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एक ही भर्ती में नियुक्ति के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाने पर हरियाणा सरकार को फटकार
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चंडीगढ़। हरियाणा में 5 हजार सिपाहियों की भर्ती में नियुक्ति के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी प्रदीप ने एडवोकेट मजलिज खान के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि 2015 में हरियाणा सरकार ने सिपाही के 5 हजार पदों के लिए भर्ती निकाली थी।
इस भर्ती में 500 पद बीसी-सी श्रेणी के लिए आरक्षित थे। हाईकोर्ट द्वारा बीसी-सी वर्ग को दिए गए आरक्षण पर रोक के कारण इन पदों को सामान्य श्रेणी में बदल दिया गया। इसके बाद सामान्य श्रेणी की नई मेरिट सूची तैयार की गई। नई सूची तैयार होने के बाद इस सूची में चयनित अंतिम उम्मीदवार से अधिक अंक लेने वाले आरक्षित वर्ग के आवेदकों को सामान्य श्रेणी में डाल दिया गया और आरक्षित वर्ग में सीटें रिक्त हो गई। इसके बाद कुछ लोगों के ज्वाइन न करने और कुछ के नौकरी छोड़ देने के कारण 269 सीटें रिक्त रह गईं। हरियाणा सरकार ने इस सीटों पर केवल सामान्य वर्ग के आवेदकों को स्थान देने का फैसला लिया है। याची ने कहा कि जब 500 पदों को भरना था तो सामान्य प्रक्रिया का इस्तेमाल हुआ जबकि इस बार सामान्य श्रेणी के आवेदकों को प्रक्रिया में स्थान देकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट नहीं तैयार की गई। यदि ऐसा होता तो आरक्षित वर्ग के व्यक्तियों को भी सामान्य श्रेणी में स्थान मिलता और आरक्षित श्रेणी में पद रिक्त होते और याची को स्थान मिल जाता। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
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इस भर्ती में 500 पद बीसी-सी श्रेणी के लिए आरक्षित थे। हाईकोर्ट द्वारा बीसी-सी वर्ग को दिए गए आरक्षण पर रोक के कारण इन पदों को सामान्य श्रेणी में बदल दिया गया। इसके बाद सामान्य श्रेणी की नई मेरिट सूची तैयार की गई। नई सूची तैयार होने के बाद इस सूची में चयनित अंतिम उम्मीदवार से अधिक अंक लेने वाले आरक्षित वर्ग के आवेदकों को सामान्य श्रेणी में डाल दिया गया और आरक्षित वर्ग में सीटें रिक्त हो गई। इसके बाद कुछ लोगों के ज्वाइन न करने और कुछ के नौकरी छोड़ देने के कारण 269 सीटें रिक्त रह गईं। हरियाणा सरकार ने इस सीटों पर केवल सामान्य वर्ग के आवेदकों को स्थान देने का फैसला लिया है। याची ने कहा कि जब 500 पदों को भरना था तो सामान्य प्रक्रिया का इस्तेमाल हुआ जबकि इस बार सामान्य श्रेणी के आवेदकों को प्रक्रिया में स्थान देकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट नहीं तैयार की गई। यदि ऐसा होता तो आरक्षित वर्ग के व्यक्तियों को भी सामान्य श्रेणी में स्थान मिलता और आरक्षित श्रेणी में पद रिक्त होते और याची को स्थान मिल जाता। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
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