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जरूरी है पराली प्रबंधन
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चंडीगढ़। धान उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है। हर साल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराई जा रही पराली को लेकर इस बार तस्वीर बदली हुई है। सूखे चारे की कमी को देखते हुए चारा व्यापारी पराली को हाथों हाथ खरीद रहे हैं। खास बात ये है कि अभी से पहले बासमती धान की पराली को 6 हजार रुपये प्रति एकड़ तक बुक कर दिया गया है। इसके अलावा, निजी उद्योग पीआर धान की पराली को खेत से ही खरीद रहे हैं। पराली के बढ़ते भावों को देखते हुए संभावना है कि इस बार खेत में पराली जलाने के मामले पिछले साल से कम हों।
पिछले साल गेहूं के सीजन के समय बारिश होने के चलते सूखा चारा कम तैयार हो पाया। इसके चलते इस समय तूड़ी का भाव 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। इसी को देखते हुए चारा व्यापारियों ने अब सूखे चारे में प्रयोग करने के लिए पराली की खरीद शुरू कर दी है। धान का कटोरा कहे जाने वाले कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल में सबसे अधिक बासमती धान लगाई जाती है। प्रदेशभर में 7 लाख हेक्टेयर से अधिक में इस बार बासमती किस्म की धान लगाई गई है। इसकी पराली के लिए व्यापारियों ने अभी से किसानों से एडवांस में बुकिंग कर ली है। किसानों को प्रति एकड़ 5 से 6 हजार रुपये पराली के लिए मिल रहे हैं और व्यापारी खेतों से ही उठाने का वादा कर रहे हैं। इसके अलावा, पीआर पराली की गांठे बनाकर भी व्यापारी उसे या तो एकत्रित कर रहे हैं या फिर गत्ता मिल और शराब की फैक्ट्रियां उसे खरीद रही हैं। पशु चारा व्यापारी सतपाल शर्मा ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार तूड़ी और पराली के भावों में बढ़ोतरी है। दिल्ली और राजस्थान के व्यापारी हरियाणा मेें पराली खरीद रहे हैं, जिसके चलते किसानों को इस बार पराली के अच्छे भाव मिल रहे हैं।
पानीपत में स्थापित 2 जी एथेनॉल प्लांट का भी असर
पराली के भावों में बढ़ोतरी को लेकर पानीपत में स्थापित 2 जी एथेनाल प्लांट होना भी बताया जा रहा है। करीब 900 करोड़ रुपये से तैयार प्लांट की प्रतिदिन 100 लीटर इथेनॉल बनाने की क्षमता रखता है। इसके लिए प्लांट की ओर से आसपास के जिलों में पराली कलेक्शन केंद्र स्थापित किए गए। प्लांट किसानों से 180 रुपये प्रति क्विंटल पराली खरीद रहा है। व्यापारियों को पता है कि प्लांट किसानों की पराली खरीदेगा, इसलिए वह पहले ही पराली अधिक रेट पर खरीद रहे हैं। इसके अलावा, पराली की गांठ बनाने वालों ने आईओसीएल से अनुबंध कर लिया है और वह पराली को प्लांट के डिपो तक पहुंचा रहे हैं। इससे किसान और व्यापारी दोनों को लाभ मिल रहा है। खास बात ये है कि पराली जलाने की बजाए उससे पैसे कमाए जा रहे हैं।
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किसान का पैसा खर्च हुए बिना खाली हो रहे खेत
अगर किसान खुद स्ट्रा बेलर से पराली के बंडल बनवाते हैं तो एक एकड़ पर करीब 2 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि एक एकड़ में पराली 3500 से रुपये तक बिक जाती है। इसके साथ ही पराली प्रबंधन के नाम पर सरकार की ओर से भी किसान को प्रति एकड़ एक हजार रुपये मिलते हैं। कई किसान पराली की गांठ बनाने वालों को मुफ्त में पराली उठाने के लिए दे रहे रहे हैं, ऐसे में किसान का बिना कोई पैसा खर्च हुए खेतों से पराली निकाली जा रही है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि यह किसानों के लिए राहत की बात है। किसानों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
265 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट किए जाने हैं स्थापित
