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हाईकोर्ट का आदेश- अवैध खनन पर ड्रोन से रखो नजर, फिर भी नहीं रुका तो नपेंगे अफसर
Sat, 12 Sep 2020 01:20 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2020 01:20 PM IST
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illegal mining
- फोटो : amar ujala
पंजाब में अवैध खनन पर चिंता जताते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अब नदियों के तल पर 3 मीटर से ज्यादा गहरे खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग और बड़े पुलों के एक किमी तथा प्रदेश राजमार्ग व छोटे पुलों की आधा किमी परिधि में भी खनन पर पूर्ण रोक रहेगी। इसके अलावा पंजाब सरकार को अवैध खनन पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन तथा उड़नदस्तों की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं।
उच्च न्यायालय ने जालंधर के स्थानीय निवासियों द्वारा सतलुज नदी के पास हो रहे अवैध खनन को लेकर दायर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा तथा न्यायमूर्ति हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने कहा कि पंजाब में लगातार अवैध खनन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिस पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है। खासतौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रदेश राजमार्ग, छोटे तथा बड़े पुलों के नजदीक हो रहे अवैध खनन इनके लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं। इस टिप्पणी के साथ ही खंडपीठ ने इनके निकट होने वाले खनन पर पूर्ण रोक लगा दी है।
साथ ही जालंधर, लुधियाना और नवांशहर के एसएसपी को आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें की उनके क्षेत्राधिकार में कहीं अवैध खनन न होने पाए। उच्च न्यायालय ने कहा कि अवैध खनन के कारण पर्यावरण संतुलन का ढांचा डगमगाता जा रहा है। धड़ल्ले से मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है जिसके कारण नदियों ने अपना प्राकृतिक रास्ता बदलना आरंभ कर दिया है। भारी मशीनों के कारण नदियों का संतुलन भी बिगड़ गया है। ऐसे में प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय ने 3 मीटर से अधिक खनन तथा भारी मशीनों से खनन करने पर रोक लगा दी है।
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फिर भी न रुका अवैध खनन तो अफसरों पर होगी कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने कहा कि वैसे तो निगरानी के नाम पर राज्य सरकार के पास पूरी व्यवस्था है, लेकिन बावजूद इसके अवैध खनन रुक नहीं रहा है। अवैध खनन पर निगरानी रखने तथा कार्रवाई करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जो आज के संदर्भ में कारगर हो। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को अवैध खनन पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन तथा उड़न दस्तों की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि इतनी व्यवस्थाओं के बावजूद अवैध खनन जारी रहता है तो अधिकारी अपने ऊपर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उच्च न्यायालय ने जालंधर, लुधियाना और नवां शहर के डीसी को कार्रवाई कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।
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उच्च न्यायालय ने जालंधर के स्थानीय निवासियों द्वारा सतलुज नदी के पास हो रहे अवैध खनन को लेकर दायर याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा तथा न्यायमूर्ति हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने कहा कि पंजाब में लगातार अवैध खनन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिस पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है। खासतौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रदेश राजमार्ग, छोटे तथा बड़े पुलों के नजदीक हो रहे अवैध खनन इनके लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं। इस टिप्पणी के साथ ही खंडपीठ ने इनके निकट होने वाले खनन पर पूर्ण रोक लगा दी है।
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साथ ही जालंधर, लुधियाना और नवांशहर के एसएसपी को आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें की उनके क्षेत्राधिकार में कहीं अवैध खनन न होने पाए। उच्च न्यायालय ने कहा कि अवैध खनन के कारण पर्यावरण संतुलन का ढांचा डगमगाता जा रहा है। धड़ल्ले से मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा है जिसके कारण नदियों ने अपना प्राकृतिक रास्ता बदलना आरंभ कर दिया है। भारी मशीनों के कारण नदियों का संतुलन भी बिगड़ गया है। ऐसे में प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय ने 3 मीटर से अधिक खनन तथा भारी मशीनों से खनन करने पर रोक लगा दी है।
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फिर भी न रुका अवैध खनन तो अफसरों पर होगी कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने कहा कि वैसे तो निगरानी के नाम पर राज्य सरकार के पास पूरी व्यवस्था है, लेकिन बावजूद इसके अवैध खनन रुक नहीं रहा है। अवैध खनन पर निगरानी रखने तथा कार्रवाई करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जो आज के संदर्भ में कारगर हो। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को अवैध खनन पर निगरानी रखने के लिए ड्रोन तथा उड़न दस्तों की व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि इतनी व्यवस्थाओं के बावजूद अवैध खनन जारी रहता है तो अधिकारी अपने ऊपर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उच्च न्यायालय ने जालंधर, लुधियाना और नवां शहर के डीसी को कार्रवाई कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।