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Panchkula News: घूस में विदेशी सैर और लग्जरी पैकेज, जनता की कमाई से खरीदीं महंगी गाड़ियां
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590 करोड़ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला : सीबीआई रिमांड में बड़ा खुलासा
हरियाणा के दागी अफसरों ने शेल कंपनियों में खपाए करोड़ों, पंजाब रियल एस्टेट में भी निवेश
दीपक शाही
पंचकूला। हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है भ्रष्टाचार की परतें उतनी ही चौंकाने वाली निकल रही हैं। रिमांड के दौरान हुए खुलासों ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ पैसों का गबन नहीं बल्कि सरकारी तंत्र और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से रचा एक मल्टी-लेयर्ड महाघोटाला है। जांच में सामने आया है कि आरोपी अधिकारियों राजेश सांगवान (मार्केटिंग बोर्ड), रणधीर सिंह (शिक्षा बोर्ड) और अमित दीवान (एचपीजीसीएल) ने निजी बैंकों में सरकारी खाते खुलवाने के बदले भारी-भरकम कमीशन डकारा। यह रिश्वत सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं थी, आरोपियों ने बदले में विदेशी यात्राएं और आलीशान टूर पैकेज का लुत्फ उठाया। जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से खरीदी गई हाई-वैल्यू लग्जरी गाड़ियां और संपत्ति अब सीबीआई के रडार पर हैं। यह खुलासा 27 अप्रैल को सीबीआई द्वारा लिए गए रिमांड के दौरान हुआ है।
पंजाब में संपत्ति भी खरीदी
शेल कंपनियों में निवेश के नाम पर गबन की गई राशि को उन कागजी कंपनियों के नाम पर सोना खरीदने और पंजाब-हरियाणा में अचल संपत्तियां बनाने में इस्तेमाल किया गया। सीबीआई अब इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और संपत्तियों के सेल डीड खंगाल रही है ताकि भ्रष्टाचार की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके। सीबीआई ने अदालत को संकेत दिया है कि इस खेल में अभी कई और बड़े बैंक अधिकारी फंस सकते हैं। एजेंसी ने आशंका जताई है कि अगर ये आरोपी बाहर आते हैं तो जांच की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं और अहम सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। अभी चार मुख्य आरोपियों अंकुर शर्मा, राजेश सांगवान, रणधीर सिंह और अमित दीवान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं
सीबीआई की रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार का खेल इतना व्यवस्थित था कि सरकारी खातों से शेल कंपनियों को लगातार भुगतान हो रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि विभाग को इसके ईमेल और एसएमएस अलर्ट भी मिल रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं।
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हरियाणा के दागी अफसरों ने शेल कंपनियों में खपाए करोड़ों, पंजाब रियल एस्टेट में भी निवेश
दीपक शाही
पंचकूला। हरियाणा के चर्चित 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है भ्रष्टाचार की परतें उतनी ही चौंकाने वाली निकल रही हैं। रिमांड के दौरान हुए खुलासों ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ पैसों का गबन नहीं बल्कि सरकारी तंत्र और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से रचा एक मल्टी-लेयर्ड महाघोटाला है। जांच में सामने आया है कि आरोपी अधिकारियों राजेश सांगवान (मार्केटिंग बोर्ड), रणधीर सिंह (शिक्षा बोर्ड) और अमित दीवान (एचपीजीसीएल) ने निजी बैंकों में सरकारी खाते खुलवाने के बदले भारी-भरकम कमीशन डकारा। यह रिश्वत सिर्फ नकदी तक सीमित नहीं थी, आरोपियों ने बदले में विदेशी यात्राएं और आलीशान टूर पैकेज का लुत्फ उठाया। जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से खरीदी गई हाई-वैल्यू लग्जरी गाड़ियां और संपत्ति अब सीबीआई के रडार पर हैं। यह खुलासा 27 अप्रैल को सीबीआई द्वारा लिए गए रिमांड के दौरान हुआ है।
पंजाब में संपत्ति भी खरीदी
शेल कंपनियों में निवेश के नाम पर गबन की गई राशि को उन कागजी कंपनियों के नाम पर सोना खरीदने और पंजाब-हरियाणा में अचल संपत्तियां बनाने में इस्तेमाल किया गया। सीबीआई अब इन गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन और संपत्तियों के सेल डीड खंगाल रही है ताकि भ्रष्टाचार की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके। सीबीआई ने अदालत को संकेत दिया है कि इस खेल में अभी कई और बड़े बैंक अधिकारी फंस सकते हैं। एजेंसी ने आशंका जताई है कि अगर ये आरोपी बाहर आते हैं तो जांच की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं और अहम सबूतों को नष्ट कर सकते हैं। अभी चार मुख्य आरोपियों अंकुर शर्मा, राजेश सांगवान, रणधीर सिंह और अमित दीवान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं
सीबीआई की रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार का खेल इतना व्यवस्थित था कि सरकारी खातों से शेल कंपनियों को लगातार भुगतान हो रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि विभाग को इसके ईमेल और एसएमएस अलर्ट भी मिल रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंदे रखीं।
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