हरियाणा सरकार पराली प्रबंधन के लिए 265 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने जा रही है। इसके लिए सरकार की तरफ से कई इनके चालू होने से सरकार को पराली और प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी। इन प्लांटों से निकलने वाली 3212 मिलियन मीट्रिक टन गैस को पेट्रोलियम कंपनियां खरीदेंगी और इसका इस्तेमाल वाहनों में पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर किया जाएगा।
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पिछले साल गेहूं के सीजन के समय बारिश होने के चलते सूखा चारा कम तैयार हो पाया। इसके चलते इस समय तूड़ी का भाव 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। इसी को देखते हुए चारा व्यापारियों ने अब सूखे चारे में प्रयोग करने के लिए पराली की खरीद शुरू कर दी है। धान का कटोरा कहे जाने वाले कैथल, कुरुक्षेत्र और करनाल में सबसे अधिक बासमती धान लगाई जाती है। प्रदेशभर में 7 लाख हेक्टेयर से अधिक में इस बार बासमती किस्म की धान लगाई गई है। इसकी पराली के लिए व्यापारियों ने अभी से किसानों से एडवांस में बुकिंग कर ली है। किसानों को प्रति एकड़ 5 से 6 हजार रुपये पराली के लिए मिल रहे हैं और व्यापारी खेतों से ही उठाने का वादा कर रहे हैं। इसके अलावा, पीआर पराली की गांठे बनाकर भी व्यापारी उसे या तो एकत्रित कर रहे हैं या फिर गत्ता मिल और शराब की फैक्ट्रियां उसे खरीद रही हैं। पशु चारा व्यापारी सतपाल शर्मा ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार तूड़ी और पराली के भावों में बढ़ोतरी है। दिल्ली और राजस्थान के व्यापारी हरियाणा मेें पराली खरीद रहे हैं, जिसके चलते किसानों को इस बार पराली के अच्छे भाव मिल रहे हैं।
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पानीपत में स्थापित 2 जी एथेनॉल प्लांट का भी असर
पराली के भावों में बढ़ोतरी को लेकर पानीपत में स्थापित 2 जी एथेनाल प्लांट होना भी बताया जा रहा है। करीब 900 करोड़ रुपये से तैयार प्लांट की प्रतिदिन 100 लीटर इथेनॉल बनाने की क्षमता रखता है। इसके लिए प्लांट की ओर से आसपास के जिलों में पराली कलेक्शन केंद्र स्थापित किए गए। प्लांट किसानों से 180 रुपये प्रति क्विंटल पराली खरीद रहा है। व्यापारियों को पता है कि प्लांट किसानों की पराली खरीदेगा, इसलिए वह पहले ही पराली अधिक रेट पर खरीद रहे हैं। इसके अलावा, पराली की गांठ बनाने वालों ने आईओसीएल से अनुबंध कर लिया है और वह पराली को प्लांट के डिपो तक पहुंचा रहे हैं। इससे किसान और व्यापारी दोनों को लाभ मिल रहा है। खास बात ये है कि पराली जलाने की बजाए उससे पैसे कमाए जा रहे हैं।
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किसान का पैसा खर्च हुए बिना खाली हो रहे खेत
अगर किसान खुद स्ट्रा बेलर से पराली के बंडल बनवाते हैं तो एक एकड़ पर करीब 2 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि एक एकड़ में पराली 3500 से रुपये तक बिक जाती है। इसके साथ ही पराली प्रबंधन के नाम पर सरकार की ओर से भी किसान को प्रति एकड़ एक हजार रुपये मिलते हैं। कई किसान पराली की गांठ बनाने वालों को मुफ्त में पराली उठाने के लिए दे रहे रहे हैं, ऐसे में किसान का बिना कोई पैसा खर्च हुए खेतों से पराली निकाली जा रही है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि यह किसानों के लिए राहत की बात है। किसानों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
265 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट किए जाने हैं स्थापित
हरियाणा सरकार पराली प्रबंधन के लिए 265 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने जा रही है। इसके लिए सरकार की तरफ से कई इनके चालू होने से सरकार को पराली और प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी। इन प्लांटों से निकलने वाली 3212 मिलियन मीट्रिक टन गैस को पेट्रोलियम कंपनियां खरीदेंगी और इसका इस्तेमाल वाहनों में पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर किया जाएगा।