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एचपीएससी भर्ती फर्जीवाड़े में फंसे नागर निलंबित

Sat, 27 Nov 2021 08:03 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 08:03 PM IST
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HCS Anil Nagar suspended in HPSC recruitment fraud
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने एचपीएससी भर्ती फर्जीवाड़े में फंसे एचसीएस अनिल नागर को निलंबित कर दिया है। मुख्य सचिव कार्यालय ने इसके लिखित आदेश तो अभी तक सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन आरोपी अधिकारी गिरफ्तारी के दिन 18 नवंबर से निलंबित माना जाएगा। एचसीएस सिविल लिस्ट हरियाणा में सरकार ने उनका निलंबन दिखा दिया है।
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मामले की जांच कर रही विजिलेंस को भर्तियों के अंकों में किए जाने वाले फर्जीवाड़ा के मुख्य सरगना की अब भी तलाश है। जांच अधिकारी सभी कड़ियों को जोड़ रहे हैं। एचपीएससी के उप सचिव के अलावा 2016 बैच के एचसीएस नागर के पास हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग के सचिव व केश कला बोर्ड का जिम्मा भी था। विजिलेंस नागर व अन्य आरोपियों के खिलाफ मजबूत आरोप पत्र तैयार कर रही है। उनके पास से विभिन्न भर्तियों में अभ्यर्थियों को पास कराने के बदले ली गई तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद की जा चुकी है।
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नागर लंबे फेर में फंस चुके हैं। भर्ती फर्जीवाड़े में उनके ऊपर अदालत में आरोप सिद्घ होते हैं तो उनकी बर्खास्तगी भी तय है। प्रदेश सरकार को उन पर अगली कार्रवाई के लिए अब अदालत के फैसले का इंतजार रहेगा। विजिलेंस ब्यूरो के डीजी शत्रुजीत कपूर व उनकी टीम इस मामले में सभी जरूरी तथ्य जुटा रही है ताकि अदालत में मुंह की न खानी पड़े।
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अनिल नागर की अपनी भर्ती पर चल रहा कोर्ट केस
अनिल नागर जिस भर्ती के जरिये एचसीएस बने थे, वह भी विवादों में है। चौटाला सरकार में 2004 में संपन्न हुई भर्ती प्रक्रिया में चयनित अभ्यर्थियों को पूर्व हुड्डा सरकार ने नियुक्ति नहीं दी थी। पूर्व भाजपा सरकार ने 2016 में 102 उम्मीदवारों में से 38 को ज्वाइन करवाया था। इनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। वर्तमान में पानीपत के तहसीलदार कुलदीप मलिक सहित 22 चयनित उम्मीदवारों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हुए हैं। जिन 38 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे, उनमें एचसीएस कार्यकारी शाखा के 23 चयनित उम्मीदवार शामिल थे। उनमें से 19 ने ही ज्वाइन किया था।

सरकार जल्द अदालत में देगी जवाब
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि 38 अभ्यर्थियों की तर्ज पर ही उन्हें भी एचसीएस कार्यकारी शाखा में 2016 से नियुक्ति प्रदान की जाए। अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार से जवाब मांगा हुआ है। जिस पर अगली सुनवाई जल्द होनी है। सरकार अदालत को बताएगी कि 38 अभ्यर्थियों को किस आधार पर नियुक्ति दी गई। अगर नियुक्ति सही नहीं है तो क्या कार्रवाई की जा रही है।
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