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Panchkula News: बीआरओ कर्मियों को सेना के समान वेतन जारी करने के निर्देश से हाईकोर्ट का इन्कार
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चंडीगढ़। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कर्मियों को सेना के समान वेतन देने का निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि नियम बनाने का काम विधायिका का है, हमारा इसमें दखल सही नहीं है।
बठिंडा निवासी अभिमन्यु कुमार और अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट से केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था कि वह बीआरओ कर्मियों के वेतन और सेवा नियमों को सेना कर्मियों के बराबर बनाए। याची पक्ष की दलील थी कि उनकी सेवा की शर्तें सेना कर्मचारियों के बराबर होनी चाहिए क्योंकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सेना अधिनियम, 1950 के अनुसार की जाती है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम सेना के कर्मचारियों के समान सेवा नियम बनाने का निर्देश नहीं दे सकते। संघ या राज्य विधायिका को याचिकाकर्ता की सुविधा और आवश्यकता के अनुसार नियम और विनियम बनाने के लिए नहीं कहा जा सकता। विधायिका का काम उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए और न्यायालय को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। हमारा काम कानून की व्याख्या करना है और यदि कानून संविधान के खिलाफ हो केवल तब ही उसमें दखल देना है।
बीआरओ में रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के तहत सीमा सड़क विंग और जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (जीआरईएफ) शामिल हैं। बीआरओ या जीआरईएफ में अधिकारियों का चयन यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) परीक्षा के माध्यम से किया जाता है और उन्हें सेना के इंजीनियर कोर से प्रतिनियुक्ति पर भी लिया जाता है। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे अपनी मांग के लिए अपने अधिकारियों या सरकार से आग्रह करें।
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बठिंडा निवासी अभिमन्यु कुमार और अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट से केंद्र सरकार को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था कि वह बीआरओ कर्मियों के वेतन और सेवा नियमों को सेना कर्मियों के बराबर बनाए। याची पक्ष की दलील थी कि उनकी सेवा की शर्तें सेना कर्मचारियों के बराबर होनी चाहिए क्योंकि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सेना अधिनियम, 1950 के अनुसार की जाती है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम सेना के कर्मचारियों के समान सेवा नियम बनाने का निर्देश नहीं दे सकते। संघ या राज्य विधायिका को याचिकाकर्ता की सुविधा और आवश्यकता के अनुसार नियम और विनियम बनाने के लिए नहीं कहा जा सकता। विधायिका का काम उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए और न्यायालय को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। हमारा काम कानून की व्याख्या करना है और यदि कानून संविधान के खिलाफ हो केवल तब ही उसमें दखल देना है।
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बीआरओ में रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के तहत सीमा सड़क विंग और जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (जीआरईएफ) शामिल हैं। बीआरओ या जीआरईएफ में अधिकारियों का चयन यूपीएससी द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) परीक्षा के माध्यम से किया जाता है और उन्हें सेना के इंजीनियर कोर से प्रतिनियुक्ति पर भी लिया जाता है। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे अपनी मांग के लिए अपने अधिकारियों या सरकार से आग्रह करें।
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