर दी है। इसमें उसने उदार पारिवारिक पेंशन की मांग की थी, क्योंकि यह पेंशन आवेदन अधिकारी की मृत्यु के 10 वर्ष से अधिक समय बाद दाखिल किया गया था जबकि आवेदन दाखिल करने की समय सीमा मृत्यु के तीन वर्ष तक सीमित थी। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि सक्षम न्यायिक मंच के समक्ष समय पर अपना पक्ष रखने में संबंधित पक्ष की ओर से स्पष्ट रूप से घोर विफलता रही है। परिणामस्वरूप उक्त विलंब ने संबंधित प्रस्ताव को विलंब और लापरवाही के दोष से भर दिया है। यह याचिका 2009 में भारत-चीन सीमा के पास तैनात एक सैन्य अधिकारी नायक सुरेंद्र कुमार की विधवा द्वारा दायर की गई थी। सुरेंद्र कुमार एक जंगल की भीषण आग को बुझाने में नागरिक प्रशासन और सैन्य अधिकारियों की मदद करते समय एक जले हुए पेड़ के गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई थी।
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कुमार को सिर में गंभीर चोटें आईं थीं, साथ ही हृदय-श्वसन तंत्र भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके कारण उन्हें युद्ध हताहत घोषित किया गया था। सोलन निवासी चंपा ठाकुर द्वारा दायर याचिका में उस आदेश को खारिज करने की मांग की गई थी, जिसके तहत सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने कहा था कि कुमार की पत्नी आजीवन विशेष पारिवारिक पेंशन के बजाय उदारीकृत पारिवारिक पेंशन की हकदार हैं, लेकिन यह 2019 में आवेदन दाखिल करने की तारीख से तीन साल पहले तक सीमित है।
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दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि मृतक अधिकारी की विधवा को अग्निशमन अभियान के दौरान लगी घातक चोट के संबंध में तुरंत सूचना दी गई थी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता पत्नी को उक्त तुरंत सूचना देने के बावजूद वह संबंधित पेंशन लाभों के संबंध में बंदोबस्त से संबंधित दावे पर सो रही है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता के पति का मामला सरकार की नीति की श्रेणी ई के अंतर्गत आता है, न कि श्रेणी डी के अंतर्गत और इसलिए तीन साल का प्रतिबंध लागू नहीं होगा। नीति का अध्ययन करने के बाद हाईकोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए याचिका खारिज कर दी।
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सेना के नियमों के अनुसार तीन तरह की पेंशन होती है पहली सामान्य फैमिली पेंशन। यह उस स्थिति में मिलती है जब किसी बीमारी की वजह से या सामान्य स्थिति में सैनिक की मौत होती है। यह आखिरी सैलरी का 30 फीसदी होता है। दूसरी पेंशन है स्पेशल फैमिली पेंशन। यह उस स्थिति में मिलती है जब सैनिक की ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी की वजह से मौत होती है। यह सैलरी का 60 परसेंट होता है। तीसरी पेंशन होती है उदार पारिवारिक पेंशन। यह लड़ाई कैजुअल्टी होने पर मिलती है। यह सैलरी का 100 परसेंट होती है।
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