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Panchkula News: माननीयों पर लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा देें ईडी-सीबीआई और आयकर विभाग
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पुराने मामलों की पहचान अब रंगों से होगी, लंबे समय से लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता देने की तैयारी
हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई शुरू की है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व व मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग को इसकी जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने को कहा है।
अदालत ने लंबे समय से लंबित मामलों को तुरंत पहचानने के लिए रंग-कोड व्यवस्था को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष यह सुनवाई हुई। पंजाब सरकार के वकील ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों के मामलों का पूरा विवरण राज्य सरकार के पास नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से केंद्रीय विभागों से जानकारी एकत्र करने को कहा। यह जानकारी अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर रखी जाएगी। अदालत ने कहा कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर होने पर जांच होगी। सीबीआई के वकील ने तीन दिन के भीतर विवरण देने का विश्वास दिलाया।
मामलों की निगरानी और रंग-कोड व्यवस्था
हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्वत संज्ञान लेकर शुरू की है। अदालत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के लंबित मामलों की निगरानी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को ऐसे मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दे चुका है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनकी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के आदेश से रुकी हुई है। खंडपीठ ने रजिस्ट्री की ओर से तैयार रंग-कोड वाली सूची भी देखी। इसमें रुके हुए मामलों की अलग श्रेणी बनाई गई है।
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हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई शुरू की है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व व मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की निगरानी प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग को इसकी जानकारी जुटाकर अदालत में पेश करने को कहा है।
अदालत ने लंबे समय से लंबित मामलों को तुरंत पहचानने के लिए रंग-कोड व्यवस्था को स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ के समक्ष यह सुनवाई हुई। पंजाब सरकार के वकील ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों के मामलों का पूरा विवरण राज्य सरकार के पास नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से केंद्रीय विभागों से जानकारी एकत्र करने को कहा। यह जानकारी अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर रखी जाएगी। अदालत ने कहा कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर होने पर जांच होगी। सीबीआई के वकील ने तीन दिन के भीतर विवरण देने का विश्वास दिलाया।
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मामलों की निगरानी और रंग-कोड व्यवस्था
हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई स्वत संज्ञान लेकर शुरू की है। अदालत पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के लंबित मामलों की निगरानी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को ऐसे मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने का निर्देश दे चुका है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनकी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के आदेश से रुकी हुई है। खंडपीठ ने रजिस्ट्री की ओर से तैयार रंग-कोड वाली सूची भी देखी। इसमें रुके हुए मामलों की अलग श्रेणी बनाई गई है।
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