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Panchkula News: पति ने छोड़ा साथ तो भी नहीं हारी हिम्मत, सेनेटरी पैड का शुरू किया व्यापार

Sun, 24 Nov 2024 06:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Nov 2024 06:53 AM IST
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Even after her husband left her, she did not lose courage, started the business of sanitary pads
संवाद न्यूज एजेंसी
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पंचकूला। कर्म तेरी अच्छी है तो किस्मत तेरी दासी, मन तेरा साफ है तो यहीं मथुरा, काशी..., यह कहावत सरस मेले में आईं मोरनी की निर्मला पर बिल्कुल फिट बैठती हैं। पति से परेशान होकर महिलाएं अक्सर टूट जाती हैं, लेकिन अगर मन में कुछ करने की जिद हो तो कोई भी काम कठिन नहीं है। बस सच्ची लगन के साथ अपने काम को बड़े ईमानदारी से करना चाहिए। यह कहना है सरस मेले में मोरनी से आईं निर्मला देवी का। पति का सपोर्ट न होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और लोगों से मदद लेकर सेनेटरी पैड बनाने का बिजनेस शुरू किया।
बिजनेस चलने लगा तो स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़कर चटनी और खड़े मसाले बनाने और बेचने का काम शुरू किया। निर्मला देवी का कहना है कि पहले अकेले काम शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे समूह की महिलाओं के साथ जुड़कर काम शुरू किया। अब तक 30 से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर कारोबार कर रहीं हैं। आज भी मेरे साथ जुड़कर 12 महिलाएं काम कर रहीं है। इसके अलावा बहुत ही ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने मुझसे प्रेरित होकर खुद का कारोबार शुरू किया है।
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नशे की वजह से पति ने बेच दिया था घर
निर्मला देवी का कहना कि नौ साल पहले पति ने नशे की लत की वजह से घर तक बेच दिया था। रोड पर ही बच्चों के साथ गुजारा करना पड़ा था। दो बेटी और एक बेटे को अपना सहारा बनाकर आगे बढ़ी और खुद से कुछ करने की चाहत से काम शुरू किया। पहले तो सिर्फ मोरनी में महिलाओं को सेनेटरी पैड के बारे में जानकारी दी। डिमांड बढ़ती गई। इस समय हरियाणा के कई जिलों के साथ ही हिमाचल प्रदेश से सेनेटरी पैड के ऑर्डर आने लगे हैं।
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मक्के की रोटी और सरसों साग की डिमांड
फतेहाबाद से आईं स्वयं सहायता समूह ही सदस्य ऊषा रानी का कहना है कि 13 महिलाओं के साथ सरस मेले में मक्के दी रोटी और सरसों द साग का स्टॉल लगा रखा है। मेले में आने वाले लोगों के खाने में पहली पसंद यही बनी है।



सरस मेले से आत्मनिर्भर हो रहीं है महिलाएं
जिला कार्यक्रम प्रबंधक राहुल यादव ने बताया कि सरस मेले से स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं तीन हजार से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। अलग-अलग जिलों से आने वाली महिलाओं को सरस मेले में काम कर रही महिलाओं से मिलाया जाता है। उनके कार्यों को दिखाया जाता है। इससे महिलाएं आइडिया लेकर स्वयं से कारोबार शुरू कर सकें। सरस मेले में कुल 200 स्टॉल लगे हैं। जिसमें 30 स्टॉल फूड कोड के लगे हैं। सभी स्टॉल पर महिलाएं काम कर रहीं है। कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि 15 से अधिक प्रदेशों का स्टॉल लगा हुआ है। इसके राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बंगाल और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

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