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कूड़ा घोटाला : एसीबी ने की एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश, शहरी स्थानीय निकाय विभाग आठ माह बाद भी मौन

Mon, 18 Mar 2024 03:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2024 03:11 AM IST
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Garbage Scam: ACB recommends registering FIR, Urban Local Bodies Department silent even after eight months
कूड़ा प्रोसेस करने की क्षमता 600 की जगह कागजों में दिखाई 1200 मीट्रिक टन, नहीं मिला कोई रिकार्ड
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-23 डंपिंग ग्राउंड की कूड़ा प्रोसेसिंग के टेंडर में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो को कई तरह की खामियां मिली थीं। इसकी जांच के बाद सरकार को भेजी रिपोर्ट में एसीबी ने एफआईआर दर्ज करने की जुलाई 2023 में सिफारिश की थी, लेकिन कचरे के एक-एक कतरे का हिसाब रखने वाले शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारी आठ माह बाद भी मौन हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता पंचकूला विकास मंच के पदाधिकारियों ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री नायब सैनी को ट्वीट कर मामले की सूचना देकर कार्रवाई की उम्मीद जताई है। दरअसल नगर निगम के प्लांट की क्षमता 600 की जगह कागजों में 1200 मीट्रिक टन दिखाया गया। जहां कूड़े की प्रोसेसिंग होती है, वहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे, न कूड़े का आकलन और न ही काम समय पर पूरा हुआ।

एसीबी की रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा
- सेक्टर-23 की डंपिंग ग्राउंड में कितना कूड़ा था, प्रोसेसिंग से पहले उसे मापने के लिए कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया।
- रोजाना मॉनीटरिंग के लिए कूड़ा निस्तारण करने वाली एजेंसी ने कोई मैकेनिज्म नहीं बनाया।
- फरवरी 2021 तक डंपिंग साइट पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए। इसके बाद सीसीटीवी कैमरे लगाया गया, लेकिन कैमरे का फेस वजन करने वाली मशीन की तरफ नहीं रखा।
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- पिछले सीसीटीवी कैमरे का कोई बैकअप नहीं था।
- 24 घंटे में प्लांट की क्षमता 400 से 500 टन के बीच थी, लेकिन रोजाना 600 से 700 कूड़े का आवक दिखाया गया।
- रोजाना कितना कूड़ा आया और कितने का प्रोसेसिंग हुआ, इसका कोई रिकार्ड नहीं था।
- प्लांट साइट पर कोई भी प्रवेश और निकासी द्वार नहीं था।

एसीबी ने जांच के बाद केस दर्ज करने की अनुमति मांगी
पंचकूला विकास मंच के पदाधिकारी देवराज शर्मा और राकेश अग्रवाल ने नगर निगम कमिश्नर को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया कि 2018 में 32 करोड़ में सेक्टर-23 के डंपिंग ग्राउंड में इकट्ठा हुए कचरे का प्रोसेसिंग और उठाए जाने का ठेका दिया गया था। ठेकेदार को काम देने के बाद कितना कचरा प्रोसेस किया गया। कितना कचरा उठाया गया और कितना पैसा कैसे-कैसे किस-किस काम का दिया गया था। इसकी जानकारी मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मंच ने मई 2023 में दूसरी शिकायत एसीबी को दी। उसके बाद एसीबी ने जांच कर केस दर्ज करने की अनुमति मांगी।
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विभाग के एसीएस के पास कोई जवाब नहीं
हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के एसीएस विकास गुप्ता ने कूड़ा प्रोसेसिंग के नगर निगम की टेंडर में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो को कई तरह की खामियों और सरकार को भेजी जांच रिपोर्ट में एसीबी ने एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की की पूरी बात सुनी, लेकिन इस पर उन्होंने इसपर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
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