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डॉक्टरों की हड़ताल : स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरीं, नहीं हुई सर्जरी, 12 को किया रेफर
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। मांगों को लेकर डॉक्टरों की 36 घंटे की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गईं। दो दिन की हड़ताल के कारण मरीज और तीमारदार बेहाल हो गए। सेक्टर-6 समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इमरजेंसी और ओपीडी में काम नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल के दूसरे दिन भी अस्पताल में सर्जरी दिन बंद रही। 36 घंटे बाद अस्पताल एक शव का पोस्टमार्टम किया गया, जबकि गंभीर 12 मरीजों को उपचार के लिए चंडीगढ़ सेक्टर-32 के जीएमसीएच और पीजीआई रेफर किया गया। शुक्रवार को डीएनबी सहित सेवानिवृत्त डॉक्टरों ने अस्पताल का मोर्चा संभाला। इस दौरान करीब 60 मरीजों को दाखिल किया गया और करीब दो हजार मरीजों की ओपीडी में जांच की गई है। करीब पांच महिलाओं की स्टाफ नर्सों ने डिलिवरी करवाई।
गर्भवती महिला को नहीं किया दाखिल
भैसा टिब्बा निवासी 32 वर्षीय दीपा नागरिक अस्पताल के गायनी ओपीडी में जांच के लिए पहुंची। जहां डॉक्टर ने उसकी जांच तक नहीं की। अस्पताल के डॉक्टरों ने शुक्रवार को उसे डिलिवरी का समय दिया गया था। वह अपने निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंच गई थी। सुबह 9 से 1 बजे तक दीपा अपने पति और बच्चों के साथ लेबर रूम से लेकर गायनी ओडीपी के चक्कर काटती रही, लेकिन उसे अस्पताल में दाखिल नहीं किया गया। मजबूरन वह घर लौटना पड़ा।
बच्चे के पांव में फ्रैक्चर, सीनियर डॉक्टर नहीं, लौटाया
खटौली निवासी तीन वर्षीय अरुण के पांव में फ्रैक्चर था। उसके पैर के बीच में रॉड भी लगी थी। पिछले कई दिनों से सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। शुक्रवार को ओपीडी में जांच के लिए डॉक्टरों ने बुलाया था, उसके पांव में दर्द भी था। ओपीडी में आने के बाद पता चला कि सीनियर डॉक्टर नहीं है। जिसके बाद अरुण के माता पिता को बच्चे दर्द की दवा लेकर घर लेकर लौटना पड़ा।
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डॉक्टर नहीं मिले तो चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा लिया
पांव में जख्म बढ़ने के बाद बरवाला निवासी किशोर कुमार सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार के लिए पहुंचे। जहां उन्हें डॉक्टरों के हड़ताल का पता चला। अस्पताल में सीनियर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के चलते किशोर ने ड्रेसिंग के बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों से चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा लिया। ताकि सही समय पर उन्हें सही उपचार मिल सके। क्योंकि किशोर के पांव में गहरा जख्म है, उसका समय पर सही जरूरी है।
दाखिल गर्भवती महिला का नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड
बलटाना निवासी 21 वर्षीय राधा नागरिक अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में 23 जुलाई को दाखिल हुई थी। उसे बुखार था, वह दो माह की गर्भवती है। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा था। डॉक्टरों के हड़ताल के चलते दो दिन बाद भी उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया है।
यहां नहीं मिले सीनियर डॉक्टर, डीएनबी को देख मरीज लौटे
पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6 में एमडी मेडिसिन, यूरोलॉजी विभाग, स्किन, अर्थोपेडिक्स, मनोरोग विभाग चेस्ट एंड टीबी, गायनी, सर्जरी, कैंसर ओपीडी में सीनियर डॉक्टर नहीं बैठे थे। जिसके चलते करीब 50 फीसदी मरीज बिना उपचार के लौट गए। यह हड़ताल कालका, पिंजौर, बरवाला, मोरनी, रायपुररानी सहित सभी जगह रही।
इलाज के लिए सभी सभी ओपीडी में डीएनबी, एनएचएम और कंसल्टेंट डॉक्टरों को रोका गया था। करीब 60 मरीजों को दाखिल किया गया। दो हजार मरीजों ने ओपीडी में जांच कराया है। इमरजेंसी में आने वाली करीब 5 से 6 महिलाओं की डिलिवरी भी करवाई गई है। - डॉ. उमेश मोदी, पीएमओ, नागरिक अस्पताल पंचकूला।
हमारी मांग काफी समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि पीजी करने के लिए डॉक्टरों को एक करोड़ का बाॅन्ड 50 लाख किया जाए। एसएमओ की सीधी भर्ती नहीं की जाए। डॉक्टरों को एसीपी और भत्ते केंद्र सरकार के बराबर मिले। विशेषज्ञ डॉक्टरों का अलग से कैडर बनाया जाए। अगर ये मांगे नहीं मानी गई तो आने वाले समय में हड़ताल जारी रहेगा। - डॉ. मंदीप सिंह, जिला प्रधान पंचकूला मेडिकल एसोसिएशन।
