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Punjab News: किसान संगठनों का 30 से चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा, इन मुद्दों पर पांच संगठन लामबंद
Fri, 25 Nov 2022 01:28 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2022 01:28 AM IST
सार
किसान नेता राजेवाल ने कहा कि किसानों को पहले से जितना पानी अलॉट किया गया था, उतना पानी अब खेतों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि जब से ट्यूबवेल आधारित सिंचाई शुरू की गई है, विभाग ने रजवाहों की सफाई ही नहीं की, जिसके चलते प्रत्येक रजवाहा पांच किलोमीटर पहले ही खत्म हो जाता है और खेतों तक पूरा पानी पहुंच नहीं पाता।
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किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल
- फोटो : ANI (फाइल फोटो)
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विस्तार
पंजाब के पांच किसान संगठन राज्य के पानी और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों को पंचायतों के नाम करने के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। गुरुवार को चंडीगढ़ में आयोजित सेमिनार के बाद इन संगठनों ने 30 नवंबर से चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाने का एलान किया। इसके साथ ही दो से 15 दिसंबर तक राज्यभर में झंडा मार्च के आयोजन की भी घोषणा की।
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सेमिनार के बाद प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि किसान संगठन अगले महीने से पंजाब के पानी की लड़ाई शुरू कर रहे हैं, जिसके तहत चंडीगढ़ में पक्का मोर्चा लगाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि इस लड़ाई की शुरुआत कर दी गई है और चंडीगढ़ में सेमिनार के बाद 28 नवंबर को जालंधर और 30 नवंबर को बठिंडा में सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए 50 हजार पोस्टर रिलीज किए गए हैं और 50 हजार ओर पोस्टर भी जल्द जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के इस आंदोलन को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है और 2 से 15 दिसंबर तक राज्यभर में किसान संगठन झंडा मार्च करेंगे।
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पानी के मसले पर राजेवाल ने कहा कि किसानों को पहले से जितना पानी अलॉट किया गया था, उतना पानी अब खेतों तक नहीं पहुंच रहा। उन्होंने कहा कि जब से ट्यूबवेल आधारित सिंचाई शुरू की गई है, विभाग ने रजवाहों की सफाई ही नहीं की, जिसके चलते प्रत्येक रजवाहा पांच किलोमीटर पहले ही खत्म हो जाता है और खेतों तक पूरा पानी पहुंच नहीं पाता।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह पानी कहां गया? उन्होंने आगे कहा कि पानी की लड़ाई केंद्र सरकार के साथ भी है, क्योंकि आज तक पानी को लेकर जितने भी समझौते किए गए, वह सभी अवैध हैं, क्योंकि पानी राज्य का विषय है। उन्होंने कहा कि पंजाब के पानी को लेकर या तो केंद्र रिपेरियन सिद्धांत को माने या हरियाणा को पानी देने से पहले 60:40 के अनुपात में यमुना का पानी भी पंजाब को दे।
जुमला मुश्तरका मालिकान जमीनों के बारे में राजेवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद पंजाब सरकार ने जल्दबाजी में कानून बना दिया, जिससे पूरे पंजाब के किसानों में घबराहट है।
उन्होंने कहा कि जब मुरब्बाबंदी के दौरान कट लगाया गया था, तब इन जमीनों को कामन-कॉज के लिए छोड़ दिया था। अब ये जमीनें किसानों से छीनकर पंचायतों को देने का फैसला पूरी तरह गलत है और इसका विरोध किया जाएगा।