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Panchkula News: सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल की हिट-एंड-रन में मौत के मामले में चार दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं

Wed, 14 Jan 2026 02:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 02:33 AM IST
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Four days after the hit-and-run death of a retired lieutenant general, no arrest has been made.
चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस नहीं पकड़ पाई चालक, सीसीटीवी फुटेज और संभावित रास्तों की जांच जारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। एमडीसी में भारतीय सेना के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल कुलवंत सिंह मान की 10 जनवरी को हुई हिट-एंड-रन दुर्घटना में मौत के चार दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक आरोपी वाहन चालक को नहीं पकड़ पाई है। मामला न केवल सैन्य परिवारों बल्कि शहरवासियों को झकझोर कर रख गया है।
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-4 मनसा देवी कॉम्प्लेक्स, पंचकूला निवासी 83 वर्षीय सुखजीवन कौर मान ने बताया कि उनके पति रोज की तरह 9 जनवरी की शाम 5:30 बजे टहलने निकले थे। थोड़ी देर बाद उन्हें सूचना मिली कि उनके पति को किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है। मौके पर पहुंचे तो वह लहूलुहान हालत में पड़े थे।
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पड़ोसियों के मुताबिक, पीछे से आए सफेद तीन-पहिया वाहन ने टक्कर मारी और चालक फरार हो गया। घायल लेफ्टिनेंट जनरल को कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर ले जाया गया, लेकिन 10 जनवरी सुबह सड़क दुर्घटना में आई गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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एमडीसी थाना एसएचओ ने बताया कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज और संभावित मार्गों के कैमरों की जांच की जा रही है, लेकिन आरोपी तक अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया। पुलिस ने कहा कि हम हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपी को पकड़ेंगे।

बिहार रेजिमेंट के कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवा
लेफ्टिनेंट जनरल कुलवंत सिंह मान भारतीय सेना के प्रतिष्ठित अधिकारी थे। तीन दशक से अधिक सेवा के दौरान उन्होंने बिहार रेजीमेंट के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे कुशल रणनीतिकार और सैनिकों के बीच पिता तुल्य व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे।


जन्म और सैन्य कॅरिअर
उनका जन्म पंजाब के बठिंडा जिले के सैन्य परिवार में हुआ। परिवार में पत्नी और दो पुत्र हैं जिनमें एक भारतीय सेना में कर्नल रह चुके हैं, जबकि दूसरा कनाडा में रहते हैं। 12 जून 1960 को उन्हें बिहार रेजिमेंट की तीसरी बटालियन में कमीशन मिला। उन्होंने 12वीं बटालियन का गठन और नेतृत्व किया। 35 वर्षों से अधिक सेवा में उन्होंने माउंटेन ब्रिगेड, इन्फैंट्री ब्रिगेड और डिवीजन की कमान संभाली। वे इन्फैंट्री स्कूल और बिहार रेजीमेंटल सेंटर के कमांडेंट भी रहे। 31 दिसंबर 1996 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे शिक्षा और सैन्य गतिविधियों से जुड़े रहे और मोहाली स्थित कैनेडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के निदेशक रहे। हॉकी और गोल्फ में उनकी रुचि थी। उन्हें अनुशासित, कठोर लेकिन सौम्य व्यक्तित्व वाला अधिकारी माना जाता था।
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