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स्कॉलरशिप से पिता की सर्जरी कराई, लॉकडाउन में पूरे परिवार का पेट पाला

Fri, 10 Jun 2022 01:21 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 10 Jun 2022 01:21 AM IST
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Father got surgery done with scholarship, fed the whole family in lockdown
पंचकूला। छोटी सी उम्र में भी अपने पैरों पर खड़े हो जाते है, जिम्मेदारियां हो सिर पर तो बच्चे भी बड़े हो जाते हैं। ये शब्द मध्य प्रदेश के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में हिस्सा लेने पहुंचीं जिला शाजापुर के कुंदन और उसकी बहन अंजली पर सटीक बैठते हैं। इन दोनों खिलाड़ियों ने महज 15 से 17 साल की उम्र में स्कॉलरशिप लेकर अपने पिता की सर्जरी कराई। पूरे लॉक डाउन से लेकर अब तक अपने पूरे परिवार का पेट पाल रहे हैं। इन दोनों ने मलखंभ के टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया है। लगातार सात साल मुश्किलों से लड़ने के बाद कुंदन और अंजली के परिवार की जिंदगी अब पटरी पर आने लगी है। वे खेल और पढ़ाई को पूरा समय देने लगे हैं। कुंदन बीए प्रथम वर्ष का छात्र है जबकि अंजली ने 12वीं की परीक्षा पास की है।
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बिस्तर पर जूझते पिता को देख परिवार की जिम्मेदारी उठाई
इन दोनों खिलाड़ियों ने बचपन को अभी जीना शुरू किया था कि अचानक 2015 में सड़क हादसे में उनके पिता बने कछावा ने अपनी टांगें गवां दीं। घर में इतने पैसे नहीं थे कि वह अपनी सर्जरी करवा सकें। इसी बीच बच्चों की मां माया बाई कछावा ने लोगों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पेट पालना शुरू किया। बिस्तर पर जिंदगी से जूझते पिता और धूप में खेतों में काम करती मां के माथे से टपकते पसीने को देख बच्चों ने तय किया कि अब मां अकेली खेतों में काम नहीं करेगी। वे दोनों भाई-बहन उसके काम में हाथ बटाएंगे। इस बीच दोनों भाई -बहन ने सुबह और शाम के समय मलखंभ की शिक्षा भी लेनी शुरू कर दी।
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गोवा नेशनल के बाद मिली स्कॉलरशिप
कुंदन कछावा ने बताया कि गोवा में नेशनल चैंपियनशिप के बाद 2019 से दस हजार रुपये स्कॉलरिशप मिलना शुरू हुआ। इन पैसों से सबसे पहले अपने पिता के पैरों की सर्जरी कराई, क्योंकि सड़क हादसे के बाद उनके पैरों में पस पड़ गया था। वे चल नहीं सकते थे। सर्जरी के बाद कोरोना की वजह से लॉकडाउन लग गया, तब मां का काम भी बंद हो गया था। इस बीच पूरे परिवार का खर्च स्कॉलरशिप के पैसों से चला और आज भी चल रहा है। इन्हीं पैसों से पापा के कंबल और चद्दर का बिजनेस भी शुरू करवाया है। सर्जरी के बाद कुंदन के पिता बने कछावा बैठने लगे हैं। धीरे-धीरे उनका पुराना बिजनेस भी चल पड़ा है।
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द्रोणाचार्य अवार्डी ने बच्चों के संघर्ष को आगे बढ़ाया
द्रोणाचार्य अवार्डी योगेश मालवी ने मलखंभ की ट्रेनिंग के दौरान बच्चों को देखा तो उन्होंने दोनों बच्चों को आगे बढ़ाना शुरू किया। दोनों आज नेशनल स्तर के अच्छे खिलाड़ी हैं। एक तरफ जहां कुंदन ने नेशनल के टीम इवेंट में छह बार स्वर्ण पदक जीता है, वहीं उसकी छोटी बहन अंजली भी लगातार एक बार स्वर्ण और एक बार कांस्य पदक हासिल कर चुकी है।

खेलो इंडिया में मिले स्कॉलरशिप के पैसों से बनवाएंगे मकान
कुंदन और अंजली ने बताया कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स से मिलने वाले पांच लाख रुपये के स्कॉलरशिप से अपने माता -पिता के लिए घर बनवाएंगे। अभी वे किराए के मकान में गुजर बसर कर रहे हैं। कुंदन ने बताया कि उनके पिता का सपना है कि मलखंभ में इतना अच्छा प्रदर्शन करूं कि आने वाले समय में सरकार मुझे विक्रम अवार्ड के खिताब से नवाजे। उनका यह सपना भी पूूरा करना है।
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