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पंचकूला। मांगों को लेकर डॉक्टरों की 36 घंटे की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गईं। दो दिन की हड़ताल के कारण मरीज और तीमारदार बेहाल हो गए। सेक्टर-6 समेत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इमरजेंसी और ओपीडी में काम नहीं होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल के दूसरे दिन भी अस्पताल में सर्जरी दिन बंद रही। 36 घंटे बाद अस्पताल एक शव का पोस्टमार्टम किया गया, जबकि गंभीर 12 मरीजों को उपचार के लिए चंडीगढ़ सेक्टर-32 के जीएमसीएच और पीजीआई रेफर किया गया। शुक्रवार को डीएनबी सहित सेवानिवृत्त डॉक्टरों ने अस्पताल का मोर्चा संभाला। इस दौरान करीब 60 मरीजों को दाखिल किया गया और करीब दो हजार मरीजों की ओपीडी में जांच की गई है। करीब पांच महिलाओं की स्टाफ नर्सों ने डिलिवरी करवाई।
गर्भवती महिला को नहीं किया दाखिल
भैसा टिब्बा निवासी 32 वर्षीय दीपा नागरिक अस्पताल के गायनी ओपीडी में जांच के लिए पहुंची। जहां डॉक्टर ने उसकी जांच तक नहीं की। अस्पताल के डॉक्टरों ने शुक्रवार को उसे डिलिवरी का समय दिया गया था। वह अपने निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंच गई थी। सुबह 9 से 1 बजे तक दीपा अपने पति और बच्चों के साथ लेबर रूम से लेकर गायनी ओडीपी के चक्कर काटती रही, लेकिन उसे अस्पताल में दाखिल नहीं किया गया। मजबूरन वह घर लौटना पड़ा।
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बच्चे के पांव में फ्रैक्चर, सीनियर डॉक्टर नहीं, लौटाया
खटौली निवासी तीन वर्षीय अरुण के पांव में फ्रैक्चर था। उसके पैर के बीच में रॉड भी लगी थी। पिछले कई दिनों से सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। शुक्रवार को ओपीडी में जांच के लिए डॉक्टरों ने बुलाया था, उसके पांव में दर्द भी था। ओपीडी में आने के बाद पता चला कि सीनियर डॉक्टर नहीं है। जिसके बाद अरुण के माता पिता को बच्चे दर्द की दवा लेकर घर लेकर लौटना पड़ा।
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डॉक्टर नहीं मिले तो चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा लिया
पांव में जख्म बढ़ने के बाद बरवाला निवासी किशोर कुमार सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार के लिए पहुंचे। जहां उन्हें डॉक्टरों के हड़ताल का पता चला। अस्पताल में सीनियर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के चलते किशोर ने ड्रेसिंग के बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों से चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा लिया। ताकि सही समय पर उन्हें सही उपचार मिल सके। क्योंकि किशोर के पांव में गहरा जख्म है, उसका समय पर सही जरूरी है।
दाखिल गर्भवती महिला का नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड
बलटाना निवासी 21 वर्षीय राधा नागरिक अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में 23 जुलाई को दाखिल हुई थी। उसे बुखार था, वह दो माह की गर्भवती है। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा था। डॉक्टरों के हड़ताल के चलते दो दिन बाद भी उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया है।
यहां नहीं मिले सीनियर डॉक्टर, डीएनबी को देख मरीज लौटे
पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6 में एमडी मेडिसिन, यूरोलॉजी विभाग, स्किन, अर्थोपेडिक्स, मनोरोग विभाग चेस्ट एंड टीबी, गायनी, सर्जरी, कैंसर ओपीडी में सीनियर डॉक्टर नहीं बैठे थे। जिसके चलते करीब 50 फीसदी मरीज बिना उपचार के लौट गए। यह हड़ताल कालका, पिंजौर, बरवाला, मोरनी, रायपुररानी सहित सभी जगह रही।
इलाज के लिए सभी सभी ओपीडी में डीएनबी, एनएचएम और कंसल्टेंट डॉक्टरों को रोका गया था। करीब 60 मरीजों को दाखिल किया गया। दो हजार मरीजों ने ओपीडी में जांच कराया है। इमरजेंसी में आने वाली करीब 5 से 6 महिलाओं की डिलिवरी भी करवाई गई है। - डॉ. उमेश मोदी, पीएमओ, नागरिक अस्पताल पंचकूला।
हमारी मांग काफी समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि पीजी करने के लिए डॉक्टरों को एक करोड़ का बाॅन्ड 50 लाख किया जाए। एसएमओ की सीधी भर्ती नहीं की जाए। डॉक्टरों को एसीपी और भत्ते केंद्र सरकार के बराबर मिले। विशेषज्ञ डॉक्टरों का अलग से कैडर बनाया जाए। अगर ये मांगे नहीं मानी गई तो आने वाले समय में हड़ताल जारी रहेगा। - डॉ. मंदीप सिंह, जिला प्रधान पंचकूला मेडिकल एसोसिएशन।