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शवों की अदला बदली मामले में डीएनए टेस्ट से हाईकोर्ट ने किया इनकार, जानिए क्या था मामला
Thu, 30 Jul 2020 02:49 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 02:49 PM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल द्वारा कोरोना पॉजिटिव मरीज प्रीतम सिंह के स्थान पर महिला का शव भेजने के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक की अस्थियों का अब डीएनए टेस्ट संभव नहीं है। लिहाजा हाईकोर्ट ने अब इस मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच की स्टेटस रिपोर्ट 7 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई पर पेश करने के पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं।
बुधवार को मृतक प्रीतम सिंह के बेटों ने कहा कि इस पूरे मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। ऐसे में बेहतर होगा कि एसआईटी गठित कर जांच करवाई जाए और जिसकी समय सीमा तय हो। जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अब तक इस मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही जांच को देख लें फिर उसके बाद आगे निर्देश दिए जा सकते हैं।
पिछली सुनवाई पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और असिस्टेंट कमिश्नर ने अपना जवाब दायर कर स्वीकार कर लिया था कि प्रीतम सिंह की मृत्यु हो चुकी है और शव का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है और अब अस्थियां प्रशासन के पास सुरक्षित हैं। इस जानकारी के बाद याचिकाकर्ता जो मृतक के बेटे हैं, उनके वकील सतिंदरदीप सिंह बोपाराय ने कहा था कि पहले शव बदले जा चुके हैं।
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ऐसे में उन्हें कैसे विश्वास हो कि अस्थियां याचिकाकर्ताओं के पिता की हैं। ऐसे में बेहतर होगा की पहले अस्थियों का डीएनए परीक्षण किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो जाए की अस्थियां प्रीतम सिंह की ही हैं।
यह था मामला
मृतक प्रीतम सिंह के बेटों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि मुकेरियां निवासी प्रीतम सिंह उनके पिता हैं। वे 1 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। पहले उन्हें होशियारपुर के रयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी में बने कोरोना आइसोलेशन सेंटर में एडमिट करवाया गया था और बाद में अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया।
18 जुलाई को उन्हें मैसेज मिला कि उनके पिता की 17 जुलाई रात 11 बजे मृत्यु हो गई है। मृत्यु के बाद जब उनके पिता के शव को एंबुलेंस के जरिये मुकेरियां भेजा गया तो वहां पता चला कि शव उनके पिता का नहीं बल्कि किसी महिला का था। इसका खुलासा होने के बाद महिला का शव मुकेरियां की मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया।
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बुधवार को मृतक प्रीतम सिंह के बेटों ने कहा कि इस पूरे मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। ऐसे में बेहतर होगा कि एसआईटी गठित कर जांच करवाई जाए और जिसकी समय सीमा तय हो। जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अब तक इस मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही जांच को देख लें फिर उसके बाद आगे निर्देश दिए जा सकते हैं।
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पिछली सुनवाई पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और असिस्टेंट कमिश्नर ने अपना जवाब दायर कर स्वीकार कर लिया था कि प्रीतम सिंह की मृत्यु हो चुकी है और शव का अंतिम संस्कार भी किया जा चुका है और अब अस्थियां प्रशासन के पास सुरक्षित हैं। इस जानकारी के बाद याचिकाकर्ता जो मृतक के बेटे हैं, उनके वकील सतिंदरदीप सिंह बोपाराय ने कहा था कि पहले शव बदले जा चुके हैं।
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ऐसे में उन्हें कैसे विश्वास हो कि अस्थियां याचिकाकर्ताओं के पिता की हैं। ऐसे में बेहतर होगा की पहले अस्थियों का डीएनए परीक्षण किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो जाए की अस्थियां प्रीतम सिंह की ही हैं।
यह था मामला
मृतक प्रीतम सिंह के बेटों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया है कि मुकेरियां निवासी प्रीतम सिंह उनके पिता हैं। वे 1 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। पहले उन्हें होशियारपुर के रयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी में बने कोरोना आइसोलेशन सेंटर में एडमिट करवाया गया था और बाद में अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया।
18 जुलाई को उन्हें मैसेज मिला कि उनके पिता की 17 जुलाई रात 11 बजे मृत्यु हो गई है। मृत्यु के बाद जब उनके पिता के शव को एंबुलेंस के जरिये मुकेरियां भेजा गया तो वहां पता चला कि शव उनके पिता का नहीं बल्कि किसी महिला का था। इसका खुलासा होने के बाद महिला का शव मुकेरियां की मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया।