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सभी को पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार, स्वीकार करें अभिभावक: हाईकोर्ट

Wed, 12 Jun 2024 05:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2024 05:38 AM IST
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Everyone has the right to choose life partner of their choice, parents should accept: High Court
चंडीगढ़। बेटी को बहला-फुसला कर भगा ले जाने से जुड़ी एफआईआर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में आरोपी और पीड़ित रिश्तों में होते हैं और इसको स्वीकार न कर पाने पर अभिभावक केस दर्ज करवा देते हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में 15 साल बाद एफआईआर रद्द करते हुए कहा कि माता-पिता को इस तथ्य को स्वीकार करना चाहिए कि उनके बच्चे अपने लिए जीवन साथी का व्यक्तिगत विकल्प चुन सकते हैं।
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याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी व्यक्ति ने बताया कि उसने अपनी प्रेमिका से 2009 में प्रेम विवाह किया था। प्रेम विवाह से प्रेमिका के परिजन नाखुश थे और इसी के चलते उन्होंने याची पर उसकी प्रेमिका के अपहरण का मामला दर्ज करवा दिया था। इसके सात साल बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और उसे जमानत भी मिल गई थी। याची ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि उसके खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया जाए। याची व उसकी प्रेमिका एक-दूसरे से प्यार करते हैं और 2010 से पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं और उनके तीन बच्चे हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की के अभिभावक के कहने पर दर्ज की गई प्राथमिकी को तब रद्द किया जाना चाहिए, जब यह पाया जाता है कि जोड़े ने विवाह कर लिया है। एक प्रेमी जोड़े के लिए, जो लंबे समय से खुशहाल शादीशुदा जीवन जी रहे हैं और उनके बच्चे हैं एफआईआर जारी रखना शर्मनाक होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को प्रेमी जोड़ों से संबंधित अपहरण के मामलों को रद्द करने की याचिकाओं पर लचीलापन दिखाना चाहिए। अपराध के समय पीड़िता के नाबालिग होने के मामलों में यदि वयस्क होने के बाद वह विवाह को जारी रखती है तो इसका मूल्यांकन कर एफआईआर खारिज की जा सकती है। दंपती के खुशहाल जीवन और बच्चे होने के बाद एफआईआर रद्द करने को लेकर बहुत अधिक विचार नहीं होना चाहिए।
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आदेश में प्यार को लेकर दिया शेक्सपियर का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शेक्सपियर की प्यार को लेकर लिखी कुछ पंक्तियों का हवाला दिया है। हाईकोर्ट ने विलियम शेक्सपियर के ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम के एक उदाहरण को दोहराते हुए कहा कि प्यार आंखों से नहीं, बल्कि दिमाग से देखता है और इसलिए पंखों वाला कामदेव अंधा है।
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